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झुंझुनूं के जीतू फौजी ने दिखाया अनूठा जज्बा, मुफ्त ट्रेनिंग देकर 25 युवाओं को दिलाई सेना की नौकरीराजस्थान
26 अक्तू॰ 2026, 8:46 am (2 घंटे पहले)· 2

झुंझुनूं के जीतू फौजी ने दिखाया अनूठा जज्बा, मुफ्त ट्रेनिंग देकर 25 युवाओं को दिलाई सेना की नौकरी

भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू फौजी झुंझुनूं में ग्रामीण युवाओं को बिना किसी फीस के शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से अब तक 25 युवा सेना और अग्निवीर योजना में चयनित हो चुके हैं।

झुंझुनूं में भोर के ठीक 4:30 बजे अभी चारों तरफ घना अंधेरा पसरा होता है, मगर खेल के मैदान में एक पूर्व सैनिक अपने संकल्प के साथ पूरी मुस्तैदी से खड़े नजर आते हैं। धीरे-धीरे गांव के नौजवान भी वहां जुटने शुरू हो जाते हैं, जिनके कदमों में दौड़ने की बेजोड़ ऊर्जा और आंखों में देश की रक्षा के लिए सेना की वर्दी हासिल करने का सपना होता है। स्ट्रेचिंग और वार्मअप से शुरू होने वाली इस कड़ी ट्रेनिंग में शरीर से पसीना बहता है, बुलंद हौसले तैयार होते हैं और राष्ट्र सेवा का पक्का इरादा आकार लेता है। यह प्रेरणादायक कहानी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू फौजी की है, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जीवन जीने के बजाय ग्रामीण इलाकों के युवाओं को फौज में भेजने का बीड़ा उठाया है।

वीरों की भूमि पर युवाओं को निःशुल्क मार्गदर्शन

शौर्य और पराक्रमी वीरों की धरती के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाले झुंझुनूं जिले के गांवों और ढाणियों से वर्षों से युवा सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की रक्षा करते आए हैं। इसी गौरवशाली परंपरा को जीवित रखते हुए जीतू फौजी हर रोज सुबह 30 से 40 युवाओं को पूरी तन्मयता के साथ फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। इस नेक अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे इन युवाओं से किसी भी तरह की फीस के रूप में एक भी रुपया नहीं लेते हैं। उनका एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मेधावी और गरीब परिवार के युवा की आर्थिक कमजोरी उसके सेना में जाने के सपने की राह में कभी बाधा न बने।

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साल 2021 में पूरी की सैन्य सेवा, जारी है अभियान

जितेंद्र सिंह साल 2021 में भारतीय सेना से रिटायर हुए थे। सेना की नौकरी के दौरान उन्होंने अनुशासन, कठिन परिश्रम और समर्पण को अपने जीवन का सबसे बड़ा मूल मंत्र बना लिया था। सेना की वर्दी उतारने के बाद भी उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है और वे आज भी तड़के उठकर सीधे मैदान में पहुंच जाते हैं। जीतू फौजी बताते हैं कि उनका पूरा परिवार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है। जब वे खुद सेना में सेवारत हुआ करते थे, तब भी भर्ती रैलियों के मौसम में विशेष अवकाश लेकर गांव आते थे और यहां के युवाओं को फौज की तैयारी करवाया करते थे।

गरीब घरों के बच्चों के लिए खुली सफलता की राह

सेना की नौकरी के दौरान उन्होंने बहुत करीब से महसूस किया था कि तमाम युवा असाधारण रूप से प्रतिभाशाली होने के बावजूद गरीबी और तंगहाली के कारण महंगी कोचिंग और उचित ट्रेनिंग का खर्च उठाने में असमर्थ रहते हैं। ग्रामीण अंचल के हर परिवार के लिए भारी-भरकम फीस चुकाना मुमकिन नहीं हो पाता है, क्योंकि माता-पिता खेती-किसानी या मजदूरी करके बमुश्किल अपने परिवार का गुजारा करते हैं। समाज की इसी लाचारी और मजबूरी को दूर करने के लिए उन्होंने पहले ही ठान लिया था कि वे अपनी सेवानिवृत्ति के बाद का सारा वक्त गांवों के युवाओं को मुफ्त शारीरिक प्रशिक्षण देने में ही समर्पित करेंगे।

अग्निवीर योजना समेत 25 युवा पहुंचे सेना में

जीतू फौजी के कड़े अनुशासन, सही मार्गदर्शन और अटूट मेहनत का ही परिणाम है कि उनके पास ट्रेनिंग लेने वाले करीब 25 युवा अब तक भारतीय सेना का हिस्सा बन चुके हैं। इनमें हाल ही के दिनों में लागू हुई अग्निवीर योजना के तहत सफलता पाने वाले युवा भी पूरी शान से शामिल हैं। उनके जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला पल तब होता है, जब खेल के मैदान की धूल फांकने और पसीना बहाने वाला कोई सामान्य युवा सेना की पक्की वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा के लिए आगे बढ़ता है। जीतू फौजी का यह सार्थक प्रयास इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि देशसेवा के लिए सिर्फ खुद वर्दी में रहना ही जरूरी नहीं है, बल्कि सच्ची नीयत और सही मार्गदर्शन से भी देश का मजबूत भविष्य संवारा जा सकता है।

सवाल-जवाब

जीतू फौजी कौन हैं?
जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू फौजी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त एक पूर्व सैनिक हैं जो झुंझुनूं के युवाओं को मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं।
वे युवाओं से कितनी फीस लेते हैं?
वे युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण देने के लिए उनसे एक भी रुपया फीस नहीं लेते हैं।
जितेंद्र सिंह सेना से कब सेवानिवृत्त हुए थे?
वे वर्ष 2021 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे।
अब तक कितने युवा सेना में चयनित हो चुके हैं?
उनके मार्गदर्शन में तैयारी करने वाले करीब 25 युवा अब तक भारतीय सेना में चयनित हो चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·31 मिनट पहले

जीतू फौजी की तरह सुबह चार बजे उठकर मैदान में पसीना बहाना हर किसी के बस की बात नहीं। जब मैं पिछली बार झुंझुनूं गया था, तब ऐसे ही कई युवाओं से मिलने का मौका मिला था जो बिना किसी संसाधन के सिर्फ अपने जज्बे से फौज में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे लोग ही असली देश सेवा कर रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·53 मिनट पहले

फ्री में पढ़ाना अच्छी बात है, पर बिना किसी बजट के ये व्यवस्था कितने दिन टिकेगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·53 मिनट पहले

रविकेश जी, झुंझुनूं के सुबह 4:30 बजे वाले उस जज्बे के आगे बजट की बात करना बेमानी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

जीतू फौजी ने बहुत बढ़िया काम किया है, पर सिर्फ सुबह की ट्रेनिंग से ही सब सेलेक्ट हो जाते होंगे, इस पर थोड़ा शक है। मैदान के बाहर की लिखित परीक्षा और मेडिकल जैसी चीजें भी उतनी ही मुश्किल होती हैं, जिनका जिक्र नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बात तो सही है, पर फौज की रैली में पहले फिजिकल ही सबसे बड़ी दीवार होती है, उसे पार कर लिया तो आधा काम हो गया।

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