पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय कलाओं में महारत हासिल करना वर्षों के कठोर अभ्यास और समर्पण की मांग करता है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले की रहने वाली युवा प्रतिभा तनाया यादव ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर लगन पक्की हो तो कला, खेल और उच्च शिक्षा में एक साथ शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य की विधा में सबसे कम आयु में औपचारिक दक्षता हासिल कर एक नया मुकाम तय किया है।
कथक में सबसे कम आयु की संगीत प्रभाकर का कीर्तिमान
प्रयाग संगीत समिति की तरफ से 19 जून 2025 को तनाया यादव की इस औपचारिक योग्यता को विधिवत प्रमाणित किया गया। जब उन्होंने कथक विधा के अंतर्गत संगीत प्रभाकर की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की, तब उनकी उम्र केवल 16 वर्ष 11 महीने 24 दिन दर्ज की गई थी। आमतौर पर संगीत या नृत्य विधा में इस योग्यता को पूरा करने के लिए साधकों को लंबी अवधि तक सिलसिलेवार परीक्षाओं और मंच प्रदर्शनों के कई चरणों को पार करना होता है।
सत्रहवें वर्ष में कदम रखने से पूर्व ही इस स्तर को पूरा करके तनाया इस विषय में सबसे कम उम्र में यह योग्यता पाने वाली शख्सियत बन गई हैं। समाज में अक्सर ऐसी धारणा देखने को मिलती है कि शास्त्रीय साधना या खेल जगत में वक्त लगाने के बाद सामान्य अकादमिक पढ़ाई पर ध्यान देना बेहद कठिन हो जाता है। तनाया के इस रिकॉर्ड ने ऐसी सभी मान्यताओं को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।
जयपुर घराने की परंपरा और मंच की तैयारी
कथक की अपनी गहन यात्रा में तनाया ने जयपुर घराने की समृद्ध परंपरा को चुना और गुरु हरीश गंगानी से इसका विधिवत मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस विशिष्ट घराने की शैली अपनी तीव्र पदचाप, जटिल लयकारी और तेज गति से होने वाले भाव प्रदर्शन के जरिए कथा कहने के लिए विख्यात है।
शुरुआत से ही उनका जोर केवल प्रस्तुति देने पर नहीं, बल्कि शास्त्रीय तकनीक की मजबूती और सैद्धांतिक ज्ञान की समझ को परिपक्व करने पर रहा। भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में शामिल कथक में कदमताल, तालमेल, विभिन्न भाव-भंगिमाओं और लिखित सिद्धांतों पर एक समान पकड़ होना आवश्यक होता है। उनका यह कीर्तिमान किसी जल्दबाजी का नतीजा न होकर नियमित रियाज और शास्त्रीय नियमों के कठोर पालन की परिणति है।
मार्शल आर्ट्स में गोल्ड मेडल और लेखन का सफर
तनाया का अनुशासन सिर्फ शास्त्रीय मंच तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल के मैदान में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2022 के दौरान पंजाब के डिस्ट्रिक्ट स्टेडियम में आयोजित पहली इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय कराटे-डो और किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने काता वर्ग के तहत भाग लिया और स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपनी वैचारिक समझ को पुस्तक का रूप भी दिया। उनकी लिखी किताब ‘कथक: द रिदम ऑफ इनर स्ट्रेंथ’ नाम से अमेज़न पर उपलब्ध है। इस कृति में उन्होंने यह दृष्टिकोण सामने रखा है कि कथक केवल कला प्रदर्शन का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह बच्चों और किशोरों में आंतरिक आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के समग्र विकास का सशक्त जरिया भी बन सकता है।
कानून की पढ़ाई, स्टार्टअप का संचालन और अंतरराष्ट्रीय अनुभव
अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए तनाया पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से 5 वर्षीय बीकॉम एलएलबी (ऑनर्स) की डिग्री ले रही हैं। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कानूनी क्षेत्र में नई पहल करते हुए जून 2026 में ‘लीगल नेक्सस’ की नींव रखी। वह इस स्टार्टअप की संस्थापक और सीईओ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह मंच वकालत के विद्यार्थियों और विधि पेशेवरों को अदालती डायरेक्टरी, ड्राफ्टिंग से जुड़े जरूरी टेम्प्लेट और संदर्भ सामग्री मुहैया कराने का कार्य करता है।
स्वास्थ्य और अनुसंधान के स्तर पर उन्होंने फोर्टिस हॉस्पिटल में मानसिक स्वास्थ्य, उससे जुड़ी बीमारियों के लक्षणों की पहचान और संभावित उपचार के तरीकों पर शोध कार्य भी किया है।
तकनीक और कूटनीतिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। अमेरिकी दूतावास के अंतर्गत आने वाले अमेरिकन सेंटर में इंटर्नशिप करते हुए उन्होंने वैश्विक समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर अपना प्रेजेंटेशन दिया था। वहीं रोबोटिक्स में अपनी रुचि के चलते उन्होंने लेगो घटकों और कस्टम कोडिंग के इस्तेमाल से वर्किंग मॉडल भी तैयार किए।
जनवरी 2023 में तनाया ने नीति आयोग और एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित ग्लोबल क्लाइमेट असेंबली में टीम लीडर की भूमिका निभाई। इसके साथ ही ब्रिटिश काउंसिल और आरआईडीएस की वर्चुअल सम्मेलनों में उन्होंने भारत की ओर से कजाकिस्तान के प्रतिनिधि के रूप में इन्वेंट्री, बजट प्रबंधन और परिधान डिजाइन से जुड़ी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभाला था। उनका यह पूरा सफर साबित करता है कि बहुआयामी प्रतिभा और सही समय प्रबंधन से हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचे जा सकते हैं।























