अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में मानसून के आगमन में हो रही देरी को देखते हुए स्थानीय लोगों ने एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान 'पर्जन्य यज्ञ' का आयोजन किया है। इस आयोजन के दौरान लोगों ने भीषण गर्मी के बीच पानी से भरे बड़े पात्रों में बैठकर वरुण देव से वर्षा की गुहार लगाई। पूरे अनुष्ठान की देखरेख गिरीश कुमार पंडित की अगुवाई में संपन्न हुई।
यज्ञ की मान्यता और परंपरा
इस अनुष्ठान के पीछे की मान्यता को समझाते हुए गिरीश कुमार पंडित ने बताया कि जब बारिश की कमी होती है, तब इस पद्धति का सहारा लिया जाता है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि राजाओं को वर्षा के लिए इसी यज्ञ का सुझाव देते थे। प्रक्रिया के अनुसार, श्रद्धालु पानी के बड़े बर्तनों में बैठकर भगवान के सामने बारिश के लिए प्रार्थना करते हैं। उनका मानना है कि यदि मन में अटूट श्रद्धा हो, तो वरुण देव अवश्य प्रसन्न होते हैं और वर्षा का मार्ग प्रशस्त होता है।
क्यों पड़ा यज्ञ करने का असर
यज्ञ में सम्मिलित हुए अमित पांड्या ने मानसून के समय को लेकर अपनी चिंता साझा की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर गुजरात में 12 से 13 जून के दौरान बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मानसून ने काफी विलंब किया है। चिलचिलाती धूप और उमस से आमजन बेहाल हैं। शास्त्रों में वर्णित विधियों का पालन करते हुए स्थानीय लोगों ने यह आयोजन किया है, ताकि प्रकृति का संतुलन वापस लौट सके।
प्राणियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना
एक अन्य प्रतिभागी हिमांशु त्रिवेदी का कहना है कि हर साल 15 जून के आसपास तक बारिश हो जाती थी, परंतु इस बार स्थिति अलग है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जल संकट गहरा सकता है। यह केवल मनुष्यों की बात नहीं है, बल्कि पशु-पक्षी भी पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हो रहे हैं। वरुण देव से पूरे देश में सुख-शांति और अच्छी वर्षा के लिए प्रार्थना की गई है। वैदिक साहित्य में पर्जन्य का अर्थ वर्षा के देवता से है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए मंत्रों और यज्ञों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। सूखे से बचाव के लिए इसे अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।













