करौली-गंगापुर नेशनल हाईवे पर स्थित बीजलपुर ग्राम पंचायत में एक बेहद महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण पहल ने आकार लिया है। यहां वन विभाग की सुरक्षित जमीन पर जिले की पहली अत्याधुनिक हाई-टेक मॉडल नर्सरी पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुकी है। इस पूरे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने और बुनियादी ढांचा खड़ा करने में सरकार को करीब 1.50 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
कुल 20 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैली इस जगह का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान के जरिए बड़े पैमाने पर हरियाली को बढ़ावा देना है। वन विभाग के कर्मचारियों ने नई और उन्नत तकनीकों का शानदार इस्तेमाल करते हुए यहां पहले ही चरण में लगभग दो लाख बेहतरीन पौधे तैयार कर लिए हैं। पैदावार पूरी होने के साथ ही विभाग ने आम जनता के बीच इन पौधों का आधिकारिक वितरण भी शुरू कर दिया है।
खेती की उन्नत तकनीक और सुविधाएं
गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए इस विशाल परिसर में 105 सामान्य क्यारियां (बेड) और 10 विशेष मदर बेड विकसित किए गए हैं। बीजों में शुरुआती अंकुरण आने के तुरंत बाद, कृषि विशेषज्ञ रूट-शूट और कलम (ग्राफ्टिंग) जैसी बेहद उन्नत विधियों से इन पौधों को बड़ा कर रहे हैं। बाहरी जानवरों से बचाव और सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र के चारों तरफ एक मजबूत बाउंड्री वॉल भी खड़ी की गई है।
इसके अलावा, पूरी उत्पादन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए परिसर को कई आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इनमें बीज भंडारण केंद्र (सीड स्टोर), पौधों को मौसम की मार से बचाने वाला ग्रीन हाउस, पानी जमा करने के लिए बड़े वाटर टैंक और एक स्वचालित फव्वारा सिंचाई प्रणाली शामिल है। यह सिंचाई प्रणाली पानी की बर्बादी रोके बिना उचित नमी सुनिश्चित करती है।
विविध प्रजातियां और जैविक खाद का उपयोग
इस समय करौली की इस नई नर्सरी में कुल 22 अलग-अलग प्रजातियों के पेड़-पौधों की खेती बेहद सावधानी के साथ की जा रही है। इस शानदार विविधता में फलदार पेड़ों से लेकर, घनी छाया देने वाले और सुंदर फूल वाले पौधे तक शामिल हैं। फल और छाया की श्रेणी में आम, अमरूद, जामुन, इमली, सहजन, बेर, नीम, कचनार, आंवला और रेगिस्तान के कल्पवृक्ष यानी खेजड़ी के पौधे आसानी से मिल जाएंगे। वहीं, सजावट के लिए चंपा, कनेर, गुलाब, मोगरा, गेंदा और कल्पवृक्ष की पौध भी उगाई जा रही है।
इस पूरी सुविधा का एक बड़ा आकर्षण यहां जैविक खेती पर दिया जा रहा जोर है। ग्रीन हाउस के सुरक्षित वातावरण के भीतर ही जैविक वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया जा रहा है। इस प्राकृतिक खाद का लगातार इस्तेमाल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि पौधे तेजी से विकास करें और कम समय में फल-फूल देने के काबिल बन सकें।
किफायती दाम और भविष्य का लक्ष्य
अब करौली के स्थानीय निवासियों को अच्छी किस्म के पेड़ खरीदने के लिए दूसरे जिलों के लंबे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वृक्षारोपण को एक जन आंदोलन बनाने के लिए विभाग ने पौधों की कीमतें काफी कम रखी हैं। दो फीट तक की ऊंचाई वाले पौधों की कीमत मात्र 6 रुपये प्रति पौधा तय की गई है, जबकि दो फीट से बड़े पौधों के लिए लोगों को 10 रुपये चुकाने होंगे। लोग अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या नर्सरी आकर ऑफलाइन तरीके से खरीदारी कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, जो भी सरकारी विभाग अपने स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाएंगे, उन्हें थोक खरीद पर सरकारी नियमों के तहत 50 फीसदी तक का विशेष अनुदान (सब्सिडी) भी दिया जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों ने भविष्य को लेकर एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका इरादा हर साल इस केंद्र में करीब 2.5 लाख नए पौधे तैयार करने का है, जिससे आने वाले समय में करौली का हरित क्षेत्र बढ़ेगा और पर्यावरण संरक्षण को एक नई मजबूती मिलेगी।




















