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राजस्थान में सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल पद से हटाए गए, 40 विला और कॉटेज सौदे को लेकर सरकार ने एपीओ कियाराजस्थान
30 अक्तू॰ 2026, 12:44 am (6 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल पद से हटाए गए, 40 विला और कॉटेज सौदे को लेकर सरकार ने एपीओ किया

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को बड़े पैमाने पर संपत्ति खरीद विवाद के बाद सभी अहम पदों से हटाकर एपीओ कर दिया है। उन पर और उनके परिवार पर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के आरोप हैं।

राजस्थान के प्रशासनिक हलके में एक बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी शिखर अग्रवाल को पद से हटाकर 'अवेइटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स' यानी एपीओ स्थिति में डाल दिया है। वर्ष 1993 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी पर अपने परिवार के साथ मिलकर भारी संख्या में विला और कॉटेज खरीदने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। राज्य के कार्मिक विभाग ने बुधवार देर रात इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से वर्तमान जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया।

प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश

कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिखर अग्रवाल को प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक एपीओ स्थिति में रखा गया है। यह आदेश देर रात जारी किया गया, जिसके बाद राज्य के नौकरशाही गलियारों में हलचल तेज हो गई। शिखर अग्रवाल इस समय अपने बच्चों के पास अमेरिका में मौजूद हैं। वहीं उनकी पत्नी, जो वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं, उनके संदर्भ में राज्य सरकार की तरफ से फिलहाल कोई अलग आदेश जारी नहीं किया गया है।

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कई अहम विभागों और निगमों का संभाल रहे थे प्रभार

इस प्रशासनिक कार्रवाई से ठीक पहले शिखर अग्रवाल राज्य सरकार में कई अत्यंत महत्वपूर्ण पदों की कमान संभाल रहे थे। वे उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई, राज्य उपक्रम और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर तैनात थे। इसके अलावा उनके पास भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी में विशेष कार्याधिकारी का दायित्व भी था।

इतना ही नहीं, अग्रवाल निवेश, अनिवासी राजस्थानी मामले और ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन में भी अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे थे। साथ ही वे राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम यानी रीको के चेयरमैन और राजसिको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पद पर भी कार्यरत थे। पूर्व में वे मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से उनकी पूर्व संबद्धता के कारण इस मामले ने और अधिक प्रशासनिक व सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया है।

ढाई साल में 40 संपत्तियों की खरीद का पूरा मामला

यह सख्त कदम उन खुलासों के बाद उठाया गया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी और उनके परिजनों द्वारा बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट निवेश की बात कही गई थी। इन जानकारियों के मुताबिक, शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी जो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर हैं, उनके दो बेटों और ससुराल पक्ष के लोगों ने मिलकर महज ढाई साल की अवधि में एक ही रियल एस्टेट कंपनी से लगभग 40 विला और कॉटेज खरीदे थे।

एक ही बिल्डर फर्म से इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों के सौदे की बात सामने आने के बाद सार्वजनिक मंचों पर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तुरंत कदम उठाया और इस वरिष्ठ नौकरशाह को उनके सभी शीर्ष पदों से हटाते हुए प्रतीक्षा सूची में डाल दिया।

सवाल-जवाब

राजस्थान सरकार ने किस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की है?
राजस्थान सरकार ने 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ स्थिति में भेज दिया है।
शिखर अग्रवाल पर क्या आरोप लगे हैं?
उन पर और उनके परिवार पर ढाई साल के भीतर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदने के आरोप हैं।
एपीओ किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल किन पदों पर तैनात थे?
वे उद्योग, एमएसएमई, डीएमआईसी, निवेश संवर्धन में अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा रीको चेयरमैन और राजसिको सीएमडी जैसे पदों पर थे।
क्या इस मामले में उनकी आईपीएस पत्नी पर भी कोई आदेश जारी हुआ है?
उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर को लेकर सरकार द्वारा फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
आदेश जारी होने के समय शिखर अग्रवाल कहां मौजूद थे?
आदेश जारी होने के समय शिखर अग्रवाल अपने बच्चों के पास अमेरिका में मौजूद थे।
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