बस्तर के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। स्वतंत्रता के 79 साल के बाद अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले रावघाट तक अब सीधी यात्री ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही वह ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन के रावघाट तक विस्तार को हरी झंडी दिखाएंगे। इस वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान ही अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सेवा का भी शुभारंभ किया जाएगा।
एक सदी पुराना है रेल का इतिहास
रावघाट तक ट्रेन पहुंचाने का यह सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। इस क्षेत्र में रेल लाइन के लिए सबसे पहला सर्वे ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1914 में बंगाल नागपुर रेलवे द्वारा किया गया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1917 से 1918 के बीच कुरूद और लिकमा के मध्य जंगलों से वनोपज की ढुलाई के लिए फॉरेस्ट ट्राम के संचालन का भी उल्लेख मिलता है। देश की स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1974 में इस परियोजना का तकनीकी और आर्थिक सर्वेक्षण दोबारा शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 1998 से 1999 के रेल बजट में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शामिल करते हुए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। वर्ष 2005 से 2007 के बीच रेलवे, सेल और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता संपन्न हुआ, जिसके बाद वर्ष 2008 में इसके निर्माण की जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपी गई।
नक्सल प्रभावित इलाके में आई थीं भारी बाधाएं
दल्लीराजहरा से रावघाट तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। यह पूरा क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के कारण निर्माण कार्य में पग-पग पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान हुए नक्सली हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों और चार मजूदरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मार्ग पर हर पांच किलोमीटर की दूरी पर विशेष सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। सुरक्षा खतरों और क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति के कारण प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे ही निर्माण कार्य संभव हो पाता था।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
बस्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भविष्य में धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन बिछाने की भी योजना तैयार की गई है। उपलब्ध प्रस्ताव के अनुसार, यह नया रेल मार्ग कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई से गुजरते हुए जगदलपुर तक पहुंचेगा, जिससे बस्तर को एक वैकल्पिक रेल मार्ग मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त कोतावालसा-किरंदुल रेल मार्ग के दोहरीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है, जिससे लौह अयस्क और अन्य आवश्यक सामग्रियों के परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रावघाट तक यात्री ट्रेन का परिचालन शुरू होने से स्थानीय नागरिकों का रायपुर आना-जाना सुगम हो जाएगा और यह माना जा रहा है कि इससे संपूर्ण बस्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को एक नई रफ्तार प्राप्त होगी।



















