भारतीय परंपरा में सात फेरों के पवित्र रिश्ते को सात जन्मों तक का बंधन माना जाता है और अजमेर जिले में घटी एक मार्मिक घटना ने इस अटूट विश्वास को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। जीवनभर सुख और दुख के हर पल में एक-दूसरे की ढाल बनकर रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने इस दुनिया से विदाई लेते वक्त भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। पति की सांसें थमने के महज आधे घंटे के भीतर ही जीवनसंगिनी ने भी अपनी आखिरी सांस ली। इस अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई इस जोड़े के अटूट प्रेम की चर्चा कर रहा है।
यह पूरी घटना अजमेर जिले के मसूदा उपखंड के अंतर्गत आने वाले खटाणा का बाड़िया गांव की है। लंबे समय से आपसी तालमेल और जीवन के हर उतार-चढ़ाव को साझा करने वाले इस बुजुर्ग दंपति की उम्र के इस पड़ाव पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां चल रही थीं, जिसके कारण वे घर पर ही अपना उपचार करवा रहे थे। सोमवार का दिन इस परिवार के लिए वज्रपात बनकर आया जब 80 वर्षीय तेजू गुर्जर का निधन हो गया। पति की मृत्यु का यह आघात उनकी 77 वर्षीय पत्नी गणेशी देवी सहन नहीं कर सकीं और पति के शरीर छोड़ने के ठीक तीस मिनट बाद ही उन्होंने भी इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
गांव वालों की मौजूदगी में एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
एक ही घर से कुछ ही मिनटों के अंतराल पर पति-पत्नी की अर्थियां उठते देख पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। परिजनों, रिश्तेदारों और स्थानीय ग्रामीणों ने भारी मन से इस जोड़े को अंतिम विदाई दी। दोनों के पार्थिव शरीर को एक ही चिता पर रखकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों का कहना था कि तेजू गुर्जर और गणेशी देवी ने अपनी पूरी जिंदगी जिस तरह से एक-दूसरे का हाथ थामकर बिताई, ठीक उसी तरह विदाई के वक्त भी दोनों ने एक ही सफर को चुना। इस घटना ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार उम्र की आखिरी दहलीज तक कैसे साथ निभाता है।
राजस्थान के जालोर जिले में भी सामने आ चुकी है ऐसी ही घटना
दिल को छू लेने वाली इस तरह की घटनाएं राजस्थान में हाल ही के दिनों में दोबारा देखने को मिली हैं। अजमेर की इस घटना से ठीक तीन दिन पहले जालोर जिले के भवरानी गांव में भी ऐसा ही वाकया सामने आया था। वहां 90 वर्षीय पुनीदेवी का निधन हुआ था, जिसके बाद उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम को गहरा सदमा लगा था। पत्नी की मौत के गम में वह पूरी तरह गुमसुम हो गए और महज एक घंटे के भीतर ही उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। ग्रामीणों के अनुसार वे दोनों काफी मिलनसार स्वभाव के थे और इस ढलती उम्र में भी शारीरिक रूप से स्वस्थ बने हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने आम जनमानस को गहराई से झकझोर कर रख दिया है।





















