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राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ जोधपुर एडवोकेट्स एसोसिएशन का 25 अप्रैल का पत्र सामने आने से विवाद गहरायाराजस्थान
27 अग॰ 2026, 1:34 pm (1 घंटे पहले)· 1

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ जोधपुर एडवोकेट्स एसोसिएशन का 25 अप्रैल का पत्र सामने आने से विवाद गहराया

राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और वकीलों के बीच जारी तनाव के बीच एडवोकेट्स एसोसिएशन का पुराना पत्र सामने आया है। इसमें मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर तबादले और स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की गई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर चल रहा विवाद एक नया मोड़ ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर लगाए गए आरोपों का मामला उजागर होने से कई महीने पहले ही स्थानीय वकील संघ ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के स्थानांतरण और राज्य उच्च न्यायालय में एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की तुरंत नियुक्ति की मांग रखी गई थी। वकील संघ का मानना था कि मौजूदा प्रशासनिक परिस्थितियों में बार और बेंच के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना संभव नहीं हो पा रहा है।

प्रशासनिक समन्वय और संवादहीनता पर जताई गई थी चिंता

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर के अध्यक्ष रंजीत जोशी की ओर से 25 अप्रैल को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया सूर्यकांत को यह पत्र प्रेषित किया गया था। इस पत्राचार में मुख्य रूप से राजस्थान हाईकोर्ट में स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व की कमी को रेखांकित किया गया था। एडवोकेट्स एसोसिएशन का कहना था कि न्यायिक कार्यों के सुचारू संचालन और अदालत में सौहार्दपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश का होना अत्यंत आवश्यक है। पत्र में अधिवक्ताओं और अदालत प्रशासन के बीच बढ़ती संवादहीनता का स्पष्ट उल्लेख किया गया था, जिसके कारण रोजमर्रा के कामकाज में गंभीर असहजता और मतभेद की स्थितियां उत्पन्न हो रही थीं।

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वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं और 10×10 फीट के टिन शेड का मुद्दा

अदालत के प्रशासनिक रवैये के अलावा, वकीलों की दैनिक समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी इस पत्र में प्रमुखता से उठाया गया था। एडवोकेट्स एसोसिएशन ने शिकायत की थी कि अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त बैठक स्थल और छोटे चैंबर जैसी मूलभूत आवश्यकताएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। पत्र में उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि अधिवक्ताओं को 10×10 फीट के टिन शेड जैसी सीमित और असुविधाजनक जगहों में बैठकर काम करना पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहयोग न मिलने से अधिवक्ताओं के भीतर गहरा असंतोष व्याप्त हो रहा था, जिससे बार और बेंच के रिश्ते प्रभावित हो रहे थे।

स्थान परिवर्तन की स्पष्ट मांग और हालिया पत्राचार का संदर्भ

संस्थान की गरिमा और न्यायिक कार्यों की निरंतरता को बनाए रखने का हवाला देते हुए एडवोकेट्स एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से सिफारिश की थी कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस पी शर्मा को राजस्थान से बाहर किसी अन्य राज्य के हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाए। अप्रैल माह का यह पत्र अब इसलिए अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है क्योंकि इसी महीने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने भी मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम के सदस्यों को तीन अलग-अलग पत्र लिखे हैं। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर कथित रूप से शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनकी सत्यनिष्ठा पर सवाल खड़े किए थे और उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।

बार और बेंच के बीच पहले से बने तनाव के संकेत

जोधपुर के वकील संघ द्वारा अप्रैल में भेजे गए पत्र के सार्वजनिक होने से यह साफ हो गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट में बार और बेंच के बीच मतभेद की जड़ें काफी पुरानी हैं। जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उठाए गए कदमों से काफी पहले ही वकीलों के संगठन ने आधिकारिक स्तर पर अपनी चिंताओं को दर्ज करा दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने उच्च न्यायालय के प्रशासनिक माहौल और न्यायपालिका की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है, जिससे आने वाले दिनों में कॉलेजियम के फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

सवाल-जवाब

जोधपुर एडवोकेट्स एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र कब भेजा था?
एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने 25 अप्रैल को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया सूर्यकांत को यह पत्र भेजा था।
वकील संघ की प्रमुख मांगें क्या थीं?
संघ ने स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस पी शर्मा को राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की थी।
पत्र में वकीलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर क्या उल्लेख था?
पत्र में छोटे चैंबरों की कमी और 10×10 फीट के टिन शेड में वकीलों के काम करने जैसी असुविधाजनक परिस्थितियों का मुद्दा उठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने क्या कदम उठाया है?
जस्टिस संदीप मेहता ने इस महीने शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम को तीन पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 मिनट पहले

यह विवाद बार और बेंच के बीच प्रशासनिक समन्वय और संवादहीनता के गंभीर संकट को उजागर करता है। जब वकीलों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में 10×10 फीट के टिन शेड जैसे तंग माहौल में काम करना पड़े और शीर्ष स्तर पर असंतोष सामने आने लगे, तो न्यायिक कामकाज की सुचारिता प्रभावित होना तय है। आने वाले दिनों में यह मामला देश भर में न्यायिक प्रशासन और बार एसोसिएशनों के अधिकारों पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

यह प्रकरण मात्र प्रशासनिक गतिरोध नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं के भीतर संवाद की विफलता का गंभीर संकेत है। जब बार एसोसिएशन और उच्च न्यायपालिका के बीच इस स्तर का अविश्वास सामने आता है, तो इसका सीधा असर मुकदमों की सुनवाई और आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है। कॉलेजियम प्रणाली और उच्च स्तर पर इस प्रकार के पत्राचार का सार्वजनिक होना न्याय व्यवस्था की आंतरिक कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है, जिसकी समय रहते समीक्षा आवश्यक है।

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