राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित सैंपऊ उपखंड के मालोनी पंवार गांव के निवासी एडवोकेट चंद्रकांत चौहान ने एक कठिन और अनोखी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की है। वे देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। इस विशाल धार्मिक अभियान की शुरुआत 27 अप्रैल को राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर से हुई थी। यात्रा को शुरू हुए लगभग 5 महीने बीत चुके हैं और इस दौरान वे करीब 3500 किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर तय कर चुके हैं।
कई प्रमुख तीर्थस्थलों से गुजर चुकी है पदयात्रा
अपनी निरंतर पदयात्रा करते हुए चंद्रकांत चौहान इस समय आंध्र प्रदेश पहुंच चुके हैं। इस लंबी यात्रा के दौरान उन्होंने अब तक केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लिए हैं। ज्योतिर्लिंगों के अलावा वे ओडिशा के जगन्नाथ धाम पुरी समेत भारत के कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के स्थलों से होकर गुजरे हैं। वर्तमान में उनके कदम आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। उनका अंतिम संकल्प कुल 11 हजार किलोमीटर पैदल चलकर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की परिक्रमा और दर्शन पूरे करने का है।
आस्था के साथ सामाजिक सुधार और कानूनी अधिकारों का संदेश
चंद्रकांत चौहान के अनुसार यह सफर सिर्फ पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरी आस्था, आत्ममंथन और समाज को निकटता से समझने का सशक्त माध्यम है। पदयात्रा के दौरान वे विभिन्न राज्यों के नागरिकों से मुलाकात कर रहे हैं, जिससे उन्हें क्षेत्रीय संस्कृतियों, स्थानीय परंपराओं और जीवनशैली को गहराई से जानने का अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही वे समाज सुधार की दिशा में सक्रिय कदम उठाते हुए लोगों को देहदान और अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक कर रहे हैं। पेशे से वकील होने के कारण वे ग्रामीणों और आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी भी दे रहे हैं और अंधविश्वास के खिलाफ वैज्ञानिक सोच अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।
मंजिल की परवाह किए बिना लगातार आगे बढ़ने का संकल्प
पदयात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए चंद्रकांत चौहान का कहना है कि रास्ते में लोगों से सीधा संपर्क स्थापित होने से देश की विविधता का वास्तविक अनुभव हो रहा है। वे अपनी मंजिल या दूरी की चिंता किए बिना केवल निरंतर आगे बढ़ते रहने में विश्वास रखते हैं। उनका कहना है कि जब ईश्वर की कृपा उन्हें जयपुर से इतनी दूर तक सुरक्षित ले आई है, तो आगे के पूरे मार्ग का मार्गदर्शन भी वही करेंगे। उनका मानना है कि उनका भरोसा कठिन रास्तों पर नहीं बल्कि रास्ता दिखाने वाले ईश्वर पर है, और इसी अटूट श्रद्धा के सहारे वे 12 ज्योतिर्लिंगों की इस विशाल पदयात्रा को पूरा करने में जुटे हैं।


















