राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रहे नगरीय निकाय चुनाव की हलचल के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने एक साझा जनसभा को संबोधित किया है। इस कार्यक्रम के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। नगर निगम के वार्ड 146 में आयोजित इस सभा में दोनों दलों के प्रमुख नेताओं ने एक ही मंच से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी को सीधी चुनौती देने का ऐलान किया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि हनुमान बेनीवाल तय समय से थोड़ा विलंब से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जबकि असदुद्दीन ओवैसी ने पहले से ही इलाके में अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार की कमान संभाल रखी थी। बेनीवाल के मंच पर पहुंचते ही दोनों ने संयुक्त रूप से उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
भविष्य के सियासी समीकरणों के संकेत
इस संयुक्त मंच से दोनों नेताओं ने जो संकेत दिए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि एआईएमआईएम और आरएलपी का यह राजनीतिक मेल-मिलाप केवल स्थानीय निकाय चुनावों तक ही सीमित रहने वाला नहीं है। ओवैसी और बेनीवाल के बयानों से इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि इस गठबंधन को आने वाले समय में विधानसभा चुनाव तक आगे बढ़ाया जा सकता है। असदुद्दीन ओवैसी ने इसे राजस्थान की पारंपरिक दो-ध्रुवीय राजनीति के बरक्स एक मजबूत तीसरा विकल्प खड़ा करने की शुरुआत करार दिया। वहीं, हनुमान बेनीवाल ने भी इस सियासी गठजोड़ को राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया है, जिससे दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला
जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पर ही तीखे राजनीतिक प्रहार किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सियासत दशकों से इन्हीं दो दलों के इर्द-गिर्द सिमटी रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि जनता के सामने एक वास्तविक तीसरा विकल्प पेश किया जाए। आगामी 11 सितंबर को होने वाले निकाय चुनाव को उन्होंने मतदाताओं के लिए एक बड़ा इम्तिहान बताया। ओवैसी ने लोगों से आह्वान किया कि वे एआईएमआईएम उम्मीदवार के साथ-साथ उन सभी वार्डों में आरएलपी उम्मीदवारों के पक्ष में भी मतदान करें जहां वे चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर ध्रुवीकरण और समाज को बांटने की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव महज कुछ दलों की हार-जीत का मुकाबला नहीं है, बल्कि आम जनता के बुनियादी मसलों पर फैसला लेने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
हनुमान बेनीवाल के तेवर और किसानों के मुद्दे
आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने मंच से बोलते हुए इस गठबंधन को प्रदेश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने याद दिलाया कि जाट और मुस्लिम समुदाय ऐतिहासिक रूप से भी कई मौकों पर राजनीतिक रूप से साथ रहे हैं और भविष्य में भी मिलकर एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकते हैं। बेनीवाल ने कड़े शब्दों में राज्य सरकार को पेपर लीक के मामलों, किसानों की समस्याओं, केंद्र की अग्निवीर योजना और युवाओं के लगातार बढ़ रहे बेरोजगारी संकट पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने घोषणा की कि आरएलपी और एआईएमआईएम का यह साझा मंच युवाओं और किसानों के अधिकारों की लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ेगा। निकाय चुनाव के बहाने शुरू हुआ यह सियासी मेल यदि आगे बढ़ता है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में यह एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकता है, जिसने पारंपरिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
तीसरे मोर्चे की राह और आगे की चुनौतियां
जयपुर में हुई इस जनसभा को राजनीतिक विश्लेषक बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में अब तक सारा मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा है। ऐसे में एआईएमआईएम और हनुमान बेनीवाल की पार्टी का इस तरह हाथ मिलाना इस स्थापित राजनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, यह गठबंधन चुनावी मैदान में कितना कारगर साबित होगा, इसका असली पैमाना आने वाले निकाय चुनाव के नतीजे तय करेंगे। फिर भी, जिस तरह से दोनों नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनावों तक साथ मिलकर चलने के संकेत दिए हैं, उसने राजस्थान की सियासत में तीसरे मोर्चे की बहस को पुनर्जीवित कर दिया है और चुनावी सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है।


















