विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की ग्रीस की विदा हो रही राजदूत से मुलाकात, मजबूत रिश्तों की तारीफदशहरा पर इन सात राशियों की चमकेगी किस्मत, सूर्य, गुरु, शुक्र, बुध, मंगल, शनि और चंद्रमा की स्थिति से होगी धन वर्षामुंबई के जुहू में गोलीबारी के शिकार हुए टाइगर श्रॉफ, पिता जैकी ने प्रशंसकों को दिया सेहत का भरोसामेक्सिको तट पर हरिकेन ट्रुडी का भीषण प्रहार, प्रशांत महासागर में चांपी के बाद मंडराया नया संकटअमेरिकी शेयर बाजार 19 अक्टूबर को खुला रहेगा, जानिए पूरे हफ्ते का अहम रुखरूसी धरती पर गुप्त नेटवर्क की मदद से सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा यूक्रेनविजयादशमी 2026 की तारीख को लेकर उलझन दूर, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का सटीक समयपहले प्रयास में 21 की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर आईपीएस बनीं उर्मी सिन्हा, आंध्र प्रदेश कैडर में मिली तैनातीग्लोबल फाइनेंस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को लगातार दूसरी बार चुना दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कंज्यूमर बैंककिफायती फैशन के लिए मशहूर हुआ जमशेदपुर का एसएनपी मार्केट, छात्राओं को मिल रही सरोजिनी नगर जैसी वैरायटी
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की उपासना से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिए पौराणिक कथा और पूजन विधिधर्म
19 अक्तू॰ 2026, 9:20 am (11 घंटे पहले)· 0

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की उपासना से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिए पौराणिक कथा और पूजन विधि

शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। जानिए देवी के दिव्य स्वरूप, अर्धनारीश्वर की पौराणिक कथा, आठ सिद्धियों और कन्या पूजन के विशेष नियमों के बारे में।

शारदीय नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन महानवमी के रूप में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। 19 अक्टूबर 2026 को पड़ने वाली इस पावन तिथि पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप देवी सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। सिद्धिदात्री दो शब्दों के मेल से बना है, जिसमें सिद्धि का आशय अलौकिक शक्तियों से है और दात्री का तात्पर्य देने वाली देवी से है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, ब्रह्मांड में कुल आठ प्रकार की अलौकिक सिद्धियां मानी गई हैं, जिनमें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से भगवती के इस स्वरूप की आराधना करने वाले साधकों को ये समस्त सिद्धियां सहज रूप से प्राप्त हो जाती हैं।

देवी सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप और आयुध

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत भव्य, शांत और ममतामयी है। देवी लाल रंग के सुंदर वस्त्र धारण करती हैं और खिले हुए कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं। मां की चार भुजाएं हैं, जिनमें वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और शुभ प्रतीक धारण करती हैं। देवी के दाहिनी तरफ के ऊपर वाले हाथ में शंख और नीचे वाले हाथ में पवित्र कमल का पुष्प सुशोभित है। वहीं उनके बाईं तरफ ऊपर वाले हाथ में सुदर्शन चक्र और नीचे वाले हाथ में गदा विद्यमान है। मां का यह चतुर्भुज स्वरूप भक्तों को अभय प्रदान करने के साथ-साथ सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख देने वाला माना गया है।

ये भी पढ़ें

सृष्टि के आरंभ और अर्धनारीश्वर स्वरूप की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की रचना से पूर्व चारों ओर केवल घना अंधकार छाया हुआ था और चराचर जगत का अस्तित्व नहीं था। उस समय भगवान शिव ने इस विशाल ब्रह्मांड के निर्माण और संचालन हेतु सर्वोच्च देवी आदि शक्ति की अत्यंत कठिन तपस्या की। भगवान शिव की युगों तक चली कठोर साधना से प्रसन्न होकर आदिशक्ति दो रूपों में प्रकट हुईं, जिनमें से एक दिव्य रूप मां सिद्धिदात्री का था। देवी सिद्धिदात्री की कृपा से ही महादेव को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी आठों दिव्य सिद्धियां प्राप्त हुईं।

माता सिद्धिदात्री के अनुग्रह से भगवान शिव का आधा शरीर देवी के रूप में परिवर्तित हो गया, जबकि आधा शरीर शिव रूप में ही रहा। इसी अलौकिक घटना के पश्चात भगवान शिव संसार में अर्धनारीश्वर नाम से विख्यात हुए। यह स्वरूप संपूर्ण जगत को यह गूढ़ संदेश देता है कि शिव और शक्ति परस्पर अभिन्न हैं और एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। सृष्टि का निर्माण, संतुलन और संचालन केवल पुरुष और प्रकृति के एकाकार होने से ही संभव होता है।

महानवमी पर कन्या पूजन और विशेष भोग

महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की साधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इसे कई क्षेत्रों में कंजक पूजा भी कहा जाता है, जिसमें छोटी बालिकाओं को साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप मानकर आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। नवमी तिथि पर माता को काले चने, हलवा, पूरी और खीर का पारंपरिक नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इस पावन प्रसाद को तैयार करने के पश्चात सबसे पहले मां सिद्धिदात्री को भोग लगाया जाता है और फिर कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

पूजा में मां सिद्धिदात्री को कमल, चंपा या गुड़हल के ताजे पुष्प अर्पित करने से साधक के घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। इसके साथ ही इस दिन की पूजा में गुलाबी रंग का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। गुलाबी रंग प्रेम, सौम्यता और नारीत्व की गरिमा का प्रतीक है। महानवमी पर इस रंग के वस्त्र पहनकर या पूजा स्थल पर इस रंग का प्रयोग करके साधना करने से पारिवारिक जीवन में सौहार्द बढ़ता है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।

सवाल-जवाब

शारदीय नवरात्रि 2026 में महानवमी किस दिन मनाई जा रही है?
शारदीय नवरात्रि 2026 की महानवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है।
मां सिद्धिदात्री किन आठ सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं?
मार्कंडेय पुराण के अनुसार, वे अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व नामक आठ सिद्धियां प्रदान करती हैं।
भगवान शिव को अर्धनारीश्वर क्यों कहा जाता है?
मां सिद्धिदात्री की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी के स्वरूप में परिणत हो गया था, जिसके बाद वे अर्धनारीश्वर कहलाए।
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री और कन्याओं को क्या भोग लगाया जाता है?
इस दिन काले चने, सूजी का हलवा, पूरी और खीर का पारंपरिक भोग देवी को अर्पित कर कन्याओं को खिलाया जाता है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा में कौन से पुष्प और रंग शुभ माने जाते हैं?
देवी को चंपा, कमल या गुड़हल का फूल प्रिय है, और पूजा में गुलाबी रंग को अत्यंत शुभ व मंगलकारी माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp