राजस्थान के दूदू में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अचानक तीखा टकराव देखने को मिला। 1 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष के जन्मदिन पर राज्य भर में समर्थकों ने विभिन्न आयोजन किए थे, लेकिन दूदू के कार्यक्रम में डोटासरा की मौजूदगी के दौरान ही कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो फुटेज में कार्यक्रम स्थल पर भारी अफरा-तफरी, तीखी नोकझोंक और हंगामा साफ नजर आ रहा है। इस अफरा-तफरी के बीच यह दावा भी सामने आया कि एक युवक ने डोटासरा की गाड़ी का शीशा तोड़ने का प्रयास किया।
मंच पर पहुंचते ही गरमाया माहौल और भड़के डोटासरा
डोटासरा जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, पहले से जारी विवाद ने उग्र रूप ले लिया और पूरे परिसर में गहमागहमी बढ़ गई। मंच पर पहुंचकर स्थिति को बिगड़ते देख प्रदेश अध्यक्ष बेहद नाराज नजर आए। उन्होंने हंगामे में शामिल लोगों को शांत कराने के लिए कड़े तेवर दिखाए और सीधे तौर पर एक युवक की ओर मुखातिब हुए। सार्वजनिक मंच से उन्होंने युवक को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में बैठने का निर्देश दिया।
डोटासरा ने उस युवक को संबोधित करते हुए कहा,
“मिस्टर कमलेश, तुम बड़ा आदमी नहीं, बैठ जा.”इस सख्त रुख और फटकार का वीडियो भी इंटरनेट पर तेजी से फैल गया, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
दूदू के राजनीतिक समीकरण और स्थानीय प्रभाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके के सियासी समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूदू क्षेत्र में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बाबूलाल नागर का खासा राजनीतिक प्रभाव माना जाता रहा है, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नजदीकी माना जाता है। हालांकि इस आयोजन के संदर्भ में यह तथ्य भी सामने आया है कि बाबूलाल नागर की ओर से डोटासरा के स्वागत की तैयारियां की गई थीं और जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं के बीच हुआ यह टकराव स्थानीय स्तर पर खींचतान की ओर इशारा करता है।
गुटबाजी की अटकलें और अंदरूनी खींचतान
कार्यक्रम में हुए इस विवाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कई लोग इसे पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा मान रहे हैं, हालांकि वीडियो के आधार पर विवाद के वास्तविक कारणों या किसी विशिष्ट गुट की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती। राजस्थान कांग्रेस में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने की घटनाएं पहले भी देखी गई हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के सामने हुए इस ताजा हंगामे ने संगठन के भीतर समन्वय और स्थानीय स्तर पर जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य को लेकर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

















