हैदराबाद के जुड़वां शहर सिकंदराबाद में तिरुमलघिरी स्थित एमसीईएमई रोड पर बना नाग देवता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आंध्र प्रदेश के विख्यात श्रीकालहस्ती मंदिर के बाद तेलंगाना के इस धाम को भक्त अत्यंत सिद्ध और प्रभावशाली पीठ मानते हैं। आम दिनों के साथ विशेष पर्वों पर भी यहां अपनी परेशानियों और कुंडली के दोषों से राहत पाने के लिए भक्तों का भारी जमावड़ा दिखाई देता है।
पांच दशकों से अधिक पुरानी आध्यात्मिक विरासत
इस पवित्र स्थल का इतिहास पांच से छह दशक पुराना है। मंदिर परिसर के सचिव नारायण जी के अनुसार, इस मंदिर की नींव लगभग 50 से 60 वर्ष पहले श्री जयलक्ष्मी अम्मावारु ने रखी थी। उन्होंने यहां गहन आध्यात्मिक साधना और सेवा की एक सुदृढ़ परंपरा शुरू की। उनकी इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी पुत्री श्री शशिकला अम्मावारु ने मंदिर के प्रबंधन और देखरेख का कार्यभार संभाला। वर्तमान समय में जयलक्ष्मी अम्मावारु की सबसे छोटी पुत्री चित्रम्मा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करती हैं और उन्हें अपना आशीर्वाद देती हैं।
सैकड़ों प्रतिमाएं और लाल पोटलियों में बंधी मन्नतें
मंदिर परिसर के भीतर कदम रखते ही श्रद्धालुओं को चारों तरफ स्थापित सैकड़ों नाग प्रतिमाएं नजर आती हैं। स्थानीय आस्था के अनुसार, जिन लोगों की मुरादें पूरी हो जाती हैं, वे कृतज्ञता प्रकट करते हुए परिसर में नई नाग प्रतिमा की प्रतिष्ठा करवाते हैं। इसी प्रकार मंदिर की छत के निकट अनगिनत लाल पोटलियां बंधी दिखाई देती हैं, जो भक्तों द्वारा मांगी गई भिन्न-भिन्न मन्नतों का प्रतीक मानी जाती हैं।
दीवार पर सिक्का टिकाने की परीक्षा और मान्यता
मंदिर के भीतर एक और विशेष और रोचक परंपरा प्रचलित है, जिसमें श्रद्धालु मंदिर के चबूतरे या दीवार पर सिक्का चिपकाने का प्रयास करते हैं। भक्त दीवार की सतह पर कुछ पलों तक शांत मन और धैर्य से सिक्का दबाकर रखते हैं। लोक विश्वास के अनुसार, यदि सिक्का दीवार पर बिना गिरे चिपक जाता है, तो माना जाता है कि श्रद्धालु की मांगी गई मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होगी।
दोष निवारण अनुष्ठान और परिसर का कायाकल्प
ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर, जन्मकुंडली में मौजूद कालसर्प दोष अथवा मंगल दोष के असर को शांत करने के उद्देश्य से यहां विशेष अनुष्ठान और पूजा की जाती है। हर वर्ष नाग पंचमी के पावन पर्व पर मंदिर में बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन और भव्य नाग देवता कल्याणम संपन्न कराया जाता है। मंदिर परिसर के बाहर मौजूद शांत जलाशय और आसपास का शांत वातावरण यहां पहुंचने वाले लोगों को आत्मिक सुकून देता है। इस धार्मिक केंद्र के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में इसके जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है, जिससे इस प्राचीन धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।


















