राजस्थान के नागरिकों की रोजमर्रा की खान-पान की आदतों को सेहतमंद बनाने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए एक व्यापक राज्यव्यापी मुहिम शुरू की जा रही है। राज्य प्रशासन 'सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान' नाम से यह विशेष जनजागरण अभियान चलाने जा रहा है। इसका प्राथमिक मकसद लोगों को अपनी नियमित थाली में तेल, नमक और चीनी का अनुपात घटाने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों में की जाने वाली मिलावट की पहचान करने, क्षेत्र में उगने वाले स्थानीय पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने और अन्न की बर्बादी पर पूरी तरह रोक लगाने का सशक्त संदेश घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।
यह पूरा जागरूकता पखवाड़ा 3 अक्टूबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाएगा। इस व्यापक कार्यक्रम का मूल मंत्र सुरक्षित खाएं, स्वस्थ रहें, स्थानीय खाएं और मिलावट को हराएं तय किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक लोगों को यह समझाया जाएगा कि भोजन में किए गए छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव दीर्घकालिक रूप से बड़े स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं। इस कार्यक्रम की पहुंच केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें शैक्षणिक संस्थाओं, उच्च शिक्षण परिसरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
विद्यार्थियों के बीच पोषण जागरूकता से होगी शुरुआत
अभियान का पहला चरण भावी पीढ़ी को जागरूक करने पर केंद्रित होगा। 3 अक्टूबर और 5 अक्टूबर को राज्यभर के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 'स्कूल ईट राइट डे' का विशेष आयोजन तय किया गया है। इन दो दिनों में शिक्षकों और विशेषज्ञों के जरिए विद्यार्थियों को संतुलित भोजन, स्वच्छता और सुरक्षित आहार के बुनियादी सिद्धांत सिखाए जाएंगे। बच्चों को न केवल अपनी दैनिक आदतों में सुधार करने की प्रेरणा दी जाएगी, बल्कि उन्हें इस बात के लिए भी तैयार किया जाएगा कि वे अपने माता-पिता, परिवारजनों और पड़ोसियों को भी सही खान-पान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ दो दिवसीय अभियान
त्योहारी सीजन और आम दिनों में मिलावटी सामान की बिक्री रोकने तथा जनता को सचेत करने के लिए 6 और 7 अक्टूबर की तारीखें तय की गई हैं। इन दो दिनों में 'मिलावट को पहचानो-मिलावट को हराओ' शीर्षक से विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके तहत आम उपभोक्ताओं को घरेलू स्तर पर खाद्य सामग्रियों की शुद्धता जांचने, सामान्य मिलावट को पहचानने और खरीदारी करते समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। उपभोक्ताओं को सिखाया जाएगा कि वे बाजार में उपलब्ध असुरक्षित खाद्य पदार्थों से खुद को और अपने परिवार को कैसे बचा सकते हैं।
संतुलित थाली और पैकेटबंद सामान के लेबल को समझना
पोषण के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाने के लिए 8 और 9 अक्टूबर को 'हेल्दी राजस्थान-हेल्दी थाली डे' के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान लोगों को पारंपरिक और संतुलित भोजन की संरचना के बारे में बताया जाएगा कि उनकी थाली में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और हरी सब्जियों का सही अनुपात क्या होना चाहिए। इसके बाद 12 अक्टूबर को 'रीड द लेबल-ईट राइट, ईट सेफ' अभियान के जरिए आधुनिक पैकेज्ड फूड संस्कृति पर जागरूकता फैलाई जाएगी। इसमें नागरिकों को डिब्बाबंद खाद्य सामग्री के पैकेट पर छपी न्यूट्रिशन वैल्यू, एक्सपायरी डेट, सामग्री की सूची और सोडियम या शुगर की मात्रा को ध्यानपूर्वक पढ़ने तथा समझने का अभ्यास कराया जाएगा।
उच्च शिक्षण संस्थानों के भीतर स्वस्थ वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से 13 और 14 अक्टूबर को 'ईट राइट कैम्पस डे' मनाया जाएगा। इसके तहत राज्य के प्रमुख कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण परिसरों की कैंटीन तथा मेस में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता सुधारने और छात्र समुदाय में सुरक्षित आहार संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
भोजन की बर्बादी रोकने के लिए होटल और रेस्टोरेंट की भागीदारी
घरों के अलावा व्यावसायिक स्तर पर तैयार होने वाले भोजन के सम्मान और संरक्षण के लिए 15 और 16 अक्टूबर को 'फूड वेस्ट-सेव फूड डे' आयोजित होगा। इस चरण में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग संचालकों को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। इन प्रतिष्ठानों को बचे हुए भोजन के उचित प्रबंधन, अनावश्यक बर्बादी पर नियंत्रण और पके हुए भोजन को कचरे में फेंकने से रोकने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। मकसद यह है कि समाज के हर तबके में अन्न संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा हो सके।
नागरिकों को दिलाई जाएगी स्वस्थ जीवनशैली और श्रीअन्न की शपथ
इस पूरे पखवाड़े का एक अहम पहलू लोगों का व्यक्तिगत संकल्प होगा। अभियान के दौरान नागरिकों को दैनिक जीवन में स्वास्थ्य अनुकूल आदतें अपनाने की औपचारिक शपथ दिलाई जाएगी। इस शपथ में तीन मुख्य बातों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। पहला, भोजन में तेल, नमक और शर्करा की मात्रा को सीमित करना। दूसरा, पोषक तत्वों से भरपूर श्रीअन्न यानी मोटे अनाजों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन अपने आहार में अनिवार्य रूप से शामिल करना। तीसरा, केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग अथवा शारीरिक व्यायाम करना।
फूड सेफ्टी व ड्रग कंट्रोल कमिश्नर अविचल चतुर्वेदी ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि 'सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान' कार्यक्रम को राज्य के विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस बहुआयामी पहल का अंतिम लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित आहार, कम नमक-तेल-चीनी के उपयोग, स्थानीय कृषि उपज के उपभोग और एक अनुशासित, निरोगी जीवनशैली से जोड़ना है।























