जमशेदपुर में डीजल का खर्च घटाकर अनीश ने इलेक्ट्रिक टोटो से बढ़ाई बचत, महीने में ₹40,000 तक कमाईदैनिक जरूरतों से लेकर स्ट्रीट फूड तक, रांची का हरमू बाजार बना खरीदारी का बड़ा ठिकानामूलांक 2 राशिफल 2 अक्टूबर 2026: काम में भटकेगा मन, लिखकर योजना बनाने से दूर होगी उलझनलाइव मैच: एशियाई खेल 2026: भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम फाइनल में पहुंची, स्वर्ण पर नजरेंअमेरिकी सपने के टूटने से लेकर स्वाभिमान के स्टार बनने तक, कैसे रोहित रॉय ने पलटी अपनी किस्मतटोक्यो में महंगाई दर बढ़कर 2.7 प्रतिशत हुई, फिर भी जापानी येन में लौटी सुस्तीराजस्थान के बेरी मेले में प्रशिक्षित ऊंट बादल और घोड़ी सोनूड़ी के नृत्य ने मोहा दिलरोहतक में कांग्रेस भवन के सामने स्कॉर्पियो में मिला वकील का शव, कनपटी पर गोली लगने से हड़कंपगांधी जयंती पर खिली रहेगी धूप और राहत देगी ठंडी हवा, दिल्ली-एनसीआर में बारिश के आसार नहींपितृपक्ष में नई चीजें खरीदने पर शास्त्रों की असली व्यवस्था क्या है
पाली के जवाई बांध में 24 फीट से नीचे गिरा पानी, खतरे में 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों का जीवनराजस्थान
2 अक्तू॰ 2026, 7:41 am (1 घंटे पहले)· 0

पाली के जवाई बांध में 24 फीट से नीचे गिरा पानी, खतरे में 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों का जीवन

कम बारिश के कारण पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा कहे जाने वाले जवाई बांध का जलस्तर घटकर 24 फीट से नीचे आ गया है। महज तीन महीने का पानी शेष रहने से जलाशय के 500 से अधिक मगरमच्छों और जलीय जीवों के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

राजस्थान के पाली जिले में स्थित प्रमुख जलाशय जवाई बांध इस समय भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। मानसूनी बारिश की कमी के कारण 61.25 फीट की कुल भराव क्षमता वाला यह विशाल बांध सिमटकर 24 फीट से भी कम जलस्तर पर आ चुका है। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा माने जाने वाले इस जलाशय में पानी का स्तर घटने से स्थानीय जलचरों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के सामने विकट चुनौती खड़ी हो गई है। इंसानी बस्तियों में पेयजल आपूर्ति की चिंता के साथ-साथ इस स्थिति का सीधा आघात बांध में मौजूद 500 से अधिक विशालकाय मगरमच्छों और लाखों मछलियों के जीवन पर पड़ रहा है।

उथले पानी से जलीय जीवों के आवास पर गंभीर असर

जवाई बांध को लंबे समय से मगरमच्छों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता रहा है। पानी के तेजी से कम होने के कारण इन विशालकाय सरीसृपों के तैरने, शिकार करने और खुद को छिपाने का प्राकृतिक दायरा लगातार घटता जा रहा है। उथले पानी के कारण जलाशय के जलीय तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो लाखों मछलियों के जीवित रहने के लिए बेहद प्रतिकूल साबित हो रहा है। यदि मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत होती है, तो जलाशय का शेष जल दूषित होने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं दूसरी ओर, मछलियों की घटती संख्या से मगरमच्छों के सामने दैनिक आहार का भीषण अभाव पैदा हो जाएगा।

ये भी पढ़ें

तीन महीने में डेड स्टोरेज तक पहुंचने की आशंका

जलाशय के वर्तमान जल भंडार को देखते हुए विशेषज्ञों का आकलन है कि इसमें अब केवल 3 महीने का पानी शेष बचा हुआ है। यदि अगले 3 महीनों के भीतर जल आवक की स्थिति नहीं सुधरती है, तो जवाई बांध पूरी तरह से डेड स्टोरेज स्तर पर पहुंच जाएगा। जल संकट गहराने पर मानव आबादी के लिए रेलगाड़ियों अथवा अन्य वैकल्पिक माध्यमों से पानी की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन जलाशय में मौजूद 500 से ज्यादा मगरमच्छों और जलीय जीवों के लिए कोई त्वरित विकल्प मौजूद नहीं है। चुनावी दौर में वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण के वादे करने वाले जनप्रतिनिधि इस परिस्थिति पर मौन साधे हुए हैं, जबकि वन्यजीव विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक किसी आपात योजना की घोषणा नहीं की गई है। ठोस कदम न उठाए जाने पर व्यापक स्तर पर जलचरों के नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।

स्थानीय पर्यटन और जवाई के पारिस्थितिकी तंत्र पर असर

जवाई का प्राकृतिक परिवेश विश्वभर में अपने अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पहचाना जाता है। यह क्षेत्र पहाड़ियों में विचरण करने वाले तेंदुओं के दीदार के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं इसका दूसरा प्रमुख आकर्षण जवाई बांध के पानी और पथरीले किनारों पर धूप सेकते विशाल मगरमच्छ हैं। तेंदुओं और मगरमच्छों का यह दुर्लभ सह-अस्तित्व देश और विदेश से आने वाले हजारों पर्यटकों व वन्यजीव छायाकारों को आकर्षित करता है। जवाई सफारी के दौरान चट्टानों और पानी में इन वन्यजीवों की गतिविधियां देखना ही क्षेत्र के पर्यटन उद्योग का मुख्य आधार है। यदि समय रहते बांध के जल स्तर और जलीय जीवन को बचाने का प्रबंधन नहीं किया गया, तो पर्यटन पर निर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लग सकता है।

सवाल-जवाब

जवाई बांध की कुल भराव क्षमता कितनी है और वर्तमान में इसमें कितना पानी है?
जवाई बांध की कुल भराव क्षमता 61.25 फीट है, जबकि वर्तमान में इसका जलस्तर घटकर 24 फीट से भी नीचे पहुंच गया है।
जवाई बांध के सूखने से किन वन्यजीवों पर सबसे बड़ा संकट आया है?
जलस्तर घटने से बांध में रहने वाले 500 से अधिक विशालकाय मगरमच्छों और लाखों मछलियों के जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
जवाई बांध में मौजूदा पानी कितने समय तक चलने का अनुमान है?
विशेषज्ञों के अनुसार बांध में केवल 3 महीने का पानी शेष बचा है, जिसके बाद यह डेड स्टोरेज में चला जाएगा।
जवाई क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
जवाई क्षेत्र ग्रेनाइट पहाड़ियों में तेंदुओं और बांध के पानी में मगरमच्छों के अनूठे सह-अस्तित्व व सफारी पर्यटन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
पानी की कमी से मछलियों और मगरमच्छों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उथले पानी में तापमान बढ़ने से मछलियां मरने की कगार पर हैं, जिससे पानी दूषित होने और मगरमच्छों के भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp