राजस्थान में नौ महीने की गर्भवती युवती ने जीवन लीला समाप्त की, पत्र में पति और ससुराल वालों पर प्रताड़ना का आरोपआगरा के राजा की मंडी स्टेशन का कायाकल्प, बेहतर सुविधाओं के बीच सुरक्षा जांच नदारदधुले में नवविवाहित जोड़े ने पैरों में जंजीर और ताला लगाकर तापी नदी में लगाई छलांग, दोनों के शव बरामदकिशनगढ़ में वकील को थप्पड़ मारने के आरोप पर बवाल, वकीलों ने जाम किया बाजार और मांगा सीओ का निलंबनदुर्गा पूजा के उपवास में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं पोषण और दिनचर्या के ये जरूरी नियमकिचन एग्जॉस्ट फैन की जिद्दी चिकनाई और कालिख हटाने के लिए आजमाएं यह आसान घरेलू नुस्खाघर पर बनाएं प्राकृतिक सल्फेट फ्री क्लींजर, बालों को मिलेगा पोषण और चमकसह-कलाकार अनीत पड्डा ने नाना पाटेकर को दी भावुक श्रद्धांजलि, फिल्म 'शक्ति शालिनी' में साथ काम करने के अनुभव किए साझाविमान उतरते ही दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो साथियों को रोकाबस्तर में मानसूनी सीजन में बींस की बुवाई से किसानों को चार महीने में बंपर मुनाफे की उम्मीद
आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम राजसमंद का उलपुराफार्म गांव, चुनावी चर्चा में गूंजे सवालराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 11:25 am (1 घंटे पहले)· 0

आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम राजसमंद का उलपुराफार्म गांव, चुनावी चर्चा में गूंजे सवाल

राजसमंद जिले की झोर पंचायत में स्थित उलपुराफार्म गांव के निवासी करीब 50 साल से पक्की सड़क, पेयजल, शिक्षा और अस्पताल की कमी झेल रहे हैं।

पंचायतीराज चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में लोकतांत्रिक हलचल तेज हो चुकी है, लेकिन इस चुनावी सरगर्मी के बीच जमीनी हकीकत की कुछ बेहद परेशान करने वाली तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित झोर पंचायत का उलपुराफार्म गांव आज भी उस विकास की राह देख रहा है जिसका वादा हर चुनाव में किया जाता है। इस गांव में रहने वाले लगभग 35 से 40 परिवार आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी सड़क, सुरक्षित पेयजल, इलाज और बच्चों की पढ़ाई जैसी बेहद जरूरी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की व्यथा यह है कि पिछले करीब 50 वर्षों से उन्होंने अपने गांव में डामर की पक्की सड़क नहीं देखी है, जिसके चलते सामान्य दिनों के साथ-साथ आपात स्थिति में भी जीवन मुश्किलों से घिर जाता है।

बरसात में बदहाल रास्ते और एम्बुलेंस तक पहुंचने का संकट

उलपुराफार्म के निवासियों के मुताबिक पक्की सड़क का अभाव उनके रोजमर्रा के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। मानसून के मौसम में जब तेज बारिश होती है, तो कच्चे रास्तों पर कीचड़ और गड्ढों के कारण चलना भी दूभर हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो या कोई दुर्घटना घट जाए, तो गांव के भीतर एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है। मरीजों को खाट या कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना एक सामान्य लेकिन बेहद जोखिम भरी मजबूरी बन चुका है। इसके अलावा गांव में रात के समय रोशनी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। गलियों में रोड लाइटें न होने के कारण अंधेरा पसरा रहता है, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का डर और हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है।

ये भी पढ़ें

नल योजना से वंचित आबादी और पड़ोसी जिले पर निर्भरता

पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़े-बड़े सरकारी दावों के बावजूद इस गांव के लोगों का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार की हर घर नल योजना का लाभ अब तक उनके घरों तक नहीं पहुंच सका है। पीने के साफ पानी के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव में प्राथमिक उपचार या नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए कोई चिकित्सा केंद्र मौजूद नहीं है और न ही बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए पर्याप्त शैक्षणिक ढांचा तैयार किया गया है। प्रशासनिक नक्शे के अनुसार यह गांव राजसमंद जिले का हिस्सा है, लेकिन चिकित्सा और जरूरी रोजमर्रा की सेवाओं के अभाव में यहां के लोगों को पड़ोसी जिले भीलवाड़ा पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का दर्द है कि प्रशासनिक सीमाओं के इस फेर में उनकी सुनवाई किसी भी स्तर पर गंभीरता से नहीं होती।

पंचायतीराज चुनाव 2026 में जनप्रतिनिधियों से तीखे सवाल

सरदारगढ़ तहसील के तहत आने वाली झोर ग्राम पंचायत में मतदाताओं की कुल संख्या करीब 2100 है। इस बार पंचायत के शीर्ष पद यानी सरपंच पद के लिए दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। जैसे-जैसे वोट मांगने वाले नेता और उम्मीदवार घर-घर दस्तक दे रहे हैं, वैसे-वैसे उलपुराफार्म के ग्रामीण उनसे विकास के पुराने वादों का हिसाब मांग रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि हर बार चुनाव के दौरान प्रत्याशी हाथ जोड़कर विकास की गंगा बहाने की कसमें खाते हैं, मगर नतीजा निकलने के बाद कोई मुड़कर भी नहीं देखता। इस बार ग्रामीणों ने तय किया है कि वे सड़क, पानी, रोशनी, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार के पंचायती चुनाव के बाद उलपुराफार्म की सूरत बदलती है या फिर उनका पांच दशकों का इंतजार यूं ही आगे बढ़ता रहेगा।

सवाल-जवाब

उलपुराफार्म गांव किस जिले और पंचायत में आता है?
उलपुराफार्म गांव राजस्थान के राजसमंद जिले की सरदारगढ़ तहसील के अंतर्गत झोर ग्राम पंचायत में आता है।
गांव के लोग कितने समय से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं?
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने पिछले करीब 50 वर्षों से गांव में डामर की पक्की सड़क नहीं देखी है।
बरसात के दिनों में ग्रामीणों को किस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है?
बरसात के समय रास्ते कीचड़ से भर जाने के कारण गांव के अंदर एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है।
उलपुराफार्म गांव में कितने परिवार रहते हैं?
इस गांव में लगभग 35 से 40 परिवार निवास करते हैं।
झोर पंचायत में कुल कितने मतदाता हैं और सरपंच पद के लिए कितने उम्मीदवार हैं?
झोर पंचायत में कुल 2100 मतदाता हैं और वहां सरपंच पद के लिए 2 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
ग्रामीणों को स्वास्थ्य व अन्य सुविधाओं के लिए किस जिले पर निर्भर रहना पड़ता है?
राजसमंद जिले में रहने के बावजूद जरूरी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को भीलवाड़ा जिले पर निर्भर रहना पड़ता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·20 मिनट पहले

आजादी के इतने साल बाद भी लोग सड़क और पानी के लिए तरस रहे हैं, यह सोचकर हैरानी होती है। चुनाव के वक्त सब वोट मांगने आ जाते हैं, पर जीतने के बाद इन 35-40 परिवारों की सुधि कोई क्यों नहीं लेता? क्या इस बार सचमुच कुछ बदलेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 मिनट पहले

रोहन भाई, 50 साल से पक्की सड़क न होना और एम्बुलेंस का गांव तक न पहुंच पाना वाकई हैरान करने वाला है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp