भारत अपनी अनोखी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर और कई रहस्यमयी स्थानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक यहां की खूबसूरती का लुत्फ उठाने के लिए आते हैं, लेकिन देश की भौगोलिक सीमा के भीतर कुछ ऐसी खास जगहें भी मौजूद हैं जहां आम लोगों का प्रवेश या तो पूरी तरह निषिद्ध है या फिर वहां जाने के लिए बेहद कड़ी प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता होती है। इस तरह के प्रतिबंध किसी एक कारण से नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक मान्यताओं की रक्षा, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और स्थानीय आदिवासी समुदायों की संस्कृति को बाहरी प्रभावों से बचाने जैसे गंभीर उद्देश्यों के तहत लगाए गए हैं।
बैरन आइलैंड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बीच स्थित बैरन आइलैंड भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी होने का गौरव रखता है। वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा और आपदा से जुड़े जोखिमों के कारण आम जनता को इस द्वीप पर पैर रखने या उतरने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाती है। जो पर्यटक इस इलाके में आते हैं, वे केवल क्रूज या नावों के माध्यम से समुद्र में सुरक्षित दूरी पर रहते हुए इस ज्वालामुखी को दूर से ही निहार सकते हैं।
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड, अंडमान
अंडमान सागर में स्थित नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड देश के सबसे अधिक प्रतिबंधित और रहस्यमयी क्षेत्रों में शुमार किया जाता है। इस द्वीप पर सेंटिनलीज़ नामक आदिवासी जनजाति निवास करती है, जो आधुनिक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटकर अपनी प्राचीन जीवनशैली में जीती है। इस अनूठी जनजाति की सुरक्षा और उनकी संस्कृति को बाहरी संक्रमण या खतरों से बचाने के लिए सरकार ने इस द्वीप पर आम लोगों के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है और भारतीय नौसेना द्वारा इस क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जाती है.
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई
महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र देश के परमाणु विज्ञान और अनुसंधान कार्यक्रमों का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है। देश की सामरिक और ऊर्जा संबंधी प्राथमिकताओं के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील उच्च-सुरक्षा वाला क्षेत्र है, जहां आम नागरिकों का प्रवेश असंभव है। इस परिसर में केवल उन्हीं अधिकृत कर्मचारियों और वैज्ञानिकों को जाने की अनुमति दी जाती है जिनके पास उच्च स्तर की सुरक्षा मंजूरी होती है.
परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास के परिसर
भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थापित परमाणु ऊर्जा संयंत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संवेदनशीलता के मामले में सर्वोच्च प्राथमिकता वाले स्थान होते हैं। इन परिसरों के आसपास सुरक्षा के अत्यंत कड़े इंतजाम किए जाते हैं और आम जनता का इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है। बिना वैध सुरक्षा मंजूरी और विशेष अनुमति पत्रों के इन परिसरों की सीमा के पास भी फटकना मुमकिन नहीं होता है.
चुनिंदा पुरातात्विक और विरासत स्थल
भारत के कई प्राचीन और खूबसूरत स्थापत्य स्मारक ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जो सामरिक दृष्टि से संवेदनशील सीमाओं के पास या विशेष पुरातात्विक दायरे में आते हैं। सुरक्षा मानकों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की खातिर आम पर्यटकों को इन संरचनाओं के कुछ हिस्सों तक जाने से रोक दिया जाता है। कई ऐसे संवेदनशील स्मारक भी हैं जहां देश के नागरिकों को भी विशेष परमिट लेना पड़ता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए ये नियम और भी ज्यादा कड़े और जटिल होते हैं.
निकोबार के संरक्षित आदिवासी क्षेत्र
निकोबार द्वीप समूह के कई चुनिंदा भौगोलिक हिस्सों को वहां के स्थानीय आदिवासी समूहों के अधिकारों की रक्षा के लिए आधिकारिक रूप से संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इन इलाकों में बाहरी लोगों के आने-जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है ताकि आधुनिक दुनिया के संपर्क से इन जनजातियों की पारंपरिक जीवनशैली, स्वास्थ्य और संस्कृति पर कोई भी प्रतिकूल असर न पड़े। सरकार इन समुदायों के संरक्षण को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाती है.



















