राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुंवारियां थाना क्षेत्र के अंतर्गत झोर गांव से बड़े नुकसान का मामला सामने आया है। यहां कोठारिया ठिकाना की चारागाह भूमि यानी बीड़े में अचानक भड़की लपटों ने प्रचंड रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्होंने चंद मिनटों में एक बहुत बड़े भूभाग को अपनी जद में ले लिया। इस विनाशकारी घटना में लगभग 50 बीघा इलाके में फैला हुआ भारी मात्रा में सूखा चारा पूरी तरह जलकर राख के ढेर में बदल गया। अचानक उठी ऊंची लपटों और धुएं के गुबार को देखकर आसपास की बस्तियों में हड़कंप मच गया और स्थानीय बाशिंदों के बीच अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
दमकल टीमों का मोर्चा और बचाव अभियान
जिस चारागाह में यह अप्रत्याशित हादसा घटा, वह वीरेंद्र सिंह और मुकुंद माधव सिंह दोनों भाइयों का है। बीड़े से धुआं और लपटें उठती देख दोनों भाइयों ने बिना किसी देरी के अग्निशमन विभाग को आपातकालीन सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक अमला और दमकल दस्ता तुरंत सक्रिय हुआ। राजसमंद जिला मुख्यालय के साथ-साथ आमेट केंद्र से भी दमकल की विशेष गाड़ियों को घटनास्थल की ओर रवाना किया गया। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर त्वरित गति से राहत अभियान शुरू किया और आग के फैलाव को रोकने के लिए मोर्चा संभाल लिया।
स्थानीय ग्रामीणों और अग्निशमन कर्मियों का साझा प्रयास
आपदा की इस घड़ी में गांव के लोग भी बड़ी तादाद में एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने विषम परिस्थितियों में असाधारण सूझबूझ और साहस दिखाते हुए राहत कार्य में दमकल दल का पूरा साथ दिया। ग्रामीणों और अग्निशमन कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से पानी की बौछारें डालकर लपटों को सीमित करने के अथक प्रयास किए। हालांकि, सूखे चारे की अत्यधिक मात्रा और हवा के रुख के कारण आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि लपटों को पूरी तरह शांत करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी और स्थिति को सामान्य बनाने में काफी वक्त लगा।
सौर ऊर्जा संयंत्र की वायरिंग को पहुंचा नुकसान
इस अनहोनी ने केवल किसानों के संचित चारे को ही तबाह नहीं किया, बल्कि समीपवर्ती बुनियादी ढांचे को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची लपटें जब पास ही संचालित सौर ऊर्जा संयंत्र की परिधि तक पहुंचीं, तो वहां जमीन पर बिछी हुई विद्युत केबल भी इसकी जद में आकर जल गईं। सोलर प्लांट की मुख्य केबल क्षतिग्रस्त होने की वजह से संयंत्र की परिचालन व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे कुल नुकसान का दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है।
पशुपालकों पर आर्थिक संकट और जांच की प्रक्रिया
सूखे चारे के राख होने तथा तकनीकी उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने के चलते इलाके में लाखों रुपये के वित्तीय नुकसान का अनुमान लगाया गया है। स्थानीय काश्तकारों और पशुपालकों द्वारा अपने पशुधन के भरण-पोषण के लिए महीनों की कड़ी मेहनत से संजोया गया चारा पल भर में नष्ट हो गया। राहत की बात यह रही कि समय रहते राहत कार्य शुरू होने से किसी व्यक्ति या पशु की जान को नुकसान नहीं पहुंचा। इस बीच, आग लगने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासनिक अधिकारी इस बात की विस्तृत छानबीन कर रहे हैं कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण भड़की थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति जिम्मेदार थी।


















