राजस्थान के चूरू जिले में स्थित सुजानगढ़ के राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल (जनाना अस्पताल) में बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार के बरामदे की जर्जर छत का एक भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। इस दौरान वहां से गुजर रही एक महिला प्लास्टर और सीमेंट के मलबे की चपेट में आ गई, जिससे वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। यह पूरी घटना अस्पताल परिसर में स्थापित सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है।
अचानक गिरे मलबे से मच गई अफरा-तफरी, महिला के सिर पर आए दो टांके
यह घटना बुधवार दोपहर लगभग 1:18 बजे घटित हुई। बरामदे की छत से सीमेंट युक्त भारी प्लास्टर अचानक नीचे गिरते ही अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों और वहां उपस्थित अन्य लोगों ने तत्परता दिखाई और घायल महिला को तुरंत अस्पताल के भीतर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम ने फौरन उसका प्राथमिक इलाज शुरू किया।
अस्पताल प्रभारी डॉक्टर बंशीधर के अनुसार घायल महिला की पहचान सुजानगढ़ के गुलेरिया निवासी 25 वर्षीय किरण मेघवाल के रूप में की गई है। किरण अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं और बुधवार को किसी कार्य से अस्पताल आई थीं। जैसे ही वह अपना काम पूरा करके मुख्य द्वार के बरामदे से बाहर निकल रही थीं, उसी समय छत का पपड़ीदार प्लास्टर सीमेंट समेत सीधे उनके सिर पर आ गिरा। इस हादसे में किरण के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके इलाज के लिए डॉक्टरों को दो टांके लगाने पड़े। जरूरी उपचार और देखभाल प्रदान करने के उपरांत उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया, ताकि कोई अन्य व्यक्ति उस खतरनाक और संवेदनशील हिस्से की तरफ न जा सके।
हादसे से एक दिन पहले ही पीडब्ल्यूडी को भेजा गया था पत्र
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि दुर्घटना से महज एक दिन पहले यानी 4 अगस्त को ही अस्पताल प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को पत्र लिखकर भवन की खस्ताहाल स्थिति से अवगत कराया था। अस्पताल प्रभारी डॉक्टर बंशीधर ने बताया कि इलाके में लगातार हो रही बारिश के कारण छतों में भारी सीलन आ गई थी, जिसके चलते बरामदे सहित कई हिस्सों की स्थिति बहुत खराब हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन ने संभावित दुर्घटना का अंदेशा जताते हुए पीडब्ल्यूडी से तुरंत मरम्मत कराने की मांग की थी। इसके बावजूद समय रहते कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया और अगले ही दिन यह हादसा हो गया।
टीकाकरण कक्ष और कमरा नंबर 1 सहित कई हिस्से जर्जर
अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी है कि केवल मुख्य बरामदा ही नहीं, बल्कि अस्पताल परिसर के अंदर स्थित कमरा नंबर-1, टीकाकरण कक्ष और कई अन्य कमरों की छतें भी जर्जर अवस्था में हैं। इनमें से कमरा नंबर-1 की छत का एक हिस्सा पूर्व में ही गिर चुका है, जिससे मरीजों, उनके साथ आए परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यह घटना सरकारी अस्पतालों की इमारतों की देखरेख में प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े करती है। यदि हादसे के समय मुख्य बरामदे में अधिक मरीज या गर्भवती महिलाएं उपस्थित होतीं, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती थी।



















