महिला सशक्तीकरण और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में राजस्थान के कोटा शहर की द्वारिका गौड़ ने एक असाधारण उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर शून्य से शुरुआत करके एक सफल बुटिक और डिजाइनिंग व्यवसाय खड़ा किया है। मूल रूप से बूंदी जिले के हिंडोली कस्बे की रहने वाली द्वारिका गौड़ ने न केवल अपने परिवार को एक मजबूत आर्थिक आधार दिया है, बल्कि अपने साथ करीब 17 अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उनके घरों में खुशहाली लाने का काम किया है।
संघर्षपूर्ण शुरुआत और शुरुआती सफर
द्वारिका गौड़ की इस उद्यमशीलता की कहानी की शुरुआत दशकों पहले हुई थी। साल 1983 में उनकी शादी हुई थी, जिसके बाद घरेलू परिस्थितियों के कारण कॉलेज के दूसरे वर्ष में ही उनकी पढ़ाई छूट गई थी। बचपन से ही अपनी मां के कामों में हाथ बंटाने की शौकीन द्वारिका एक शिक्षिका बनना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक और परिस्थितिजन्य कारणों से उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। ऐसे में उन्होंने निराश होने के बजाय अपने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को ही अपनी ताकत बनाने का फैसला किया और इसे एक पेशे के रूप में अपना लिया।
उनके इस सफर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी। शुरुआती दिनों में उनके पास व्यवसाय के नाम पर केवल एक सिलाई मशीन थी और काम शुरू करने के लिए उन्होंने मात्र एक रुपये की धागे की गिट्टी खरीदी थी। उन्होंने बिना किसी बाहरी पूंजी या भारी-भरकम निवेश के अपने घर से ही काम करना शुरू किया। ग्राहकों को उनका काम पसंद आने लगा और धीरे-धीरे उनके काम की चर्चा फैलने लगी, जिससे ग्राहकों का दायरा बढ़ता चला गया।
दुकान की स्थापना और महिला रोजगार का जरिया
जैसे-जैसे ग्राहकों का भरोसा और काम का दबाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे घर के भीतर से काम संभालना थोड़ा मुश्किल होने लगा। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अपने मकान के निचले हिस्से में ही एक छोटी सी दुकान खोल ली। इस बदलाव ने उनके व्यवसाय को एक नया आयाम दिया और काम को और अधिक व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद की।
वर्तमान में उनके इस बुटिक से 16-17 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें नियमित रोजगार मिल रहा है। काम के प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए उन्होंने इसे दो हिस्सों में विभाजित किया है। इनमें से 10 महिलाएं दुकान पर ही बैठकर सिलाई और अन्य मुख्य काम संभालती हैं। वहीं, 5-6 महिलाओं को घर से ही काम करने की सुविधा दी गई है, जो साड़ी फॉल लगाने, हैंडवर्क करने और कपड़ों की फिनिशिंग जैसे जरूरी काम अपने घरों से ही पूरा करती हैं।
विशिष्ट उत्पाद और प्रतिष्ठित ग्राहक वर्ग
द्वारिका गौड़ के बुटिक की पहचान कोटा शहर में काफी मजबूत है क्योंकि यहाँ हर तरह के पारंपरिक और आधुनिक परिधान तैयार किए जाते हैं। उनके यहाँ सूट, ब्लाउज, फैंसी ड्रेस, लहंगा-चोली के साथ-साथ साड़ी फॉल और दुपट्टे का काम भी बड़ी बारीकी से किया जाता है। इसके अलावा, उनके बुटिक की एक और बड़ी खासियत भगवान के वस्त्र और मंदिरों के लिए विशेष श्रृंगार तैयार करना है।
इस विशेष सेवा के लिए ग्राहक मंदिर की मूर्ति की तस्वीर या उसका सटीक आकार भेज देते हैं, जिसके आधार पर द्वारिका और उनकी टीम बेहद खूबसूरत और सटीक फिटिंग वाले भगवान के वस्त्र तैयार करती हैं। उनके इस हुनर के चलते शहर के विज्ञान नगर, महावीर नगर और सेंट पॉल व सेंट जॉन स्कूल के शिक्षकों के साथ-साथ सीएफसीएल (CFCL) और रावतभाटा (आरईपीपी) जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों से भी लोग कपड़े सिलवाने और विशेष आर्डर देने पहुँचते हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए द्वारिका गौड़ आज समाज में महिलाओं की आत्मनिर्भरता का एक मजबूत प्रतीक बन चुकी हैं।



















