राजस्थान में पाली जिले के रानी थाना क्षेत्र अंतर्गत नाडोल स्थित सरकारी अस्पताल में रविवार देर रात एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बच गया। अस्पताल की मुख्य इमारत के केंद्रीय हॉल में लगी प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी की छत का एक विशाल हिस्सा अचानक भरभराकर जमीन पर आ गिरा। तेज आवाज के साथ हुए इस घटनाक्रम के दौरान गनीमत यह रही कि हॉल में न तो कोई उपचाराधीन मरीज था और न ही कोई ड्यूटी स्टाफ वहां मौजूद था। देर रात होने की वजह से हॉल पूरी तरह खाली था, जिससे किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई, हालांकि सुबह जब कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे तो बिखरा मलबा देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
सन्नाटे के बीच गिरी छत और सुबह दिखा मलबे का ढेर
रविवार रात जब यह घटना घटी, तब चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक अस्पताल के मुख्य हॉल की छत से भारी मात्रा में पीओपी का हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। सुबह जब अस्पताल कर्मी और सफाई कर्मचारी नियमित कार्य के लिए पहुंचे, तो पूरा फर्श मलबे, धूल और टूटे हुए प्लास्टर के टुकड़ों से भरा पड़ा था। फर्श पर फैले भारी मलबे को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि यदि यह दुर्घटना दिन के समय हुई होती, जब पंजीकरण काउंटर और प्रतीक्षालय में मरीजों व तीमारदारों की भारी भीड़ जुटती है, तो इसका परिणाम कितना गंभीर और भयावह हो सकता था।
चिकित्सक ने तुरंत बंद कराया मुख्य द्वार, दूसरी तरफ से दी गई एंट्री
मामले की जानकारी मिलते ही उस दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. गोपाल कुमार ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांपते हुए सुरक्षात्मक कदम उठाए। किसी भी भावी अनहोनी अथवा आगे मलबा गिरने के खतरे को टालने के लिए उन्होंने अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार तत्काल बंद करवा दिया। इसके पश्चात अस्पताल में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सा कर्मियों के आवागमन के लिए एंबुलेंस पार्किंग के निकट बने वैकल्पिक द्वार को खोला गया।
डॉ. गोपाल कुमार ने इस संबंध में बताया कि पूरे घटनाक्रम की अधिकृत सूचना विभाग के उच्चाधिकारियों और संबंधित प्रशासनिक महकमे को तुरंत प्रेषित कर दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गिरे हुए मलबे को सुरक्षित हटाने और क्षतिग्रस्त छत की शीघ्र मरम्मत करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उपचार कार्य सुचारू रहे और आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सरपंच और प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर जताई नाराजगी
सरकारी अस्पताल में छत गिरने की खबर जैसे ही नाडोल कस्बे में फैली, स्थानीय बाशिंदों में रोष व्याप्त हो गया। जानकारी मिलते ही नाडोल के सरपंच टीकमचंद मेघवाल और ग्राम पंचायत कोरम के अनेक सदस्य अस्पताल पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने क्षतिग्रस्त हॉल का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और अस्पताल परिसर की जर्जर व्यवस्थाओं की पड़ताल की। मौके पर मौजूद प्रतिनिधियों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि यदि भवन निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता का सही ध्यान रखा जाता और समय पर संरचनात्मक रखरखाव किया गया होता, तो यह नौबत कभी नहीं आती।
दीवारों में दरारें और उखड़ती टाइलें बयां कर रही हैं अनदेखी की दास्तान
स्थानीय नागरिकों के अनुसार अस्पताल की बदहाली केवल छत के प्लास्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इमारत ही उपेक्षा का शिकार दिखाई देती है। परिसर की बाहरी और भीतरी दीवारों की हालत लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद से दीवारों पर लगाई गई टाइलें ढीली होकर नीचे गिरने लगी थीं। इसके साथ ही अस्पताल के निर्माण में आर्थिक सहयोग देने वाले दानदाता भामाशाहों की स्मृति पट्टिकाएं और अस्पताल के प्रमुख साइन बोर्ड भी टूटी-फूटी हालत में अपनी बदहाली दर्शा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से फिलहाल अस्पताल का मुख्य द्वार अनिश्चितकाल के लिए बंद रखा गया है और सभी लोग एंबुलेंस पार्किंग के पास वाले वैकल्पिक रास्ते से ही अस्पताल में प्रवेश कर रहे हैं।


















