राजस्थान के जालोर में प्रशासनिक महकमे के भीतर एक गंभीर वाकया सामने आया है, जहां जिला परिषद कार्यालय की एक पुरानी आरसीसी छत अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। यह वाकया परिसर के कमरा नंबर 12 में पेश आया, जिसकी जर्जर कंक्रीट छत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर फर्श पर गिर गया और देखते ही देखते पूरा कमरा पत्थरों और सीमेंट के मलबे से पट गया। जिस वक्त यह ढांचा ढहा, उस वक्त अंदर कोई भी मौजूद नहीं था। प्रशासनिक कर्मचारियों की गैरमौजूदगी ने यहां एक बड़ी अनहोनी को होने से टाल दिया, जिससे दफ्तर में मौजूद तमाम लोगों ने राहत की सांस ली।
चुनाव सामग्री के लिए इस्तेमाल होता था कमरा नंबर 12
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इस खास कक्ष का उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और उससे जुड़ी सामग्री को रखने के लिए किया जाता था। कमरे के भीतर निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित खाली बक्से और अन्य जरूरी सामान रखा गया था। नियमों और सुरक्षा प्रबंधों के तहत इस कमरे को 7 सितंबर से पूरी तरह सील करके बंद कर दिया गया था। आधिकारिक रूप से सील लगे होने के कारण पिछले एक महीने से अधिक समय से इस कक्ष के भीतर किसी भी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी का आना-जाना पूरी तरह बंद था। यदि यह कमरा सामान्य दिनों की तरह खुला रहता और निर्वाचन शाखा के कर्मचारी अपनी मेजों पर बैठकर नियमित काम निपटा रहे होते, तो सीधे ऊपर से गिरे मलबे की चपेट में आकर भारी जानी नुकसान हो सकता था।
सुबह दफ्तर पहुंचे कर्मचारियों के उड़े होश
कमरे के चारों तरफ से बंद और सील होने के कारण छत ढहने की आवाज बाहर तक नहीं पहुंच पाई और इस घटना की भनक किसी को तुरंत नहीं लग सकी। सुबह जब जिला परिषद के कर्मचारी और अधिकारी अपनी नियमित ड्यूटी के लिए दफ्तर पहुंचे, तब उन्होंने कमरा नंबर 12 की हालत देखी। खिड़की और दरवाजों के आसपास से जब टूटी हुई छत और अंदर बिखरा भारी मलबा नजर आया, तो वहां मौजूद कर्मियों के होश उड़ गए। पूरा कमरा सीमेंट, सरियों और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था, जिसके नीचे चुनाव से संबंधित रखे गए तमाम खाली बक्से और अन्य सामान पूरी तरह दब गए थे।
मलबे को हटाने और सामान निकालने की कवायद
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई और कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति को संभालने की कवायद शुरू की। कमरे के भीतर गिरे भारी पत्थरों और सीमेंट के मलबे को हटाने के लिए मजदूरों और दफ्तर के कर्मियों को काम पर लगाया गया। काफी देर तक चली मशक्कत के बाद मलबे की परतों को एक-एक करके सावधानीपूर्वक हटाया गया। इसके बाद मलबे के नीचे दबे पड़े चुनाव सामग्री के बक्सों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया ताकि उन्हें होने वाले नुकसान का जायजा लिया जा सके।
सरकारी इमारतों के रखरखाव पर उठे सवाल, अन्य कमरों की जांच शुरू
इस हादसे ने पुराने सरकारी भवनों की कमजोर स्थिति और उनकी समयबद्ध मरम्मत न किए जाने की हकीकत को उजागर कर दिया है। सरकारी दफ्तरों में रोजाना सैकड़ों लोग और कर्मचारी काम करते हैं, ऐसे में जर्जर छतों का इस तरह अचानक गिरना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। इस घटना के बाद जिला परिषद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। ऐहतियात के तौर पर अधिकारियों ने परिषद भवन के बाकी सभी कमरों की तकनीकी और ढांचागत स्थिति की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। तकनीकी टीम अब यह परखने में जुटी है कि परिसर के अन्य कमरे सुरक्षित हैं या नहीं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।





















