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राजस्थान की तनाया यादव ने कथक में रचा कीर्तिमान, कराटे और लॉ में भी लहराया परचमराजस्थान
21 सित॰ 2026, 9:09 am (1 घंटे पहले)· 0

राजस्थान की तनाया यादव ने कथक में रचा कीर्तिमान, कराटे और लॉ में भी लहराया परचम

झुंझुनूं निवासी तनाया यादव ने 17 वर्ष से कम आयु में कथक की प्रतिष्ठित संगीत प्रभाकर डिग्री हासिल कर विश्व कीर्तिमान बनाया है। वह कराटे में अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने के साथ लॉ की पढ़ाई और अपना स्टार्टअप भी संभाल रही हैं।

पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय कलाओं में महारत हासिल करना वर्षों के कठोर अभ्यास और समर्पण की मांग करता है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले की रहने वाली युवा प्रतिभा तनाया यादव ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर लगन पक्की हो तो कला, खेल और उच्च शिक्षा में एक साथ शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य की विधा में सबसे कम आयु में औपचारिक दक्षता हासिल कर एक नया मुकाम तय किया है।

कथक में सबसे कम आयु की संगीत प्रभाकर का कीर्तिमान

प्रयाग संगीत समिति की तरफ से 19 जून 2025 को तनाया यादव की इस औपचारिक योग्यता को विधिवत प्रमाणित किया गया। जब उन्होंने कथक विधा के अंतर्गत संगीत प्रभाकर की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की, तब उनकी उम्र केवल 16 वर्ष 11 महीने 24 दिन दर्ज की गई थी। आमतौर पर संगीत या नृत्य विधा में इस योग्यता को पूरा करने के लिए साधकों को लंबी अवधि तक सिलसिलेवार परीक्षाओं और मंच प्रदर्शनों के कई चरणों को पार करना होता है।

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सत्रहवें वर्ष में कदम रखने से पूर्व ही इस स्तर को पूरा करके तनाया इस विषय में सबसे कम उम्र में यह योग्यता पाने वाली शख्सियत बन गई हैं। समाज में अक्सर ऐसी धारणा देखने को मिलती है कि शास्त्रीय साधना या खेल जगत में वक्त लगाने के बाद सामान्य अकादमिक पढ़ाई पर ध्यान देना बेहद कठिन हो जाता है। तनाया के इस रिकॉर्ड ने ऐसी सभी मान्यताओं को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।

जयपुर घराने की परंपरा और मंच की तैयारी

कथक की अपनी गहन यात्रा में तनाया ने जयपुर घराने की समृद्ध परंपरा को चुना और गुरु हरीश गंगानी से इसका विधिवत मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस विशिष्ट घराने की शैली अपनी तीव्र पदचाप, जटिल लयकारी और तेज गति से होने वाले भाव प्रदर्शन के जरिए कथा कहने के लिए विख्यात है।

शुरुआत से ही उनका जोर केवल प्रस्तुति देने पर नहीं, बल्कि शास्त्रीय तकनीक की मजबूती और सैद्धांतिक ज्ञान की समझ को परिपक्व करने पर रहा। भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में शामिल कथक में कदमताल, तालमेल, विभिन्न भाव-भंगिमाओं और लिखित सिद्धांतों पर एक समान पकड़ होना आवश्यक होता है। उनका यह कीर्तिमान किसी जल्दबाजी का नतीजा न होकर नियमित रियाज और शास्त्रीय नियमों के कठोर पालन की परिणति है।

मार्शल आर्ट्स में गोल्ड मेडल और लेखन का सफर

तनाया का अनुशासन सिर्फ शास्त्रीय मंच तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल के मैदान में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2022 के दौरान पंजाब के डिस्ट्रिक्ट स्टेडियम में आयोजित पहली इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय कराटे-डो और किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने काता वर्ग के तहत भाग लिया और स्वर्ण पदक हासिल किया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने अपनी वैचारिक समझ को पुस्तक का रूप भी दिया। उनकी लिखी किताब ‘कथक: द रिदम ऑफ इनर स्ट्रेंथ’ नाम से अमेज़न पर उपलब्ध है। इस कृति में उन्होंने यह दृष्टिकोण सामने रखा है कि कथक केवल कला प्रदर्शन का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह बच्चों और किशोरों में आंतरिक आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के समग्र विकास का सशक्त जरिया भी बन सकता है।

कानून की पढ़ाई, स्टार्टअप का संचालन और अंतरराष्ट्रीय अनुभव

अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए तनाया पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से 5 वर्षीय बीकॉम एलएलबी (ऑनर्स) की डिग्री ले रही हैं। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कानूनी क्षेत्र में नई पहल करते हुए जून 2026 में ‘लीगल नेक्सस’ की नींव रखी। वह इस स्टार्टअप की संस्थापक और सीईओ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह मंच वकालत के विद्यार्थियों और विधि पेशेवरों को अदालती डायरेक्टरी, ड्राफ्टिंग से जुड़े जरूरी टेम्प्लेट और संदर्भ सामग्री मुहैया कराने का कार्य करता है।

स्वास्थ्य और अनुसंधान के स्तर पर उन्होंने फोर्टिस हॉस्पिटल में मानसिक स्वास्थ्य, उससे जुड़ी बीमारियों के लक्षणों की पहचान और संभावित उपचार के तरीकों पर शोध कार्य भी किया है।

तकनीक और कूटनीतिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। अमेरिकी दूतावास के अंतर्गत आने वाले अमेरिकन सेंटर में इंटर्नशिप करते हुए उन्होंने वैश्विक समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर अपना प्रेजेंटेशन दिया था। वहीं रोबोटिक्स में अपनी रुचि के चलते उन्होंने लेगो घटकों और कस्टम कोडिंग के इस्तेमाल से वर्किंग मॉडल भी तैयार किए।

जनवरी 2023 में तनाया ने नीति आयोग और एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित ग्लोबल क्लाइमेट असेंबली में टीम लीडर की भूमिका निभाई। इसके साथ ही ब्रिटिश काउंसिल और आरआईडीएस की वर्चुअल सम्मेलनों में उन्होंने भारत की ओर से कजाकिस्तान के प्रतिनिधि के रूप में इन्वेंट्री, बजट प्रबंधन और परिधान डिजाइन से जुड़ी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभाला था। उनका यह पूरा सफर साबित करता है कि बहुआयामी प्रतिभा और सही समय प्रबंधन से हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचे जा सकते हैं।

सवाल-जवाब

तनाया यादव ने कथक में कौन सा विश्व रिकॉर्ड बनाया है?
उन्होंने महज 16 वर्ष 11 महीने 24 दिन की आयु में कथक की प्रतिष्ठित संगीत प्रभाकर डिग्री हासिल कर सबसे कम उम्र में यह योग्यता पाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
तनाया की इस डिग्री को किस संस्थान ने प्रमाणित किया?
प्रयाग संगीत समिति ने 19 जून 2025 को उनकी संगीत प्रभाकर डिग्री को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया था।
तनाया यादव कथक के किस घराने से ताल्लुक रखती हैं और उनके गुरु कौन हैं?
वह जयपुर घराने से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने इस विधा का प्रशिक्षण गुरु हरीश गंगानी से हासिल किया है।
कराटे प्रतियोगिता में उन्होंने कौन सी उपलब्धि हासिल की थी?
वर्ष 2022 में पंजाब में आयोजित पहली इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय कराटे-डो और किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप की काता श्रेणी में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
तनाया यादव द्वारा लिखित पुस्तक का नाम क्या है?
उनकी लिखी पुस्तक का शीर्षक ‘कथक: द रिदम ऑफ इनर स्ट्रेंथ’ है, जो अमेज़न पर उपलब्ध है।
वह वर्तमान में किस कॉलेज से और कौन सी पढ़ाई कर रही हैं?
वह पुणे स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से 5 वर्षीय बीकॉम एलएलबी (ऑनर्स) प्रोग्राम की पढ़ाई कर रही हैं।
तनाया के स्टार्टअप का नाम क्या है और यह क्या सुविधा देता है?
उनके स्टार्टअप का नाम ‘लीगल नेक्सस’ है, जो जून 2026 में स्थापित हुआ और लॉ छात्रों व प्रोफेशनल्स को कोर्ट डायरेक्टरी, ड्राफ्टिंग टेम्प्लेट और रेफरेंस गाइड उपलब्ध कराता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·7 मिनट पहले

तनाया यादव की यह बहुआयामी उपलब्धि यह दर्शाती है कि आज की युवा प्रतिभाएं मनोरंजन, कला और अकादमिक जगत की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ रही हैं। एक तरफ जहां इतनी कम उम्र में कथक में 'संगीत प्रभाकर' की उपाधि और अंतरराष्ट्रीय कराटे स्वर्ण पदक जैसी उपलब्धियां दुर्लभ हैं, वहीं लॉ की पढ़ाई और स्टार्टअप का प्रबंधन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में युवा पीढ़ी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सिनेमा और सांस्कृतिक मंचों पर भी इस तरह की प्रेरणादायक बहुमुखी प्रतिभाओं की मांग तेज़ी से बढ़ेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·30 मिनट पहले

तनाया यादव की यह उपलब्धि केवल कला और खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सफल स्टार्टअप और लॉ की पढ़ाई के साथ समय प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण है। आधुनिक कॉर्पोरेट जगत और स्टार्टअप इकोसिस्टम में ऐसे बहुमुखी युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है जो एक साथ कई मोर्चों पर उच्च स्तर का प्रदर्शन कर सकें। यह सफलता दर्शाती है कि आने वाले समय में अनुशासित युवा उद्यमी पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर नई आर्थिक और व्यावसायिक ऊंचाइयों को छूएंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 मिनट पहले

तनाया यादव का यह बहुआयामी प्रदर्शन भारत की युवा जनसांख्यिकी और मानव संसाधन नीति के लिए एक बड़ा संकेत है। जब एक ही युवा कला, खेल, विधि अध्ययन और उद्यमिता को संतुलित करता है, तो यह देश की युवा शक्ति की वास्तविक क्षमता को उजागर करता है। नीति निर्धारकों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि कैसे औपचारिक शिक्षा प्रणाली को ऐसा लचीला ढांचा प्रदान किया जाए, जिससे अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कौशल विकास और सांस्कृतिक उपलब्धियों को भी आधिकारिक मान्यता मिल सके। यह मॉडल आने वाले समय में भविष्य के नेतृत्व को गढ़ने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·53 मिनट पहले

तनाया यादव की यह उपलब्धि केवल कला और खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि युवा पीढ़ी अपने कानूनी और व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ-साथ सार्वजनिक मंचों पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती है। कम उम्र में लॉ की पढ़ाई, स्टार्टअप संचालन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कराटे में स्वर्ण पदक जैसे आयामों को साधना एक असाधारण अनुशासन को दर्शाता है। आने वाले समय में ऐसे बहुआयामी युवाओं की सफलता यह तय करेगी कि कानूनी साक्षरता और सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में किस प्रकार नए और व्यावहारिक दृष्टिकोण सामने आते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

यह सफलता दर्शाती है कि आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक कला और आधुनिक विधिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाने में सक्षम है। जब किशोर उम्र के प्रतिभागी स्टार्टअप और अकादमिक अनुशासन को एक साथ संभालते हैं, तो इससे समाज में यह सकारात्मक संदेश जाता है कि नीति निर्माण और विधिक क्षेत्रों में भविष्य का नेतृत्व ऐसे ही बहुआयामी युवाओं के हाथों में सुरक्षित रहेगा।

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