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करौली में अलवर के तीखे लाल प्याज की भारी मांग, रोजाना पहुंच रही 160 क्विंटल खेपराजस्थान
20 अक्तू॰ 2026, 9:08 am (2 घंटे पहले)· 2

करौली में अलवर के तीखे लाल प्याज की भारी मांग, रोजाना पहुंच रही 160 क्विंटल खेप

करौली की सब्जी मंडियों में अलवर के लाल प्याज की मजबूत मांग बनी हुई है, जहां ऊंचे दामों के बावजूद हर रोज लगभग 160 क्विंटल प्याज की खपत हो रही है।

सर्दियों के दस्तक देते ही रसोई में सब्जियों का जायका बढ़ाने के लिए प्याज की खपत तेजी से बढ़ जाती है। राजस्थान के करौली जिले में इन दिनों स्थानीय और बाहरी मंडियों के मुकाबले अलवर के लाल प्याज की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। अपने गहरे लाल रंग, मजबूत छिलके और तीखे स्वाद के कारण यह प्याज स्थानीय खरीदारों, होटल संचालकों और ढाबों की पहली पसंद बन चुका है। विभिन्न क्षेत्रों से प्याज की आवक जारी रहने के बावजूद करौली की मंडियों में अलवर के प्याज का दबदबा पूरी तरह कायम है।

मंडियों में हर दिन 160 क्विंटल की आवक

करौली की थोक सब्जी मंडी में अलवर से रोजाना लगभग 160 क्विंटल लाल प्याज पहुंच रहा है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि सर्दियों के मौसम की शुरुआत से ही इसकी बिक्री में निरंतर उछाल देखा जा रहा है। अन्य राज्यों और जिलों से आने वाली किस्मों के मुकाबले ग्राहक अलवर के उत्पाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। बड़ी आवक होने के बाद भी बाजार में इसकी मांग इतनी अधिक है कि पूरा स्टॉक रोजाना हाथों-हाथ बिक जाता है।

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थोक और खुदरा बाजार में भाव की स्थिति

बाजार में मजबूत मांग के चलते कीमतों में तेजी बनी हुई है, लेकिन इसका बिक्री पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। करौली थोक सब्जी मंडी के थोक व्यापारी लवकुश सैनी के मुताबिक, मंडी में अलवर के लाल प्याज का थोक भाव 45 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया जा रहा है। वहीं खुदरा बाजार में आम उपभोक्ताओं को यह प्याज लगभग 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदना पड़ रहा है। दामों में इस उछाल के बावजूद घरेलू रसोई से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक इसकी नियमित खरीदारी जारी है।

ग्रेवी और तड़के के लिए सबसे मुफीद

करौली की नई सब्जी मंडी के विक्रेता मोतीलाल सैनी ने बताया कि अलवर का लाल प्याज अपने विशेष तीखेपन, आकर्षक लाल रंग और सही आकार के चलते पहचाना जाता है। दाल में तड़का लगाना हो या पनीर जैसी गाढ़ी ग्रेवी वाली सब्जियां तैयार करनी हों, इस प्याज का स्वाद सबसे अलग असर छोड़ता है। इसके अलावा मांसाहारी व्यंजनों में भी गाढ़े मसाले और तरीदार स्वाद के लिए लोग इसे विशेष रूप से पसंद करते हैं। यही मुख्य कारण है कि दाम अधिक होने के बावजूद उपभोक्ता इसे बिना किसी हिचकिचाहट के खरीद रहे हैं।

घरेलू रसोई से लेकर ढाबों तक की पहली पसंद

ठंड के दिनों में खानपान की आदतों में बदलाव आता है और तरीदार भोजन की मांग बढ़ जाती है। करौली के आवासीय क्षेत्रों के अलावा आसपास के ढाबों और होटलों में इस लाल प्याज की नियमित आपूर्ति की जा रही है। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में जब सर्दी और बढ़ेगी, तब इसकी खपत में और अधिक इजाफा होने की पूरी संभावना है। फिलहाल अलवर का लाल प्याज करौली के समूचे सब्जी बाजार में सबसे प्रमुख कृषि उत्पाद बना हुआ है।

सवाल-जवाब

करौली मंडी में अलवर से रोजाना कितना लाल प्याज आ रहा है?
करौली की थोक सब्जी मंडी में अलवर से हर दिन लगभग 160 क्विंटल लाल प्याज पहुंच रहा है।
करौली में अलवर के लाल प्याज का थोक भाव क्या चल रहा है?
मंडी में इसका थोक भाव 45 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहा है।
खुदरा बाजार में आम ग्राहकों को यह प्याज किस दाम पर मिल रहा है?
खुदरा दुकानों पर उपभोक्ताओं को यह लाल प्याज लगभग 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रहा है।
करौली के लोग अलवर के लाल प्याज को अन्य किस्मों के मुकाबले ज्यादा क्यों पसंद करते हैं?
अपने तीखे स्वाद, गहरे लाल रंग, अच्छे आकार और गाढ़ी ग्रेवी बनाने में बेहतरीन स्वाद देने के कारण लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं।
इस प्याज का इस्तेमाल किन व्यंजनों में प्रमुखता से किया जा रहा है?
दाल तड़का, पनीर, अन्य गाढ़ी ग्रेवी वाली सब्जियों और मांसाहारी व्यंजनों को पकाने के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·11 मिनट पहले

सर्दियों में तड़के और ग्रेवी के लिए बढ़िया लाल प्याज मिल जाए तो खाने का मज़ा ही आ जाता है। भले ही दाम थोड़े ज़्यादा हों, लेकिन स्वाद के आगे यह बात मायने नहीं रखती।

Ravikash Gupta@ravikash·34 मिनट पहले

पिछली बार करौली गया था तो खाने में प्याज की खुशबू ने ही बता दिया था कि बात अलवर वाले की ही हो रही है। तीखापन ऐसा कि सलाद में काटते ही आँखें भर आएं पर स्वाद भूलता नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 मिनट पहले

रवि जी, आपकी बात बिल्कुल सही है! वैसे कृषि उपज के दाम और मंडियों की यह आवक दिखाती है कि खाद्य आपूर्ति नीति कितनी अहम है।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

सर्दियों में ढाबे पर खाने का मज़ा तभी आता है जब प्याज तीखा हो। 60 रुपये किलो भले महंगा लगे, पर स्वाद के आगे पैसे कौन देखता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

रोहन भाई, एकदम सही कहा। पिछली बार अलवर गया था, वहाँ के खेतों से ही महक आ रही थी।

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