किर्गिस्तान की धरती पर आयोजित वैश्विक खेल मंच पर जब भारतीय तिरंगा लहराया, तो उसके पीछे सीकर जिले के एक छोटे से गांव की बेटी का वर्षों का कड़ा संघर्ष और अटूट संकल्प था। सीकर जिले के रायपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाली स्ट्रेंथ लिफ्टर अर्चना बिलोनिया ने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर विश्व स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। किर्गिस्तान में 8 से 12 सितंबर तक आयोजित की गई स्ट्रेंथ लिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अर्चना ने न केवल बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया, बल्कि दो शानदार स्वर्ण पदक जीतकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव भी हासिल किया। इस वैश्विक स्पर्धा में दुनिया भर के कई देशों के शीर्ष खिलाड़ियों ने भाग लिया था, लेकिन अर्चना के फौलादी इरादों के आगे कोई टिक नहीं सका। उन्होंने विदेशी जमीन पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया और दोहरे स्वर्ण पदक के साथ देश की झोली खुशियों से भर दी।
गरीबी और विपरीत परिस्थितियों से शुरू हुई जंग
अर्चना की इस ऐतिहासिक सफलता की पृष्ठभूमि किसी सिनेमाई कहानी जैसी लगती है, जहां हर कदम पर चुनौतियां थीं और संसाधन बेहद सीमित थे। उनका जन्म एक अत्यंत साधारण मजदूर परिवार में हुआ था। उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया रोजाना मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां मोहनी देवी घर का काम संभालती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि अर्चना के लिए खेल की महंगी ट्रेनिंग, विशेष खेल उपकरण और पौष्टिक डाइट का प्रबंध करना लगभग असंभव था। लेकिन अर्चना ने कभी भी अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अभ्यास की शुरुआत में जब उनके पास आने-जाने के लिए पैसे नहीं होते थे, तो वह कई किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करके जिला खेल स्टेडियम पहुंचती थीं।
कई बार तो ऐसा दौर भी आया जब पैसों और बुनियादी खेल सामग्री की कमी के कारण उनके खेल के सफर पर पूर्ण विराम लगने की नौबत आ गई थी। लेकिन अर्चना का हौसला डगमगाया नहीं और उनके परिवार ने भी अपनी क्षमता से बढ़कर अपनी बेटी के सपनों का समर्थन किया। जब गांव के प्रबुद्ध लोगों ने अर्चना के खेल के प्रति समर्पण और उनकी बेजोड़ मेहनत को देखा, तो उन्होंने इस उभरती हुई प्रतिभा को सहारा देने का फैसला किया। गांव वालों ने मिलकर स्थानीय दानदाताओं और भामाशाहों से संपर्क साधा। सभी के सामूहिक सहयोग से अर्चना के लिए जरूरी खेल किट और जूते की व्यवस्था की गई। इस मदद ने अर्चना के हौसलों को नए पंख दिए और उन्होंने बिना पीछे मुड़े अपने खेल को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया।
शॉटपुट से स्ट्रेंथ लिफ्टिंग तक का दिलचस्प सफर
यह जानना बेहद दिलचस्प है कि अर्चना ने अपने खेल करियर की शुरुआत सीधे स्ट्रेंथ लिफ्टिंग से नहीं की थी। जब वह सीकर के श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय में अपनी पढ़ाई कर रही थीं, तब उन्होंने एथलेटिक्स के अंतर्गत शॉटपुट खेल की तैयारी शुरू की थी। कॉलेज के मैदान पर उनकी असाधारण ताकत और शारीरिक क्षमता को देखकर कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत की पारखी नजरों ने उनकी असली प्रतिभा को पहचान लिया। उन्होंने अर्चना को सलाह दी कि उनकी शारीरिक संरचना और ताकत पावर लिफ्टिंग के लिए अधिक उपयुक्त है। कोच के इस मार्गदर्शन ने अर्चना की जिंदगी का रुख मोड़ दिया।
अपने गुरु की सलाह को सिर माथे रखते हुए अर्चना ने वेट लिफ्टिंग को अपना नया लक्ष्य बनाया। उन्होंने अपने प्रशिक्षण के तरीकों में बदलाव किया, अभ्यास सत्रों को और अधिक कठिन बनाया तथा अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। इस कड़ी मेहनत का नतीजा जल्द ही दिखने लगा जब उन्होंने जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की कर ली।
192.5 किलोग्राम वजन उठाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड
अर्चना बिलोनिया की खेल यात्रा में सबसे स्वर्णिम अध्याय तब लिखा गया जब उन्होंने थाईलैंड के पटाया में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में भाग लिया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 192.5 किलोग्राम वजन उठाया और एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इस टूर्नामेंट में भी उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खेल क्षमता का लोहा मनवाया था। इससे पहले, वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित की गई 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था, जहां उन्होंने एक स्वर्ण पदक और इनक्लाइन बेंच प्रेस स्पर्धा में एक रजत पदक हासिल किया था।
लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शानदार प्रदर्शन करने के कारण अब अर्चना भारतीय स्ट्रेंथ लिफ्टिंग के क्षेत्र में एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। केवल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग ही नहीं, बल्कि पावर लिफ्टिंग में भी उनका शानदार रिकॉर्ड रहा है। उनके नाम पावर लिफ्टिंग में अब तक 1 स्वर्ण, 4 रजत और 5 कांस्य पदक दर्ज हैं। वहीं, स्ट्रेंथ लिफ्टिंग की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वह अब तक कुल 4 स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में भी उन्होंने 4 कांस्य पदक हासिल किए हैं। वर्तमान समय में अर्चना जयपुर के विद्याधर नगर में मुख्य कोच उदयभान रावत के कुशल मार्गदर्शन में अपनी तैयारियों को और धार दे रही हैं। अब वह इतनी आत्मनिर्भर हो चुकी हैं कि अपने अभ्यास और डाइट का पूरा खर्च खुद ही उठा रही हैं।


















