राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के दौरान झालावाड़ जिले से कर्तव्यनिष्ठा का एक खास दृश्य सामने आया है, जहाँ महिला सिपाही अंतिमा सहारिया अपने एक वर्षीय बच्चे को सीने से लगाए मतदान केंद्र की सुरक्षा संभालती दिखीं. लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराना और दूसरी ओर अपने छोटे बच्चे की परवरिश करना, इन दोनों मोर्चों पर वह एक साथ डटी रहीं.
खानपुर के सारोला मतदान केंद्र पर दिखी कर्तव्यपरायणता
मतदान दिवस पर अंतिमा सहारिया खानपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सारोला मतदान केंद्र पर तैनात थीं. इस दौरान उनकी गोद में उनका 12 महीने का मासूम बेटा दक्ष नजर आया. एक पुलिसकर्मी की वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था कायम रखने की सख्त जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ, वह एक मां के रूप में अपने शिशु की देखभाल भी करती रहीं. मतदान केंद्र पर आने वाले मतदाताओं और अन्य कर्मियों के बीच उनके इस समर्पण ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा.
बारां जिले से झालावाड़ में लगाई गई थी चुनावी ड्यूटी
कांस्टेबल अंतिमा सहारिया मूल रूप से बारां जिले के भंवरगढ़ पुलिस थाने में पदस्थापित हैं. राज्य में चल रहे पंचायती राज चुनाव की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई थी, जिसके तहत उन्हें बारां से झालावाड़ जिले भेजा गया था. घर और थाने से दूर दूसरे जिले में ड्यूटी होने के बावजूद, वह अपने 12 माह के बेटे दक्ष को साथ लेकर अपने कार्यस्थल पर पहुंचीं और तय जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया.
नौकरी और मातृत्व के बीच संतुलन की वास्तविक तस्वीर
यह घटना उन कामकाजी महिलाओं की रोजमर्रा की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, जो अपने परिवार और पेशेवर जिम्मेदारियों को एक साथ संभालती हैं. सुरक्षा बलों में तैनात महिला कर्मियों के लिए फील्ड ड्यूटी और छोटे बच्चों का लालन-पालन साथ करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है. अंतिमा का यह प्रयास दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों और कठिन जिम्मेदारियों के बावजूद समर्पण और धैर्य के साथ दायित्वों का निर्वहन किया जा सकता है.
























