जोधपुर शहर में इन दिनों एक अलग ही कला चर्चा का विषय बनी हुई है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के मौके पर जोधपुर की एक प्रतिभाशाली कलाकार ने अपनी रचनात्मकता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए कॉफी के कप में देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों को जीवंत कर दिया है। इस अनोखी कला शैली के जरिए उन्होंने आस्था और आधुनिक कला का बेहतरीन मेल दिखाया है।
पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री का स्वरूप शक्ति, पवित्रता और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। कलाकार ने इस रूप को बेहद बारीकी से कॉफी की सतह पर उकेरा है। देवी के पारंपरिक प्रतीकों को इस माध्यम पर आकार देना उनकी अद्भुत कलात्मक कुशलता को दर्शाता है, जो त्योहार की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
शृंखला को आगे बढ़ाते हुए दूसरे दिन की अधिष्ठात्री मां ब्रह्मचारिणी के तपस्या, धैर्य और दृढ़ संकल्प वाले रूप को दर्शाया गया है। इस रचना में कलाकार ने हाथ जोड़कर देवी के समक्ष नमन करते हुए अपनी गहरी आस्था और समर्पण के भाव को बखूबी उजागर किया है।
तीसरे दिन के पावन अवसर पर साहस और पराक्रम की प्रतीक मां चंद्रघंटा की आकृति को कॉफी की झाग पर तैयार किया गया है। सीमित सतह पर इतने सूक्ष्म विवरणों के साथ देवी के स्वरूप को जीवंत करना इस कला को बेहद खास बनाता है।
चौथे दिन सृष्टि की रचनात्मकता और जीवन में प्रकाश लाने वाली मां कूष्मांडा के स्वरूप को उकेरा गया है। बारीक रेखाओं के जरिए तैयार यह आकृति कलाकार की कल्पनाशीलता और उनके अथक धैर्य का प्रमाण देती है।
पांचवें दिन ममता और वात्सल्य की मूरत मां स्कंदमाता के रूप को स्थान मिला है। इस कलाकृति के माध्यम से मातृत्व की भावना को भारतीय संस्कृति और देवी के प्रति अगाध श्रद्धा के साथ जोड़ा गया है।
छठे दिन अधर्म पर धर्म की विजय और शक्ति का प्रतीक मानी जाने वाली मां कात्यायनी की आकृति कॉफी पर उकेरी गई है। यह प्रयास यह साबित करता है कि पारंपरिक आस्था को व्यक्त करने के लिए नए और अनूठे माध्यम भी अपनाए जा सकते हैं।
सातवें दिन संकटों से रक्षा करने वाली मां कालरात्रि के शक्तिशाली स्वरूप को कॉफी की झाग पर आकार दिया गया है। सूक्ष्म रेखाओं से सजा यह चित्र श्रद्धालुओं को देवी की असीम शक्ति और अटूट विश्वास की याद दिलाता है।




















