राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के सादुलशहर इलाके में पुलिस ने जाली भारतीय मुद्रा के खिलाफ एक अहम कार्रवाई की है। पुलिस ने वार्ड नंबर 17 से एक युवक को हिरासत में लेकर उसके कब्जे से 100-100 रुपये मूल्य वर्ग के कुल 206 नकली नोट बरामद किए हैं। अगर इन नोटों के अंकित मूल्य को जोड़ें, तो यह रकम 20,600 रुपये बैठती है। पकड़े गए व्यक्ति की योजना इन जाली नोटों को स्थानीय बाजारों, दुकानों और आम नागरिकों के बीच सामान्य लेनदेन में चलाने की थी। इस जब्ती के बाद जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि यह खेप कहां तैयार हुई थी और इसके पीछे किस गिरोह का हाथ है।
छोटे मूल्य वर्ग के नोटों को निशाना बनाने की रणनीति
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू बरामद किए गए सभी नोटों का केवल 100 रुपये मूल्य वर्ग का होना है। अमूमन जालसाज बड़े नोटों को निशाना बनाते हैं, लेकिन यहां 100 रुपये के नोट चुने गए। दैनिक जीवन में 100 रुपये के नोट का चलन बेहद व्यापक है। सब्जी मंडी, दूध की डेयरी, किराना दुकान, चाय के ठेले और पेट्रोल पंपों पर लोग हर दिन सैकड़ों बार इस मूल्य के नोटों का आदान-प्रदान करते हैं। 500 रुपये के नोट को लेते समय दुकानदार और ग्राहक कागज की बनावट, सुरक्षा धागा और वॉटरमार्क की जांच करते हैं, लेकिन 100 रुपये के नोट पर आमतौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
भीड़भाड़ वाले बाजारों में खरीदारी के दौरान छुट्टे पैसे लेते या देते वक्त लोग नोट की बारीकियों को देखने से बचते हैं। इसी आम लापरवाही और भरोसे का फायदा उठाने के मकसद से जालसाज छोटे नोटों को एक सुरक्षित जरिया मानते हैं। हालांकि, इस मामले में पकड़े गए युवक ने खुद इन नोटों को छापा था या उसे किसी अन्य स्रोत से यह खेप मिली थी, इसका अंतिम खुलासा विस्तृत पूछताछ के बाद ही सामने आ सकेगा।
स्थानीय बाजार में प्रसार का संदेह और पुलिस की जांच
सादुलशहर में इस बरामदगी के बाद इलाके के व्यापारियों और खरीदारों के बीच यह चिंता पैदा हो गई है कि क्या इस तरह के जाली नोट पहले ही बाजार में चलाए जा चुके हैं। दैनिक खरीदारी में शामिल रहने वाले छोटे दुकानदारों और ठेले वालों के पास नकदी की जांच के लिए कोई उपकरण नहीं होते हैं। फिलहाल पुलिस की तरफ से इस बात की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है कि बाजार में ऐसे नोट पहले से पहुंच चुके हैं या नहीं, लेकिन इस आशंका से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता।
जांच अधिकारियों की प्राथमिकता अब इस नेटवर्क के मूल स्रोत तक पहुंचने की है। पुलिस इस बिंदु पर केंद्रित होकर काम कर रही है कि क्या 206 नोटों की यह खेप सादुलशहर में ही किसी गुप्त प्रिंटिंग सेटअप के जरिए तैयार की गई थी, या फिर इसे राजस्थान के किसी अन्य शहर अथवा पड़ोसी राज्यों से लाकर यहां खपाया जा रहा था। इस तरह के अपराधों में अक्सर एक संगठित श्रृंखला काम करती है, जिसमें नोट छापने वाले, डिलीवरी देने वाले और बाजार में नकदी चलाने वाले अलग-अलग लोग शामिल होते हैं।
नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी पुलिस टीम
वार्ड नंबर 17 से युवक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे जुड़े संपर्कों और कॉल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी अकेले इस अवैध काम को अंजाम दे रहा था या वह किसी अंतरराज्यीय सिंडिकेट का केवल एक छोटा मोहरा है। राजस्थान में पहले भी त्योहारों या चुनावी मौकों पर जाली नोट खपाने की कोशिशें सामने आती रही हैं, जैसे कि जयपुर में 3.45 लाख रुपये के नकली नोट पकड़े गए थे, जिन्हें पंचायतीराज चुनाव और त्योहारी सीजन के दौरान खपाया जाना था।
फिलहाल सादुलशहर मामले में एक युवक की गिरफ्तारी और 20,600 रुपये मूल्य के 206 जाली नोटों की जब्ती दर्ज हो चुकी है। पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध धंधे में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान कर उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाए, ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह के फर्जीवाड़े से सुरक्षित रखा जा सके।
























