इंसान की हथेली में रेखाओं के विस्तृत संजाल के साथ-साथ कई विशेष प्राकृतिक आकृतियां भी दिखाई देती हैं, जो व्यक्ति के आचरण, योग्यता और आने वाले कल की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। समुद्र शास्त्र और हस्तरेखा अध्ययन में कुछ ऐसे दुर्लभ प्रतीकों का उल्लेख मिलता है, जिनकी मौजूदगी साधारण हथेलियों में कम ही देखने को मिलती है। इन्हीं में से एक अत्यंत मंगलकारी और विलक्षण प्रतीक जौ अथवा यव की आकृति का होता है। मान्यता है कि यह विशेष संरचना केवल उन्हीं लोगों के हाथों में उभरती है जिनके जीवन में विशेष योग लिखे होते हैं।
अंगूठे के मध्य भाग में यव आकृति की विशिष्ट स्थिति
हस्तरेखा सिद्धांतों के अनुसार जब किसी व्यक्ति के अंगूठे के पोरों के ठीक बीच में जौ के दाने जैसी अंडाकार बंद रेखा निर्मित होती है, तो उसे विशेष भाग्य का परिचायक माना जाता है। इस चिह्न की बनावट जितनी सुस्पष्ट, अटूट और गहरी होगी, व्यक्ति की आंतरिक सामर्थ्य और भाग्यबल उतना ही सशक्त माना जाता है। रेखाओं का आपस में मिलकर एक स्पष्ट दाने का रूप धारण करना यह प्रकट करता है कि जातक को प्राकृतिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसके विपरीत यदि यह आकृति कटी-फटी या अस्पष्ट हो, तो उसके प्रभाव में आंशिक बदलाव देखने को मिलता है।
जीवन के विविध क्षेत्रों पर यव चिह्न का प्रभाव
अंगूठे पर यह पवित्र बनावट होने से व्यक्ति के जीवन में कई अनुकूल परिवर्तन और विशेषताएं परिलक्षित होती हैं
- धार्मिक विश्वास के अनुसार जिन जातकों के अंगूठे पर यह रेखा साफ दिखाई देती है, उन पर देवी भगवती की असीम अनुकंपा सदैव बनी रहती है।
- ऐसे व्यक्तियों में स्वाभाविक तौर पर प्रखर बुद्धिमत्ता, विश्लेषणात्मक समझ और असाधारण परिश्रम करने की क्षमता पाई जाती है।
- आर्थिक दृष्टि से ऐसे लोगों को जीवनभर धन-संपत्ति, भौतिक सुख-साधनों और ऐश्वर्य का भरपूर सहयोग प्राप्त होता है।
- यह रेखा न केवल संचित पूंजी में वृद्धि करती है, बल्कि समाज के भीतर व्यक्ति को व्यापक कीर्ति, प्रतिष्ठा और सम्मान भी दिलाती है।
- जिस भी उद्यम, व्यापार अथवा कार्यक्षेत्र में ये कदम बढ़ाते हैं, वहां अपनी लगन और सूझबूझ के दम पर उल्लेखनीय मुकाम हासिल करते हैं।
- उद्योग, व्यापार अथवा उच्च प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर ऐसे लोग अपनी विलक्षण कार्यशैली का परिचय देते हैं।
- घरेलू स्तर पर भी इनका जीवन अत्यधिक मधुर, सौहार्दपूर्ण और वैवाहिक सुख से परिपूर्ण व्यतीत होता है।
युवावस्था में आर्थिक स्वावलंबन और अन्य उंगलियों पर इसका प्रभाव
हाथ में इस चिह्न के स्पष्ट रूप से विद्यमान होने पर व्यक्ति बहुत कम आयु में ही अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के बलबूते बड़ी उपलब्धियां तथा धन अर्जित करने में सफल रहता है। ऐसे लोग अल्पायु में ही वित्तीय रूप से स्वतंत्र होकर समाज के भीतर अपनी एक स्वतंत्र और प्रतिष्ठित पहचान स्थापित कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त हस्तरेखा शास्त्र में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि जौ अथवा यव जैसी यह शुभ आकृति तर्जनी उंगली या मध्यमा उंगली के मूल भाग यानी पर्वत क्षेत्र में निर्मित हो रही हो, तो व्यक्ति को स्थायी संपत्तियों, उत्कृष्ट भवनों और श्रेष्ठ वाहनों का पूर्ण सुख सहजता से प्राप्त होता है, साथ ही उनका दांपत्य जीवन भी निरंतर आनंदमय बना रहता है।



















