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अजमेर में एक साथ उठी बुजुर्ग दंपति की अर्थियां, पति के निधन के महज 30 मिनट बाद पत्नी ने भी तोड़ा दमराजस्थान
25 अग॰ 2026, 12:20 pm (2 घंटे पहले)· 1

अजमेर में एक साथ उठी बुजुर्ग दंपति की अर्थियां, पति के निधन के महज 30 मिनट बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम

अजमेर के मसूदा उपखंड में एक बुजुर्ग दंपति ने जीवन के हर पड़ाव की तरह आखिरी सफर में भी साथ नहीं छोड़ा। पति तेजू गुर्जर की मौत के आधे घंटे बाद ही पत्नी गणेशी देवी ने भी प्राण त्याग दिए और दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार हुआ।

भारतीय परंपरा में सात फेरों के पवित्र रिश्ते को सात जन्मों तक का बंधन माना जाता है और अजमेर जिले में घटी एक मार्मिक घटना ने इस अटूट विश्वास को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। जीवनभर सुख और दुख के हर पल में एक-दूसरे की ढाल बनकर रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने इस दुनिया से विदाई लेते वक्त भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। पति की सांसें थमने के महज आधे घंटे के भीतर ही जीवनसंगिनी ने भी अपनी आखिरी सांस ली। इस अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई इस जोड़े के अटूट प्रेम की चर्चा कर रहा है।

यह पूरी घटना अजमेर जिले के मसूदा उपखंड के अंतर्गत आने वाले खटाणा का बाड़िया गांव की है। लंबे समय से आपसी तालमेल और जीवन के हर उतार-चढ़ाव को साझा करने वाले इस बुजुर्ग दंपति की उम्र के इस पड़ाव पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां चल रही थीं, जिसके कारण वे घर पर ही अपना उपचार करवा रहे थे। सोमवार का दिन इस परिवार के लिए वज्रपात बनकर आया जब 80 वर्षीय तेजू गुर्जर का निधन हो गया। पति की मृत्यु का यह आघात उनकी 77 वर्षीय पत्नी गणेशी देवी सहन नहीं कर सकीं और पति के शरीर छोड़ने के ठीक तीस मिनट बाद ही उन्होंने भी इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

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गांव वालों की मौजूदगी में एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार

एक ही घर से कुछ ही मिनटों के अंतराल पर पति-पत्नी की अर्थियां उठते देख पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। परिजनों, रिश्तेदारों और स्थानीय ग्रामीणों ने भारी मन से इस जोड़े को अंतिम विदाई दी। दोनों के पार्थिव शरीर को एक ही चिता पर रखकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों का कहना था कि तेजू गुर्जर और गणेशी देवी ने अपनी पूरी जिंदगी जिस तरह से एक-दूसरे का हाथ थामकर बिताई, ठीक उसी तरह विदाई के वक्त भी दोनों ने एक ही सफर को चुना। इस घटना ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार उम्र की आखिरी दहलीज तक कैसे साथ निभाता है।

राजस्थान के जालोर जिले में भी सामने आ चुकी है ऐसी ही घटना

दिल को छू लेने वाली इस तरह की घटनाएं राजस्थान में हाल ही के दिनों में दोबारा देखने को मिली हैं। अजमेर की इस घटना से ठीक तीन दिन पहले जालोर जिले के भवरानी गांव में भी ऐसा ही वाकया सामने आया था। वहां 90 वर्षीय पुनीदेवी का निधन हुआ था, जिसके बाद उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम को गहरा सदमा लगा था। पत्नी की मौत के गम में वह पूरी तरह गुमसुम हो गए और महज एक घंटे के भीतर ही उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। ग्रामीणों के अनुसार वे दोनों काफी मिलनसार स्वभाव के थे और इस ढलती उम्र में भी शारीरिक रूप से स्वस्थ बने हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने आम जनमानस को गहराई से झकझोर कर रख दिया है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस जिले में घटी?
यह घटना अजमेर जिले के मसूदा उपखंड के खटाणा का बाड़िया गांव में घटी।
पति-पत्नी की मौत में कितने समय का अंतराल था?
पति तेजू गुर्जर की मौत के महज आधे घंटे बाद उनकी पत्नी गणेशी देवी ने भी प्राण त्याग दिए।
दोनों का अंतिम संस्कार किस प्रकार किया गया?
दंपति का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर एक साथ किया गया।
ऐसी ही मिलती-जुलती घटना राजस्थान के किस अन्य जिले में हुई थी?
इससे पहले जालोर जिले के भवरानी गांव में भी एक बुजुर्ग दंपति का कुछ ही घंटों के अंतराल में एक साथ निधन हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

अजमेर और जालोर की इन घटनाओं ने यह दर्शाया है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर मानसिक आघात और गहरा शोक शारीरिक स्वास्थ्य को किस हद तक प्रभावित कर सकता है। यद्यपि ये मामले मार्मिक प्रेम के प्रतीक के रूप में चर्चा में हैं, लेकिन वृद्ध दंपतियों में एक साथी की मृत्यु के बाद तीव्र अवसाद और मेडिकल शॉक के मामलों पर चिकित्सा जगत और समाज को संवेदनशीलता से विचार करने की आवश्यकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·26 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस आयु वर्ग के लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली लगभग नगण्य है। इस तरह के मामलों में 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' या अचानक आने वाले मेडिकल शॉक को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविरों और परामर्श सेवाओं का होना बहुत जरूरी है, ताकि उम्र के इस पड़ाव पर आघात झेल रहे बुजुर्गों को समय पर मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय संबल मिल सके।

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