फिल्म म्यूजिक से छह महीने दूर रहेंगे अमाल मलिक, डब्बू मलिक के अनुसार सेहत के लिए रिबूट है बेहद जरूरीराजसमंद निकाय चुनाव: वार्ड आठ में बुनियादी सुविधाओं की कमी से नाराज हैं लोगनोएडा में शुरू हुआ दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक, अब सेक्टर-51 से 52 मेट्रो स्टेशन की दूरी तय करने में लगेंगे सिर्फ 5 मिनटटोंक के माधोगंज में नेटवर्क नहीं तो वोट नहीं का ऐलान, टावर न लगने से ग्रामीणों में आक्रोशदमोह में रक्षाबंधन के दिन दहला देने वाली घटना, महज साठ मिनट के भीतर ट्रेन से कटकर एक ही परिवार के तीन लोगों ने दी जानमेरठ के इन महाभारत कालीन मंदिरों में मनाएं जन्माष्टमी, हस्तिनापुर से परीक्षितगढ़ तक के खास धामशाहरुख खान की 7 बेहतरीन डबल रोल फिल्में, जिन्हें आप घर बैठे देख सकते हैं OTT परजोधपुर एयरपोर्ट पर भारी नकदी और सोने के साथ यात्री गिरफ्तार, मुंबई जाने की तैयारी में था रूपेश भंवरलाल जैनरक्षाबंधन पर जोधपुर से चेन्नई के बीच चलेगी स्पेशल एसी ट्रेन, जानें पूरा रूट और शेड्यूलअखरोट खाने के फायदे: रोजाना सिर्फ तीन अखरोट खाने से मजबूत होंगे दिल और दिमाग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए गजब के लाभ
जोधपुर में रक्षाबंधन पर जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा, तालाब पर निभाई गई अनोखी रस्मराजस्थान
29 अग॰ 2026, 9:08 am (1 घंटे पहले)· 2

जोधपुर में रक्षाबंधन पर जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा, तालाब पर निभाई गई अनोखी रस्म

जोधपुर के पास लूणावास खारा गांव में रक्षाबंधन के मौके पर सदियों पुरानी समंद हिलोरने की परंपरा निभाई गई। सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मंगल कलश के साथ तालाब पर पहुंचकर भाई-बहन के अटूट रिश्ते की इस अनूठी रस्म में हिस्सा लिया।

आधुनिकता की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां ग्रामीण इलाकों की प्राचीन संस्कृतियां धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, वहीं जोधपुर के पास स्थित लूणावास खारा गांव में आज भी सदियों पुरानी लोक परंपराएं पूरी आस्था और उत्साह के साथ जीवित हैं। इस पावन पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर स्थानीय गवाली तालाब पर एक बेहद अनूठा और मनमोहक दृश्य देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सज-धजकर पहुंचीं। भाई और बहन के बीच के पवित्र प्रेम के प्रतीक इस पर्व पर समंद हिलोरने की पारंपरिक रस्म को देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा था। महिलाओं के सिर पर सजे मंगल कलश, चेहरे पर साफ झलकती खुशी और उनके होठों से निकलते पारंपरिक मंगल गीत पूरे वातावरण को पूरी तरह से राजस्थानी संस्कृति के रंग में रंग रहे थे।

ढोल-नगाड़ों के बीच गवाली तालाब पर उमड़ी भीड़

पारंपरिक ढोल और थाली की मनमोहक धुनों के बीच जब महिलाओं की टोलियां नाचते-गाते हुए गवाली तालाब की तरफ आगे बढ़ रही थीं, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का ध्यान इस भव्य आयोजन की तरफ आकर्षित हो रहा था। गवाली तालाब के परिसर में पहुंचने के बाद महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए तालाब की कुल चार परिक्रमाएं पूरी कीं। इसके बाद बहनों ने अपने भाइयों के साथ मिलकर प्राचीन समंद हिलोरने की रस्म को आगे बढ़ाया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भाई ने अपनी बहन को तालाब का पवित्र जल पिलाया और ठीक इसी तरह बहन ने भी अपने भाई को जल पिलाकर दोनों के आपसी रिश्ते की मजबूती, दीर्घायु और अटूट प्रेम की ईश्वर से कामना की।

ये भी पढ़ें

चुनरी ओढ़ाकर भाइयों ने दिया आशीर्वाद

इस अनूठी परंपरा की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर भाइयों ने अपनी बहनों को पारंपरिक चुनरी ओढ़ाई और उनके सुखद भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा में सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति और उनके सिर पर सजे सुंदर मंगल कलश ने इस पूरे आयोजन के माहौल को अत्यधिक खास बना दिया था। जब महिलाएं पारंपरिक लोक गीत गाते हुए इस सदियों पुरानी रस्म को निभा रही थीं, तो ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो राजस्थान की प्राचीन लोक संस्कृति अपनी पूरी भव्यता के साथ एक बार फिर से जीवंत हो उठी हो। इस अद्भुत और दुर्लभ आयोजन को अपनी आंखों से देखने के लिए पूरा लूणावास खारा गांव गवाली तालाब के तट पर इकट्ठा हो गया था। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग भाई-बहन के इस पवित्र और अटूट रिश्ते के साक्षी बने। गांव की भोर के राही टीम के सदस्यों की ओर से इस पूरे आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष और चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई थीं।

आटे से बनी मात और गुगरी का हुआ प्रसाद वितरण

इस भव्य कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी महिलाओं और ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पारंपरिक रीति-रिवाजों के इस क्रम में आटे से विशेष रूप से तैयार की गई मात और गुगरी को प्रसाद के रूप में वहां मौजूद लोगों के बीच वितरित किया गया, जिसे सभी श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ ग्रहण किया। आज के इस आधुनिक और तकनीकी दौर में लूणावास खारा के गवाली तालाब पर दिखाई दी यह तस्वीर एक मजबूत और स्पष्ट संदेश देती नजर आती है कि समय भले ही कितनी तेजी से बदल जाए, लेकिन गांवों की मिट्टी से गहराई से जुड़ी संस्कृति और भाई-बहन के प्रेम की ये अमूल्य परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में उसी जीवंतता के साथ जिंदा हैं।

सवाल-जवाब

यह परंपरा किस गांव में निभाई गई?
यह सदियों पुरानी परंपरा जोधपुर के पास स्थित लूणावास खारा गांव में निभाई गई।
इस आयोजन के लिए महिलाएं कहां एकत्र हुईं थीं?
सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गवाली तालाब के तट पर एकत्र हुईं थीं।
तालाब पर कौन सी मुख्य रस्म निभाई गई?
तालाब पर भाई-बहन के प्रेम की प्रतीक 'समंद हिलोरने' की परंपरा निभाई गई जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को जल पिलाया।
रस्म के बाद भाइयों ने बहनों को क्या दिया?
रस्म पूरी होने के बाद भाइयों ने अपनी बहनों को चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया।
कार्यक्रम के दौरान कौन सा प्रसाद बांटा गया?
कार्यक्रम के दौरान आटे से तैयार मात और गुगरी प्रसाद के रूप में वितरित की गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 मिनट पहले

यह आयोजन ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां सामुदायिक सहभागिता से प्राचीन परंपराएं जीवित रहती हैं। हालांकि, इस तरह के बड़े सार्वजनिक आयोजनों में उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और विधि-व्यवस्था बनाए रखना स्थानीय प्रशासन और आयोजकों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जिस पर भविष्य में विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·37 मिनट पहले

यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सराहनीय प्रयास है, लेकिन गवाली तालाब जैसे जल स्रोतों के पास भारी भीड़ जुटने से पर्यावरणीय दबाव और सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। भविष्य में ऐसे आयोजनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन और स्थानीय समितियों को मिलकर भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन का पुख्ता ब्लूप्रिंट तैयार करना होगा, ताकि आस्था के साथ-साथ जनसुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR