थार के मरुस्थलीय इलाकों में खेती और जीवन यापन को सुगम बनाने के उद्देश्य से जल प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर सुधारा जा रहा है। गिरते भूजल और अल्प वर्षा की मार झेल रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना दशकों से एक मजबूत आधार रही है। इसी नहरी जल के संरक्षण और संकट काल में किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ी कार्ययोजना को हरी झंडी दिखाई है। इस योजना के अंतर्गत चार विशाल एस्केप जलाशय तैयार किए जाएंगे, जिनकी संयुक्त जल संचयन क्षमता 8,746 एमसीएफटी आंकी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 1,274.26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
विभिन्न नहरी बिंदुओं पर विकसित होंगे चार बड़े स्टोरेज प्वाइंट्स
जल सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए इन चारों जलाशयों का निर्माण नहर के अलग-अलग किलोमीटर बिंदुओं यानी आरडी 507, आरडी 750, आरडी 1121 और आरडी 1356 पर किया जाना तय हुआ है। इन स्थानों पर कुल 8,746 एमसीएफटी पानी का रिजर्व स्टॉक तैयार होने से जरूरत के वक्त सिंचाई तंत्र को तुरंत पानी की आपूर्ति की जा सकेगी। इसके साथ ही नहरी तंत्र में पानी की बर्बादी रोकने के लिए पक्के खालों, वाटर कोर्स और वितरिकाओं के मरम्मत कार्यों को भी समानांतर गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।
सिंचाई ढांचा सुधार और स्प्रिंकलर नेटवर्क का विस्तार
कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट घोषणा वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 के प्रावधानों के तहत 2,20,377 हेक्टेयर रकबे में खालों के पुनरुद्धार का काम प्रगति पर चल रहा है। वहीं जल की बचत के आधुनिक तरीकों को अपनाते हुए 1,18,248 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फव्वारा सिंचाई संयंत्र लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त सागरमल गोपा शाखा, बाबा रामदेव उपशाखा, फलौदी लिफ्ट नहर, मुख्य नहर के दोनों पटरों, बाबा रामदेव शाखा, कोलायत वितरिका तथा खिदरत वितरिका के जीर्णोद्धार और मजबूतीकरण के काम भी तेजी से निपटाए जा रहे हैं, ताकि अंतिम छोर तक खेतों को पर्याप्त पानी प्राप्त हो सके।
आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 550 करोड़ का बजट
नहरी तंत्र को आधुनिक और टिकाऊ रूप देने का यह सिलसिला आगामी वर्षों में भी जारी रहेगा। बजट वर्ष 2026-27 के तहत कुल 550 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की घोषणा की जा चुकी है। इस राशि से 33,543 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई खालों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। साथ ही सागरमल गोपा शाखा पर एक आधुनिक बैलेंसिंग जलाशय का निर्माण होगा तथा गजनेर लिफ्ट नहर और कोलायत लिफ्ट नहर का व्यापक नवीनीकरण कार्य हाथ में लिया जाएगा।
तेरह जिलों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों के लिए जीवनदायिनी व्यवस्था
इंदिरा गांधी नहर पश्चिमी, उत्तरी और मध्य राजस्थान के कुल 13 जिलों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में रीढ़ की भूमिका निभाती है। कृषि के साथ-साथ यह नहर सीमा सुरक्षा बल और भारतीय सेना के अग्रिम दस्तों के साथ ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों की पानी की मांग भी पूरी करती है। नहरों की मरम्मत और जल संचयन के इन ढांचागत कार्यों से सीमांत क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया संबल मिल रहा है और मरुस्थलीय इलाकों में जल संकट से निपटने के स्थायी इंतजाम तैयार हो रहे हैं।



















