मेवाड़ अंचल के प्रमुख आस्था केंद्र श्री जोगणिया माता धाम में शारदीय नवरात्र पर्व का शुभारंभ अत्यंत उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र ध्वजारोहण और शुभ घटस्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक उत्सव का विधिवत आरंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही परिसर में लगने वाले वार्षिक मेले की गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। उद्घाटन के अवसर पर पास के पवित्र सरोवर से मंदिर तक एक भव्य और विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें पारंपरिक ढोल और बैंड बाजों की थाप पर जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्य गर्भगृह के साथ-साथ परिसर में स्थित चौंसठ योगिनी और भगवान शिव के देवालयों में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष महाआरती एवं पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
दूर-दराज के राज्यों से जुटती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
जोगणिया माता धाम की महत्ता केवल भीलवाड़ा अथवा चित्तौड़गढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण राजस्थान और पड़ोसी मध्य प्रदेश से भी लाखों भक्तजन यहां मनोकामनाएं लेकर शीश नवाने पहुंचते हैं। समूचे मेवाड़ क्षेत्र में यह पीठ अपनी अलौकिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए विख्यात है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले आगंतुकों के विश्वास के कारण नवरात्र के पावन दिनों में यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है। पूरे मंदिर क्षेत्र को मनमोहक रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक बिजली की लड़ियों से सुसज्जित किया गया है, जिससे शाम होते ही पूरा परिसर प्रकाशमान नजर आता है।
धार्मिक अनुष्ठानों की लंबी श्रृंखला और 20 अक्टूबर तक आयोजन
आगामी दिनों में आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों का ब्योरा साझा करते हुए श्री जोगणिया माता शक्ति पीठ प्रबंध एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
"नवरात्रि महोत्सव के साथ मेले का भी शुभारंभ हो गया है।"
अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी के अनुसार, उत्सव के दौरान माता का नित्य नूतन भव्य श्रृंगार किया जाएगा और प्रतिदिन दोनों पहर विधिपूर्वक महाआरती की जाएगी। नौ दिवसीय अवधि में विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें श्रीमद् देवी भागवत कथा का वाचन, अखंड रामायण का पाठ, पंच कुंडीय महायज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ तथा गायत्री यज्ञ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त संध्याकालीन बेला में प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भजन संध्या, धर्मोपदेश और मर्यादा पुरुषोत्तम की जीवन लीला पर आधारित रामलीला का मंचन किया जाएगा। यह समूचा आध्यात्मिक उत्सव 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से संपन्न होगा।
भक्तों की सुविधा के पुख्ता इंतजाम और दुर्गाष्टमी पर रात्रि दर्शन
विशाल संख्या में एकत्र होने वाले जनसमूह को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन समिति ने व्यापक प्रबंध किए हैं। परिसर में सुचारु दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ वाहनों की सुरक्षित पार्किंग, यात्रियों के ठहरने के लिए विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल, सुलभ भोजन व्यवस्था तथा निरंतर विद्युत आपूर्ति के ठोस बंदोबस्त किए गए हैं, जिससे किसी भी दर्शनार्थी को असुविधा का सामना न करना पड़े। पर्व के अत्यंत विशिष्ट अवसर यानी दुर्गा अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट रातभर खुले रहेंगे, ताकि हर कोई सुगमता से माता के दर्शन कर सके। वहीं आगामी विजयादशमी के पावन पर्व पर दशहरा उत्सव धूमधाम से आयोजित किया जाएगा।
एक ही प्रांगण में चौंसठ देवियों की अनुपम मूर्तियां
इस प्राचीन शक्तिपीठ की सबसे अनूठी विशेषता यहां स्थापित असंख्य देवियों के विग्रह हैं, जहां चौंसठ जोगणिया स्वरूपों के दर्शन एक ही स्थान पर सुलभ होते हैं। इनमें राष्ट्र की अधिष्ठात्री भारत माता, मां शैलपुत्री, मां महागौरी और माता कालरात्रि के स्वरूप विराजमान हैं। इसके अलावा संगीतमय स्वरूपों में वीणा वादिनी, मृदंग वादिनी तथा शहनाई वादिनी के विग्रह स्थापित हैं। मंदिर में मां चामुंडा, माता भद्रकाली, माता धूमावती, माता ब्राह्मी, माता ज्वालामुखी, मां गंधारी, मां अघोर, माता सूर्यपुत्री, माता वायु वीणा, माता वायु वेगा, माता सर्वमंगला, माता अजीता, मां गंगा, यमुना, माता उमा, माता काली, माता नारायणी, मां चंद्र कांति, माता समुद्र, मां मूर्ति, आयोगनी मां, माता स्तुति, गटाबरी माता, कामायनी माता, अंबिका मां, महेश्वरी माता, कावेरी माता, रात्रि माता और मां कंकाड़ी सहित कई दिव्य स्वरूपों की मूर्तियां स्थापित हैं, जिनके दर्शन कर श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।


















