राजस्थान के लोगों को लंबे समय से सता रही भीषण गर्मी और उमस से आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। 21 जून की सुबह राज्य के लिए एक सुखद बदलाव लेकर आई, जब राजधानी जयपुर सहित कई जिलों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। सुबह करीब 4 बजे से ही जयपुर के आसमान में काले बादलों का डेरा जमा हो गया और ठंडी हवाओं के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। इस अचानक हुई वर्षा के कारण सुबह के तापमान में भारी कमी आई है, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी से छुटकारा मिला। ट्रेंडकिया की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग ने पहले ही राज्य के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में मौसम में इस बदलाव की भविष्यवाणी की थी, जो रविवार की सुबह सच साबित हुई। जयपुर के मालवीय नगर, टोंक रोड, वैशाली नगर और जगतपुरा जैसे इलाकों में तेज बौछारें पड़ने से सड़कें पूरी तरह पानी से लबालब हो गईं।
नम हवाओं के टकराव से सक्रिय हुआ नया तंत्र
मौसम वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं आपस में टकराई हैं, जिसके कारण एक नया साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव हो गया है। इसी मौसमी तंत्र की वजह से यह भारी बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जयपुर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में आज दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। शनिवार को जहां प्रदेश का अधिकतम तापमान फलोदी में 40.8 डिग्री सेल्सियस मापा गया था, वहीं रविवार को इस बारिश के प्रभाव से पारे में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज होने की संभावना है। IMD ने सुरक्षा के लिहाज से चेतावनी जारी की है कि बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने के दौरान लोग पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
अजमेर संभाग में तापमान गिरा, येलो अलर्ट हुआ लागू
अजमेर और उसके आस-पास के इलाकों में भी मौसम ने अपनी चाल बदल ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान अजमेर में 2 mm बारिश दर्ज की गई थी, जिसके बाद आज सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा हुआ है। शनिवार को यहां का अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य तापमान से 2 डिग्री कम रहा। मौसम विभाग ने अजमेर संभाग के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश की आशंका जताई है। इन ठंडी हवाओं के चलने से स्थानीय निवासियों को हीटवेव जैसी स्थितियों से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
कोटा और हाड़ौती क्षेत्र में मानसूनी हवाओं की हलचल
कोटा और हाड़ौती अंचल में भी प्री-मानसून की गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। मौसम विभाग ने कोटा संभाग के जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और मेघगर्जन को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। कोटा में सुबह से ही ठंडी हवाओं के साथ बिजली कड़कने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। स्थानीय मौसम केंद्र के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएं इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे आने वाले दो दिनों के भीतर कोटा, बारां और झालावाड़ के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। तापमान में आई इस गिरावट को देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
पश्चिमी राजस्थान में आंधी और बारिश से थमा गर्मी का प्रकोप
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और चुरू संभाग में भी मौसम तेजी से बदल रहा है। बीकानेर में शनिवार को अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.8 डिग्री सेल्सियस कम था। हालांकि, यहां सापेक्ष आर्द्रता शाम के समय 75% तक पहुंच गई थी, जिससे लोग भारी उमस से परेशान थे। IMD के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, बीकानेर, चुरू और हनुमानगढ़ के कुछ हिस्सों में धूलभरी आंधी चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस बदलाव से पूरे क्षेत्र में हीटवेव का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है और मौसम नियंत्रण में है।
चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून की सक्रियता, मेवाड़ में रिमझिम का दौर
चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को ही 10 mm बारिश दर्ज की जा चुकी है। बारिश की वजह से चित्तौड़गढ़ में सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता का स्तर 92% तक पहुंच गया था। रविवार सुबह से ही चित्तौड़गढ़ और उदयपुर संभाग के जिलों में लगातार रिमझिम फुहारें पड़ रही हैं। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार, दक्षिणी राजस्थान के इन इलाकों में मानसून के प्रवेश के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन चुकी हैं और अगले 24 घंटों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।













