राजस्थान के कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में मौजूद देश की सबसे उम्रदराज बाघिन महक अब अपने जीवन के 23वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. कभी अपने शानदार और शाही अंदाज से पर्यटकों का ध्यान खींचने वाली इस बाघिन पर अब उम्र का असर साफ दिखने लगा है. पिछले कुछ समय से उसके पिछले हिस्से में अत्यधिक कमजोरी आ गई है, जिसके चलते उसके कदम डगमगाने लगे हैं और चलने-फिरने के दौरान संतुलन बनाए रखना बेहद कठिन हो गया है. अचानक जमीन पर गिरने अथवा किसी गंभीर चोट के जोखिम को भांपते हुए वन प्रशासन ने उसे आम दर्शकों के डिस्प्ले एरिया से पूरी तरह हटा लिया है. अब पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम की सीधी निगरानी में महक की दिनचर्या और स्वास्थ्य की देखरेख की जा रही है.
नाइट शेल्टर में गद्दे और गर्माहट के विशेष इंतजाम
सैलानियों की नजरों से दूर अब महक का दायरा केवल नाइट शेल्टर और उससे जुड़े कराल क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया है. उसके उठने, बैठने और लेटने के दौरान हड्डियों अथवा मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े, इसके लिए फर्श पर विशेष रूप से गद्दे बिछाए गए हैं. इस पूरे बाड़े में नियमित रूप से स्वच्छता और संक्रमण रोधी प्रबंध किए जा रहे हैं. जैसे-जैसे मौसम में ठंड का असर बढ़ेगा, शेल्टर के भीतर तापमान को अनुकूल बनाए रखने के लिए हीटर लगाने की तैयारी भी कर ली गई है. अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य अब उसे किसी सार्वजनिक प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के बजाय एक सुरक्षित, शांत और आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराना है.
तीन समय का सुपाच्य आहार और जरूरी सप्लीमेंट्स
बढ़ती उम्र के कारण महक की पाचन क्रिया भी प्रभावित हुई है, जिसे ध्यान में रखते हुए उसके खानपान की शैली में व्यापक बदलाव किए गए हैं. अब उसे एक ही बार में भारी भोजन देने के स्थान पर दिन में तीन बार हल्का और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है. सुबह के समय उसे उबला हुआ चिकन परोसा जाता है, दोपहर की खुराक में उबले अंडे और पौष्टिक सूप शामिल रहता है, जबकि शाम के वक्त उसे मीट दिया जा रहा है. भोजन के बेहतर पाचन और आंतों की सेहत दुरुस्त रखने के उद्देश्य से आहार के साथ प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स मिलाए जा रहे हैं. इसके अलावा लीवर टॉनिक और जोड़ों के दर्द में राहत देने वाले खास पोषक सप्लीमेंट्स भी नियमित तौर पर दिए जा रहे हैं. आगामी कड़ाके की ठंड को देखते हुए उसके आहार में चिकन की मात्रा को और बढ़ाने की योजना है.
जीवन का सफर और साथ छूटे हमसफर
महक का जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में हुआ था. उसके साथ ही उसकी एक जुड़वां बहन रंभा का भी जन्म हुआ था, जिसने लंबे समय तक उसका साथ निभाया, किंतु अब वह जीवित नहीं है. इसी प्रकार महक का साथी नर बाघ नाहर भी अगस्त 2024 में लगभग 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद दम तोड़ चुका है. इन दोनों करीबियों के चले जाने के बाद अब अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में महक पूरी तरह अकेली रह गई है.
दीर्घायु के रिकॉर्ड और वैज्ञानिक अध्ययन की तैयारी
लंबी उम्र के मामले में महक ने देश की कई प्रसिद्ध बाघिनों को पीछे छोड़ दिया है. उदाहरण के तौर पर, रणथंभौर की बहुचर्चित बाघिन मछली और गुवाहाटी की स्वाति लगभग 20 वर्ष तक ही जीवित रह सकी थीं, जबकि महक 22 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी है. हालांकि, भारत में सबसे लंबे समय तक जीने वाले नर बाघों में पश्चिम बंगाल का बाघ राजा 25 वर्ष 10 महीने तक जीवित रहा था. वैश्विक स्तर पर अमेरिका की बाघिन बंगाली के नाम 25 वर्ष 319 दिन की असाधारण उम्र तक पहुंचने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. महक की इस लंबी उम्र ने वन्यजीव वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. विशेषज्ञ उसके डीएनए, खानपान के स्वरूप और जीवनशैली के तौर-तरीकों का विस्तृत अध्ययन करने की योजना पर विचार कर रहे हैं, जिससे बाघों की लंबी उम्र के जैविक कारणों को समझा जा सके. फिलहाल पार्क के डॉक्टरों की पूरी कोशिश यही है कि महक अपने जीवन के अंतिम पड़ाव को दर्दमुक्त और सुकून से बिता सके.



















