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सावन के पहले सोमवार पर मथुरा के भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह से लगी भक्तों की लंबी कतारेंधर्म
3 अग॰ 2026, 4:28 pm (12 दिन पहले)· 1

सावन के पहले सोमवार पर मथुरा के भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह से लगी भक्तों की लंबी कतारें

श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर मथुरा के भूतेश्वर महादेव मंदिर में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव यहाँ मथुरा के कोतवाल के रूप में विराजमान हैं।

श्रावण मास के प्रथम सोमवार के शुभ अवसर पर भगवान श्री कृष्ण की पावन नगरी मथुरा में चारों तरफ शिव भक्ति का अनूठा माहौल दिखाई दे रहा है। अल सुबह से ही शहर के तमाम शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और पूरा वातावरण 'बम बम भोले' के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है। विशेष रूप से मथुरा के प्रसिद्ध भूतेश्वर महादेव मंदिर में तड़के से ही पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने वाले भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता है कि सावन के सोमवार पर सच्चे मन से महादेव की आराधना करने वाले शिव भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों और दुःखों से मुक्ति मिल जाती है तथा उनका जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है।

द्वापर कालीन इतिहास और पौराणिक मान्यता

भूतेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मंदिर के सेवायत पुजारी के अनुसार यह पावन स्थल द्वापर कालीन परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा की भूमि पर अवतार लिया था, तब देवाधिदेव महादेव उनके बाल स्वरूप का दर्शन करने के लिए स्वयं पधारे थे। हालांकि, भगवान शिव का रूप अत्यंत विलक्षण और उग्र था। उनके गले में नरमुंडों की माला सुशोभित थी और उनके पूरे शरीर पर चिता की भस्म रमी हुई थी। उनके इस स्वरूप को देखकर माता यशोदा आश्चर्यचकित रह गईं।

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बाल कृष्ण की सुरक्षा और उनके मन में भय उत्पन्न न हो, इस चिंता से माता यशोदा ने भगवान शिव को अपने लाला के दर्शन कराने से स्पष्ट इंकार कर दिया था। इसके पश्चात भगवान शिव उसी स्थान पर विराजमान हो गए। मान्यता के अनुसार, भूतेश्वर महादेव आज भी भगवान श्री कृष्ण और पूरी मथुरा नगरी की रक्षा के लिए शहर के 'कोतवाल' के रूप में यहां विराजमान हैं। यही कारण है कि स्थानीय निवासी और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु उन्हें मथुरा के मुख्य रक्षक और कोतवाल के रूप में पूजते हैं।

भक्तों का अनुभव और मंदिर परिसर की व्यवस्था

सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर भूतेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने आई महिला श्रद्धालु अमृता और जया वर्मा ने अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा, "यहाँ आने से मन को शांति मिलती है।" उन्होंने बताया कि सावन के इस पावन महीने में भगवान शिव अपने सभी भक्तों की नैया पार लगाते हैं और सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर भी श्रद्धालुओं ने संतोष व्यक्त किया। महिला श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रशासन द्वारा सुरक्षा और कतार प्रबंधन के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिससे सभी लोग बिना किसी असुविधा के कतारबद्ध होकर सुगमता से दर्शन कर पा रहे हैं।

इसके अलावा मंदिर में दर्शन करने पहुंचे पुरुष भक्त नीरज शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "प्रेम की इस नगरी में भूतेश्वर मंदिर पर आकर पूजा में लीन होने से बहुत ही आनंद की प्राप्ति हो रही है।" सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं और हर कोई अपने आराध्य शिव शंभू को बेलपत्र, जल और दूध अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में जुटा हुआ है।

ब्रज क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी

सावन माह में उमड़ने वाली भारी भीड़ और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मथुरा तथा संपूर्ण ब्रज क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं। मंदिर परिसरों के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही, यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष पुलिस निगरानी तंत्र सक्रिय किया गया है, जिससे सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालु निर्विघ्न रूप से भगवान शिव का पूजन कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

सावन के पहले सोमवार पर मथुरा के किस मंदिर में भक्तों की विशेष भीड़ रही?
मथुरा के प्रसिद्ध भूतेश्वर महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
भूतेश्वर महादेव मंदिर को मथुरा का 'कोतवाल' क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि द्वापर युग से ही भगवान शिव श्री कृष्ण और मथुरा शहर की रक्षा के लिए कोतवाल यानी रक्षक के रूप में यहाँ विराजमान हैं।
द्वापर युग से जुड़ा इस मंदिर का पौराणिक प्रसंग क्या है?
श्री कृष्ण के जन्म के बाद भगवान शिव दर्शन के लिए आए थे, लेकिन उनके डरावने रूप के कारण माता यशोदा ने उन्हें कान्हा के दर्शन कराने से मना कर दिया था।
मंदिर में भक्तों की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
पुलिस प्रशासन ने कतार प्रबंधन के लिए जवानों की तैनाती की है और ब्रज क्षेत्र के सभी मंदिरों की सतत निगरानी की जा रही है।
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