कच्चे माल और भाड़े के झटके से तेल कंपनियों पर रसोई गैस घाटा 62,000 करोड़ रुपये के पारसाप्ताहिक राशिफल 21 सितंबर 2026: मेष, मिथुन, तुला और वृश्चिक राशि के लिए बेहद शुभ रहेंगे आने वाले 7 दिनमूलांक 8 अंकज्योतिष राशिफल 21 सितंबर 2026: शनि और भाग्यांक 4 का अनुशासन देगा कार्य में सफलताअमेरिकी शेयर बाजारों में अस्थिरता के संकेत, ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी नजरेंराजस्थान के जालोर में छह माह के मासूम को पेड़ तले छोड़ मां ने ट्रेन के सामने कूदकर दी जाननागपुर से 1800 किलोमीटर दूर चलकर हिमाचल के रेणुका चिड़ियाघर पहुंचा रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ाग्लोइंग और नेचुरल त्वचा की चाहत ने बढ़ाया कोरियन ब्यूटी का क्रेज, जानें पार्लरों में क्यों घटी भारी मेकअप की मांगमूलांक 3 अंकज्योतिष 21 सितंबर 2026: योजना को जमीन पर उतारने का दिन, अनुशासन से सुलझेंगे कामसुबह की जल्दबाजी में बनाएं मिथिला स्टाइल प्याज पराठा, फटने से बचाने का यह है आसान तरीकाएमसीएक्स पर सोना फिसलकर ₹1.53 लाख पर पहुंचा, चांदी ₹2.40 लाख के स्तर पर स्थिर
राजस्थान में शहरों के मुखिया चुनने की जंग तेज, 273 निकायों में वोटिंग और नतीजों का दिनराजस्थान
21 सित॰ 2026, 8:25 am (1 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में शहरों के मुखिया चुनने की जंग तेज, 273 निकायों में वोटिंग और नतीजों का दिन

राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में सोमवार को मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष चुनने के लिए मतदान और मतगणना का दौर शुरू हो गया है, जहां निर्दलीय पार्षद कई सीटों पर नतीजों की दिशा तय कर रहे हैं।

राजस्थान के शहरी इलाकों में स्थानीय सत्ता की कमान संभालने के लिए राजनीतिक घमासान अपने निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। प्रदेश भर के 273 नगरीय निकायों में शीर्ष पदों को भरने के लिए पार्षद मतदान कर रहे हैं, जिसके तुरंत बाद मतगणना कर परिणामों की घोषणा की जाएगी। इस चुनावी कवायद के तहत पांच प्रमुख नगर निगमों में महापौर, 41 नगर परिषदों में सभापति और 262 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाने हैं। इससे पहले प्रदेश के 305 नगरीय निकायों में 9 और 11 सितंबर को वार्ड पार्षदों के लिए वोट डाले गए थे। हालांकि, 32 निकायों में शीर्ष पदों पर निर्विरोध निर्वाचन पहले ही संपन्न हो चुका है, जबकि कुछ बड़े शहरों में दोबारा मतदान की जरूरत के चलते तारीख आगे बढ़ाई गई है। अधिकांश शहरों में दोपहर तक मतदान और उसके बाद गिनती पूरी होते ही स्थानीय बोर्ड के गठन की तस्वीर साफ हो जाएगी।

निर्दलीय पार्षदों के इर्द-गिर्द घूमती सत्ता की चाबी

इस बार के निकाय चुनाव परिणामों ने कई शहरों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, के सामने जटिल समीकरण खड़े कर दिए हैं। बड़ी तादाद में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत की वजह से कई निकायों में किसी भी दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि सत्ता की बागडोर अपने हाथ में लेने के लिए दोनों खेमों ने पार्षदों की बाड़ाबंदी की और निर्दलीयों के साथ-साथ बागियों को साधने में पूरी ताकत झोंक दी। कई क्षेत्रों में यह निर्दलीय पार्षद ही निर्णायक भूमिका निभाते हुए तय कर रहे हैं कि नगर की सरकार किस पार्टी की बनेगी।

ये भी पढ़ें

पांच नगर निगमों में महापौर पद की दिलचस्प जंग

सोमवार को प्रदेश के पांच नगर निगमों, जिनमें उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर शामिल हैं, में महापौर चुनने के लिए वोटिंग कराई जा रही है। इन सभी जगहों पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक पार्षद अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

उदयपुर नगर निगम के कुल 80 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। यहां भाजपा के 53, कांग्रेस के 23 और अन्य के 4 पार्षद जीतकर आए हैं। भाजपा ने महापौर पद के लिए पारस सिंघवी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉ. पूनम कंवर दावेदारी पेश कर रही हैं।

बीकानेर नगर निगम में समीकरण इसके विपरीत हैं, जहां कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। कुल पार्षदों में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27 और अन्य श्रेणी के 11 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। यहां बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने की होड़ मची हुई है।

अलवर नगर निगम के इतिहास में पहली बार महापौर का चुनाव हो रहा है, जिसे लेकर जबरदस्त उत्साह है। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 14 निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच सीधा मुकाबला बना हुआ है। यहां मतदान मतपत्र के जरिए कराया जा रहा है, जिसमें नोटा का विकल्प भी मौजूद है। जिन निर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण बाकी था, उन्हें वोट डालने से पहले शपथ दिलाई गई। जिले की नौ अन्य पालिकाओं में भी चुनाव जारी है, जबकि खेड़ली और गोविंदगढ़ में निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका है।

पाली नगर निगम में मुकाबला त्रिकोणीय रूप ले चुका है। 65 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस की सुमित्रा जैन के अलावा कांग्रेस की बागी निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ भी मुकाबले में डटी हुई हैं। तीनों ही उम्मीदवार अपनी जीत और बोर्ड बनाने का पक्का दावा कर रहे हैं, जिससे 15 निर्दलीयों का रुख सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

अजमेर नगर निगम में भी किसी दल के पास अपने बूते बहुमत का आंकड़ा नहीं है। कुल पार्षदों में कांग्रेस के पास 37, भाजपा के पास 32 और 11 निर्दलीय सदस्य हैं। कांग्रेस का दावा है कि पांच निर्दलीय उसके पाले में हैं, वहीं भाजपा भी पूरा जोर लगा रही है। कड़े मुकाबले को देखते हुए निगम दफ्तर पर सुरक्षा के सख्त पहरे लगाए गए हैं और बाहरी लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लागू है।

जयपुर, जोधपुर और कोटा में 25 सितंबर को होगा फैसला

प्रदेश के तीन बड़े नगर निगमों, जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद का चुनाव आज नहीं हो रहा है। इन शहरों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान कराए जाने के कारण निर्वाचन कार्यक्रम में बदलाव किया गया है और अब यहां 25 सितंबर को महापौर चुने जाएंगे। सुकेत नगर पालिका में भी पुनर्मतदान के चलते चुनाव इसी दिन होगा।

संख्या बल की बात करें तो जयपुर के 150 वार्डों में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। यहां भाजपा ने सुनील कोठारी को और कांग्रेस ने सुनीता मावर को टिकट दिया है। जोधपुर में बेहद करीबी स्थिति है, जहां भाजपा के 45, कांग्रेस के 44 और 10 निर्दलीय पार्षद हैं। कोटा नगर निगम में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और 4 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं।

32 निकायों में निर्विरोध निर्वाचन, दो नगर निगमों को मिलीं महिला मेयर

राज्य निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 32 निकायों में बिना किसी मतदान के ही अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। इनमें से 28 निकायों में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जबकि दो पदों पर कांग्रेस और दो पर भाजपा समर्थित निर्दलीयों को जीत मिली है।

भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में महापौर का चुनाव सर्वसम्मति से निर्विरोध संपन्न हुआ, जहां दोनों जगह महिलाओं ने कमान संभाली है। भरतपुर में अनुराधा और भीलवाड़ा में जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर बनी हैं। इसके अलावा कई अन्य नगर परिषदों और पालिकाओं में भी शीर्ष पदों का निर्विरोध फैसला हो चुका है।

कोटा जिले की चार पालिकाओं का चुनावी गणित

कोटा जिले की सांगोद, सुल्तानपुर, इटावा और रामगंजमंडी नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। रामगंजमंडी में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत होने से वहां की स्थिति बिल्कुल साफ मानी जा रही है। इसके उलट, इटावा नगर पालिका में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सबसे बड़ा कारक बन गया है और वे सीधे तौर पर किंगमेकर बन चुके हैं।

राजसमंद और झालावाड़ में स्थानीय समीकरण

राजसमंद जिले की पांच नगरीय निकायों में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभापति और अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले जा रहे हैं। यहां नगर परिषद और पालिकाओं में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सिमटा हुआ है। दोपहर बाद परिणाम आते ही यहां की राजनीतिक तस्वीर साफ हो जाएगी।

झालावाड़ जिले के आठ नगरीय निकायों में भी चुनाव प्रक्रिया चल रही है। जिले के सात निकायों में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट है। झालावाड़, डग, खानपुर और भवानीमंडी में कांग्रेस के पास बहुमत मौजूद है, जबकि झालरापाटन, अकलेरा और मनोहरथाना में भाजपा को स्पष्ट बढ़त हासिल है। हालांकि, पिड़ावा नगर पालिका में दोनों में से किसी भी दल के पास पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं, जिससे वहां आम आदमी पार्टी के पार्षदों की भूमिका निर्णायक बन गई है।

डूंगरपुर और सागवाड़ा में आदिवासी पार्टी की मौजूदगी

डूंगरपुर नगर परिषद और सागवाड़ा नगर पालिका में भी मतदान जारी है। डूंगरपुर नगर परिषद में भाजपा की सुशीला गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा आमने-सामने हैं। यहां के 40 पार्षदों में भाजपा के 24, कांग्रेस के 12, भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के 3 और भाजपा के एक बागी निर्दलीय पार्षद शामिल हैं।

सागवाड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष का चुनाव एसडीएम कार्यालय में कराया जा रहा है। यहां भाजपा की आशा पाटीदार का मुकाबला कांग्रेस की भूमिका पंचाल से है। सदन के 35 पार्षदों में भाजपा के पास 23, कांग्रेस के पास 8 और बीएपी के पास 4 सदस्य हैं।

करौली जिले की पांच निकायों में घमासान

करौली जिले में हिंडौन नगर परिषद में सभापति का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका है। शेष पांच निकायों, जिनमें करौली नगर परिषद, सपोटरा, मंडरायल, टोडाभीम और सूरौठ शामिल हैं, में सोमवार को मतदान हो रहा है। करौली नगर परिषद में 55 पार्षद मतदान कर रहे हैं। सपोटरा, मंडरायल और सूरौठ में 20-20 पार्षद तथा टोडाभीम में 35 पार्षद अपने अध्यक्ष का चुनाव कर रहे हैं।

करौली नगर परिषद के 55 वार्डों में कांग्रेस के 28, भाजपा के 11, बसपा का एक और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। कांग्रेस ने सुनील सैनी को और भाजपा ने वीरेंद्र शर्मा को सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। सपोटरा नगर पालिका में कुल 20 पार्षदों में से भाजपा के पास 15, कांग्रेस के पास 3 और 2 निर्दलीय हैं। यहां भाजपा की सपना और कांग्रेस की कविता के बीच मुकाबला है और राजकीय महाविद्यालय सपोटरा में मतदान कराया गया।

झुंझुनूं, जैसलमेर, पोकरण और हनुमानगढ़ का माहौल

झुंझुनूं जिले के 18 नगरीय निकायों में कुल 530 वार्ड पार्षद अपने निकाय प्रमुखों को चुन रहे हैं। चुनाव से ऐन पहले झुंझुनूं में कांग्रेस पार्षद सुमन खान को अतिक्रमण के मामले में तहसीलदार की ओर से तीन दिन का नोटिस जारी किए जाने से सियासी हलकों में हलचल मच गई है, जिसमें जवाब न देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्ड पार्षद सभागार में मतदान कर नए सभापति का चुनाव कर रहे हैं। वहीं पोकरण नगर पालिका सभागार में 25 पार्षद अध्यक्ष पद के लिए वोट डाल रहे हैं, जहां कांग्रेस अपने बोर्ड गठन का दावा कर रही है।

हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति चुनाव के दिन सुबह ट्रेन से निर्दलीय पार्षदों का जत्था जंक्शन पहुंचा। विधायक गणेशराज बंसल के समर्थक यह पार्षद पूर्व सभापति सुमित रिणवा के नेतृत्व में पहुंचे, जिसके बाद गहमागहमी तेज हो गई। पार्षदों ने अदालत के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक दबाव और वोटिंग से वंचित किए जाने की आशंका जताई है। इन सभी निकायों में मतदान खत्म होते ही मतगणना कर नतीजे जारी कर दिए जाएंगे।

सवाल-जवाब

राजस्थान में कितने नगरीय निकायों में सोमवार को मतदान हो रहा है?
प्रदेश के 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष, सभापति और महापौर चुनने के लिए सोमवार को मतदान और मतगणना हो रही है।
जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर पद का चुनाव आज क्यों नहीं हुआ?
इन तीनों बड़े नगर निगमों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान होने के कारण मेयर पद के चुनाव की तारीख 25 सितंबर तय की गई है।
कितने नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है?
राज्य के 32 नगरीय निकायों में निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है, जिनमें 28 पदों पर भाजपा, दो पर कांग्रेस और दो पर भाजपा समर्थित निर्दलीय जीते हैं।
किन दो नगर निगमों में निर्विरोध महिला मेयर चुनी गई हैं?
भरतपुर नगर निगम में अनुराधा और भीलवाड़ा नगर निगम में जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी गई हैं।
सोमवार को किन पांच नगर निगमों में महापौर के लिए मतदान हो रहा है?
उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर नगर निगमों में सोमवार को महापौर चुनने के लिए वोट डाले जा रहे हैं।
अलवर नगर निगम चुनाव में कौन-कौन से प्रत्याशी मैदान में हैं?
अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच महापौर पद के लिए मुकाबला है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·7 मिनट पहले

राजस्थान के इन नगरीय निकायों और खासकर अलवर व बीकानेर जैसे निगमों में जिस तरह निर्दलीय और बागी पार्षद सत्ता की चाबी बने हुए हैं, वह किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। हालांकि मेरा क्षेत्र मनोरंजन है, लेकिन जब राजनीति में ऐसे नाटकीय मोड़ और पार्षदों की बाड़ाबंदी जैसी रोमांचक घटनाएं सामने आती हैं, तो यह साफ हो जाता है कि असल जिंदगी का ड्रामा सिल्वर स्क्रीन के किसी भी सियासी ड्रामे से कहीं ज्यादा पेचीदा और असरदार होता है।

Ravikash Gupta@ravikash·28 मिनट पहले

राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में जारी इस चुनावी घमासान और निर्दलीयों की निर्णायक भूमिका से स्पष्ट है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक समीकरण कितने जटिल हो चुके हैं। जिस प्रकार उदयपुर और बीकानेर जैसे नगर निगमों में संख्या बल विभाजित है और बाड़ाबंदी का सहारा लिया जा रहा है, वह स्पष्ट रूप से अस्थिरता की ओर इशारा करता है। राजनीतिक दलों के लिए यह स्थिति केवल स्थानीय बोर्ड गठन की चुनौती नहीं है, बल्कि यह आगामी बड़े राजनीतिक रुझानों को भी प्रभावित करेगी। ऐसे खंडित जनादेश अक्सर दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिरता पर सवालिया निशान लगाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 मिनट पहले

अर्जुन मेहता का विश्लेषण: राजस्थान के इन स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीयों का उभरना और बाड़ाबंदी की संस्कृति इस बात का प्रमाण है कि पारंपरिक राजनीतिक दलों पर से स्थानीय मतदाताओं की निर्भरता कम हो रही है। उदयपुर और बीकानेर जैसे बड़े निगमों में खंडित जनादेश केवल बोर्ड गठन की उलझन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर भीतरघात और प्रशासनिक जवाबदेही को भी सीधा प्रभावित करेगा। आने वाले दिनों में इन निकायों में राजनीतिक सौदेबाजी और जोड़-तोड़ की राजनीति चरम पर देखने को मिल सकती है, जिससे नगरीय विकास के वादे अक्सर फाइलों में ही सिमटकर रह जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए चल रहा यह चुनावी घमासान सिर्फ राजनीतिक दलों की ताकत का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील प्रशासनिक चुनौती भी है। इस पूरी प्रक्रिया में निर्दलीयों की निर्णायक भूमिका और बाड़ाबंदी की राजनीति ने स्पष्ट कर दिया है कि परिणाम आने के बाद विजयी पार्षदों और समर्थकों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने होंगे। मतदान और मतगणना के इस त्वरित दौर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

निकाय चुनावों में स्पष्ट बहुमत के अभाव और निर्दलीयों की भरमार से आने वाले दिनों में नगर निगमों के सुचारू संचालन और बोर्ड बैठकों में गतिरोध की पूरी आशंका है। जब बहुमत के आंकड़े के लिए निर्दलीय और बागी पार्षदों पर निर्भरता बढ़ती है, तो नीतिगत फैसलों और विकास कार्यों में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp