कोटपूतली-बहरोड़ जिले में पंचायतीराज चुनाव 2026 की प्रशासनिक तैयारियों के बीच निर्वाचन कार्यों में शिथिलता बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया गया है। चुनावी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए आयोजित किए गए अंतिम प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा न लेने वाले 5 रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) सहित कुल 79 मतदान कर्मियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिए गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक नोटिस में सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 15 दिन के भीतर अपनी अनुपस्थिति का ठोस लिखित कारण बताने का सख्त निर्देश दिया गया है।
प्रशिक्षण से दूरी को प्रशासन ने माना गंभीर चूक
जिला निर्वाचन प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में सौंपी गई जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से पालन करना प्रत्येक तैनात कर्मचारी के लिए अनिवार्य है। मतदान प्रक्रिया से ठीक पहले आयोजित इस अंतिम सत्र से अनुपस्थित रहने को निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति सीधी लापरवाही माना गया है। पंचायतीराज चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से प्रशासन काफी समय से विस्तृत तैयारियां कर रहा था। इसके तहत चुनाव ड्यूटी में प्रतिनियुक्त किए गए तमाम कार्मिकों को चरणबद्ध तरीके से तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही थी।
मतदान दिवस की जटिलताओं को दूर करना था उद्देश्य
इन विशेष प्रशिक्षण शिविरों के दौरान मतदान प्रक्रिया, मतपत्रों एवं मशीनों के संचालन, चुनाव संबंधी वैधानिक नियमों, कार्मिकों की तय जिम्मेदारियों और बूथ स्तर की आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी साझा की जाती है। इसका मुख्य ध्येय यही रहता है कि वोटिंग के दिन पोलिंग बूथों पर किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चन या प्रशासनिक अव्यवस्था न पैदा हो। ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर 5 रिटर्निंग ऑफिसर जैसे अहम पदों पर बैठे अधिकारियों समेत 79 कर्मचारियों का गायब रहना बेहद गंभीर माना गया, जिसके तुरंत बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जवाब-तलबी की प्रक्रिया शुरू कर दी।
15 दिन में जवाब मिलने के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
जारी नोटिस में सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से पूछा गया है कि निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम से दूर रहने के पीछे क्या अपरिहार्य कारण थे। प्रशासन ने तय किया है कि 15 दिनों की समयसीमा में मिलने वाले लिखित प्रत्युत्तरों की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि किसी कर्मी का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो निर्वाचन नियमों और सेवा नियमावली के तहत उनके खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
चुनावी व्यवस्था से जुड़े बाकी अमले को भी कड़ा संदेश
मतदान से पूर्व मिलने वाले प्रशिक्षण को पूरी चुनावी व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यहीं से मतदान केंद्रों पर तैनात टीम को उनकी प्राथमिकताओं का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। जिला निर्वाचन अधिकारी के इस त्वरित और सख्त कदम से चुनावी ड्यूटी में लगे पूरे प्रशासनिक अमले को सीधा और स्पष्ट संदेश दिया गया है कि निर्वाचन कार्य में किसी भी स्तर की कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब पूरे अमले की नजर नोटिस प्राप्त करने वाले इन 79 कार्मिकों के जवाब और प्रशासन के आगामी फैसले पर टिकी है।





















