राजस्थान के जालोर क्षेत्र में राजमार्ग और ग्रामीण पगडंडियों से निकलने वाले सफर में एक बेहद अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। आम तौर पर धार्मिक स्थलों या शांत क्षेत्रों के करीब हॉर्न बजाने पर पाबंदी होती है, परंतु यहां स्थिति बिल्कुल उलट है। एक प्राचीन देवस्थान के समीप आते ही चाहे कोई बाइक सवार हो, बस चालक हो अथवा ट्रक का पहिया थामे कोई व्यक्ति, हर कोई अपनी गाड़ी का हॉर्न जरूर बजाता है। यह कोई कानूनी नियम या परिवहन विभाग का निर्देश नहीं, बल्कि सदियों पुरानी ऐसी मान्यता है जिसे सफर की सुरक्षा का सुरक्षा कवच माना जाता है।
मातृभूमि की रक्षा और राजा वीरमदेव का सर्वोच्च बलिदान
क्षेत्र के बुजुर्गों और परंपरा के जानकारों के अनुसार, इस देवस्थान पर लोकदेवता मामाजी के स्वरूप में जालोर के प्रतापी शासक वीर वीरमदेव का वंदन किया जाता है। ऐतिहासिक गाथाओं में उल्लेख मिलता है कि वीरमदेव ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा खातिर रणभूमि में अद्भुत शौर्य दिखाया था। भयंकर संग्राम में मातृभूमि पर प्राण न्योछावर करते समय उनका धड़ कटकर इसी धरती पर गिरा था। उसी पावन बिंदु पर कालांतर में यह देवस्थान स्थापित हुआ, जहां उनके बलिदान को नमन करने दूर-दूर से लोग आते हैं।
सड़क पर शीश नवाने का अनोखा तरीका
सड़क किनारे मौजूद इस पवित्र स्थल के प्रति आम जनता और राहगीरों के मन में अगाध श्रद्धा है। इलाके के निवासी श्यामलाल के शब्दों में, "यह मंदिर राजा वीर वीरमदेव के सर्वोच्च बलिदान और स्मृति का जीवंत प्रतीक है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वीरगति को प्राप्त होने के उपरांत ही उन्हें मामाजी मानकर पूजा जाने लगा। आवागमन करने वाले मुसाफिरों के बीच यह अलिखित नियम स्वतः बन गया कि गाड़ी का हॉर्न बजाना दरअसल देवस्वरूप रक्षक को हाजिरी लगाने और नमन करने जैसा है।
उपेक्षा करने पर अनहोनी की गहरी लोकधारणा
इस अनूठी परंपरा के साथ आस्था और भय का एक मनोवैज्ञानिक संबल भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास दृढ़ता से कायम है कि यदि कोई चालक जानबूझकर अथवा अहंकारवश मंदिर के सामने से बिना हॉर्न बजाए गुजर जाता है, तो उसकी आगे की यात्रा में विघ्न आ सकते हैं। राह में वाहन का अचानक खराब होना, अनियंत्रित होकर टकराना अथवा किसी अन्य आकस्मिक विपदा का शिकार होना जैसी आशंकाएं लोकमानस में गहराई तक बैठी हैं। इसलिए हर वाहन चालक अनहोनी के डर और देवता के प्रति सम्मान के चलते हॉर्न की आवाज के साथ आगे बढ़ता है।
पीढ़ियों से चला आ रहा मन्नतों और विश्वास का दौर
यह अटूट विश्वास किसी एक गांव की सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि पूरे जालोर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोकदेवता मामाजी को एक शक्तिशाली रक्षक के तौर पर पूजा जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि मामाजी का आशीर्वाद सफर में हर अनहोनी से रक्षा करता है और पारिवारिक जीवन में सुख शांति बनाए रखता है। हर रोज यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है, जो अपनी व्यक्तिगत अर्जियां लेकर शीश झुकाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्तजन श्रद्धापूर्वक विशेष पूजा अनुष्ठान और प्रसाद भेंट करते हैं।
















