राजस्थान की कोचिंग नगरी कोटा में नगर निगम चुनाव का प्रचार अभियान अपने चरम पर पहुंच चुका है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात राजनीतिक दलों के आधिकारिक प्रत्याशियों के साथ-साथ अनेक निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जनता के बीच जाकर जनसंपर्क तेज कर दिया है। चुनावी सरगर्मियों के बीच कोटा शहर के विभिन्न क्षेत्रों की जनता ने भी अपने वार्ड और पूरे शहर के समुचित विकास को लेकर प्रत्याशियों के समक्ष स्पष्ट अपेक्षाएं रखी हैं। इस बार कोटा के नागरिक केवल किसी राजनीतिक दल के नाम पर वोट देने के बजाय अपने क्षेत्र की जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान करने वाले जन प्रतिनिधियों को चुनने का मन बना चुके हैं।
वार्ड पार्षदों के लिए जनता की तय कसौटी और नियमित जवाबदेही
नगर निगम चुनाव में विभिन्न वार्डों के निवासियों की राय से एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई है कि स्थानीय जनता को केवल पार्टी के नाम पर समर्थन मांगने वाला प्रत्याशी स्वीकार्य नहीं है। शहरवासियों की प्राथमिक मांग है कि उनका वार्ड पार्षद चाहे किसी भी राजनीतिक दल से संबंध रखता हो, उसे अपने वार्ड की भौगोलिक स्थिति और स्थानीय समस्याओं की व्यावहारिक जानकारी होनी चाहिए। कोटा के नागरिक एक शिक्षित, समझदार और कर्तव्यनिष्ठ पार्षद को प्राथमिकता दे रहे हैं जो जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनकर संबंधित प्रशासनिक विभागों तक पहुंचा सके।
केवल शिकायत दर्ज कराना ही काफी नहीं माना जा रहा है, बल्कि जनप्रतिनिधि से यह अपेक्षा की गई है कि वह समस्या का अंतिम समाधान होने तक लगातार उसका फॉलोअप करे। इसके अतिरिक्त वार्ड पार्षद की नियमित उपलब्धता भी अनिवार्य मानी जा रही है। नागरिकों की मांग है कि पार्षद को महीने में कम से कम एक या दो बार पूरे वार्ड का भौतिक निरीक्षण करना चाहिए। गलियों, रिहाइशी कॉलोनियों, सार्वजनिक पार्कों और मुख्य मार्गों का दौरा करके पार्षद को स्वयं यह आंकलन करना चाहिए कि आम जनता को किन रोजमर्रा की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और वार्ड 76 के प्राथमिक नागरिक मुद्दे
कोटा शहर के वार्ड 76 सहित अन्य कई इलाकों के निवासियों ने स्थानीय नागरिक सुविधाओं की बदहाली को चुनावी मुद्दों में सबसे ऊपर रखा है। नियमित सफाई व्यवस्था की कमी, नालियों में जमा गंदगी, कचरा निस्तारण की ठोस व्यवस्था न होना, पेयजल की उपलब्धता, पार्कों का रखरखाव और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें इस चुनाव में प्रमुख बहस का केंद्र बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि कई बार छोटी-छोटी नागरिक समस्याएं समय पर हल न होने के कारण कालंतर में गंभीर संकट का रूप ले लेती हैं। इसलिए नागरिक चाहते हैं कि वार्ड स्तर पर जनशिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण का एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय और स्ट्रीट लाइट का सुधार
शहरी कॉलोनियों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी कोटावासियों की एक प्रमुख मांग बनकर उभरा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों के संवेदनशील स्थानों और प्रमुख गलियों में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। इस प्रकार के बुनियादी सुरक्षा इंतजामों से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग नागरिकों की सुरक्षा प्रणाली अधिक मजबूत होगी। इसके साथ ही, रात के समय दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कॉलोनियों की खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को समय रहते दुरुस्त करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
नया महापौर: मैदानी निरीक्षण, तत्काल कार्रवाई और कार्ययोजना की मांग
शहर के सर्वोच्च प्रशासनिक पद यानी महापौर के चयन को लेकर भी कोटा की जनता की अपेक्षाएं काफी व्यापक हैं। आम नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि नया महापौर केवल बंद कमरों की औपचारिक बैठकों तक सीमित रहने वाला नहीं होना चाहिए। महापौर ऐसा व्यक्ति बने जो शहर की मूलभूत समस्याओं का मौके पर जाकर स्वयं निरीक्षण करे और लापरवाह प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करे। जनता चाहती है कि किसी भी नागरिक समस्या की शिकायत प्राप्त होते ही नगर निगम प्रशासन उस पर तत्काल संज्ञान ले। इसके अतिरिक्त कोटा के सर्वांगीण विकास के लिए सफाई, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, यातायात प्रबंधन और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए एक सुस्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए और उसकी नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाए।
इंदौर की तर्ज पर स्वच्छता और बुनियादी कचरा प्रबंधन का लक्ष्य
शहर की सफाई व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कोटा के निवासियों ने देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। नागरिकों की इच्छा है कि कोटा शहर को भी राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची में शीर्ष स्थानों पर स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए। इसके लिए केवल सतही सफाई के बजाय बड़े नालों की नियमित और वैज्ञानिक ढंग से सफाई, शहर के डोर टू डोर कचरा संग्रह और निस्तारण की बेहतर व्यवस्था तथा सार्वजनिक स्थलों की निरंतर धुलाई और देखभाल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
यातायात दबाव, पार्किंग संकट और आवारा पशुओं की चुनौती
कोटा के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों और व्यस्त सड़कों पर दिन-प्रतिदिन बढ़ता यातायात का दबाव तथा पार्किंग स्थलों की भारी कमी भी इस बार एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुकी है। शहर के मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही से आम नागरिकों और व्यापारियों दोनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यवस्थित और बहुस्तरीय पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जाए। इसके अलावा, मुख्य सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा मवेशियों और रिहाइशी गलियों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से नागरिकों को स्थायी राहत दिलाने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
महिला नेतृत्व की क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और चुनावी परिदृश्य
नगर निगम में महिला महापौर के नेतृत्व की संभावनाओं को लेकर भी कोटावासियों का दृष्टिकोण अत्यंत व्यावहारिक और प्रगतिशील है। शहरवासियों का कहना है कि महापौर का पद चाहे महिला के पास हो या पुरुष के पास, सबसे महत्वपूर्ण मापदंड प्रत्याशी की व्यक्तिगत योग्यता, प्रशासनिक दक्षता, ईमानदारी और कार्य करने की क्षमता है। एक महिला महापौर में इतनी प्रशासनिक क्षमता होनी चाहिए कि वह अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करा सके और शहर के दीर्घकालिक विकास के लिए प्रभावी नीतियां बना सके। स्थानीय महिलाओं के अनुसार शहर की स्वच्छता, सुरक्षा और नागरिक सुविधाएं उनके लिए सबसे प्राथमिक विषय हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वादों और स्थानीय प्राथमिकताओं के बीच कोटा की जनता किस प्रत्याशी पर अपना विश्वास जताती है।



















