पूर्वी राजस्थान के औद्योगिक और सीमावर्ती इलाकों में जीवन सुगम बनाने तथा प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के मकसद से सरकार ने बड़ा बजट आवंटित किया है. मुख्यमंत्री ने खैरथल तिजारा, कोटपूतली बहरोड़ और अलवर जिलों में जनहित से जुड़े 95 निर्माण कार्यों का उद्घाटन व नींव रखने का काम पूरा किया. इस पूरे खाके पर 117 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इन योजनाओं के जरिए कस्बाई और देहाती इलाकों में आवागमन सुगम बनाने, पानी का संकट दूर करने और बिजली तंत्र को अधिक दक्ष बनाने की तैयारी है.
नीमराणा बांध और मास्टर प्लान के तहत चौड़ी सड़कें
जल संकट से निपटने के लिए रामजल सेतु लिंक योजना से जुड़े नीमराणा बांध निर्माण को हरी झंडी दी गई है. इस जलाशय से इलाके में भूजल स्तर सुधरने के साथ पेयजल आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है. इसके साथ ही भविष्य के भारी वाहनों और आबादी के दबाव को देखते हुए 45 मीटर चौड़ाई वाली मास्टर प्लान सड़क का निर्माण कराया जाएगा. नगर नियोजन के विशेषज्ञों का मानना है कि चौड़े मार्ग तैयार होने से शहरीकरण के दौरान लगने वाले जाम से बचा जा सकेगा और माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ेगी.
हरियाणा सीमा तक मजबूत कनेक्टिविटी
पड़ोसी राज्य से व्यापारिक रिश्ते और दैनिक आवाजाही बेहतर करने के उद्देश्य से तिजारा से लेकर फिरोजपुर हरियाणा सीमा तक की सड़क को नए सिरे से पुख्ता किया जाएगा. यह मार्ग अंतरराज्यीय परिवहन की रीढ़ माना जाता है. डामरीकरण और मजबूतीकरण होने के बाद सीमावर्ती उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद बाहर भेजने में सहूलियत मिलेगी. साथ ही दैनिक कामगारों और व्यापारियों का सफर भी पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और कम समय लेने वाला हो जाएगा.
प्रशासनिक व्यवस्था का विकेंद्रीकरण
नागरिकों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए दूर न भागना पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर नए दफ्तर मंजूर किए गए हैं. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में अधिशासी अभियंता का नया पद सृजित हुआ है, जिससे नल जल योजनाओं की जमीनी निगरानी सीधी हो सकेगी. वहीं बिजली संबंधी फॉल्ट, नए कनेक्शन और बिलिंग की गड़बड़ियों को तेजी से निपटाने के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का अधिशासी अभियंता कार्यालय भी इसी इलाके में स्थापित किया जा रहा है.
डेयरी उत्पादन और किसान कल्याण
समीक्षा के दौरान ग्रामीण आर्थिकी का ब्योरा रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते ढाई साल में राज्य का दैनिक दुग्ध संकलन 34 लाख लीटर से छलांग लगाकर 47 लाख लीटर के आंकड़े तक पहुंच चुका है. पशुपालकों को समय पर भुगतान और प्रोत्साहन मिलने से यह उछाल दर्ज हुआ है. खेती किसानी को संबल देने के लिए केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के ऊपर राज्य सरकार की तरफ से भी अतिरिक्त वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है. इन तमाम पहलों से सीमांत जिलों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के आसार हैं.


















