शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इन नौ दिनों के दौरान भक्तजन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। उत्सव के पहले दिन शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की चौकी सजाने, प्रतिमा स्थापना करने, कलश स्थापित करने और जौ बोने की विशेष परंपरा निभाई जाती है। इसके अलावा कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों के संकल्प के साथ अखंड ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं। अनुष्ठान की सुगमता के लिए पहले से ही सभी आवश्यक पूजन सामग्रियों की व्यवस्था कर लेना उत्तम माना जाता है।
दुर्गा पूजा अनुष्ठान के लिए आवश्यक मुख्य सामग्री
नवरात्रि के दैनिक पूजन के लिए सभी मांगलिक सामग्रियों की पूर्व तैयारी आवश्यक होती है। इस सूची में मुख्य रूप से मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति और भगवान गणेश की प्रतिमा शामिल है। बैठने और स्थापना के लिए लकड़ी की चौकी, बैठने का आसन, लाल वस्त्र, कलावा या मौली, फूल और पुष्प माला की व्यवस्था की जाती है। देवी को अर्पित करने के लिए पूर्ण श्रृंगार का सामान, लाल चुनरी और नारियल रखा जाता है।
इसके साथ ही धार्मिक पाठ के लिए दुर्गा सप्तशती ग्रंथ, नैवेद्य के रूप में ऋतुफल, धूप, अगरबत्ती, दीपक, पान का पत्ता और साबुत सुपारी एकत्र की जाती है। आरती के विधान के लिए आरती की थाली, घंटी, छोटा जलपात्र, कर्पूर, बाती और शुद्ध घी से भरा दीपक आवश्यक है। तिलक और अर्पण के लिए कुमकुम, चन्दन, हल्दी, अक्षत, अष्टदल कमल तथा कुमकुम और हल्दी से रंगे विशेष चावल तैयार रखे जाते हैं।
घटस्थापना और कलश पूजन सामग्री सूची
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके लिए मिट्टी या तांबे का कलश और उसमें भरने के लिए शुद्ध जल आवश्यक है। कलश के भीतर डालने के लिए एक सिक्का, अक्षत, दो साबुत सुपारी, दो इलायची, एक हल्दी की गांठ और दो साबुत लौंग की जरूरत होती है।
कलश के मुख को सुशोभित करने के लिए एक साथ जुड़े हुए 8 आम के पत्ते उपयोग किए जाते हैं। इसके ऊपर स्थापित किए जाने वाले नारियल को लाल कलावा या मौली से लपेटकर, नारियल पर बांधने के लिए छोटी लाल चुनरी से सजाया जाता है।
जौ बोने के लिए जरूरी सामग्री
कलश के समीप नवधान्य के प्रतीक रूप में जौ उगाने का विधान है। इसके लिए एक मिट्टी का बड़ा कटोरा, साफ काली मिट्टी, जौ और गेहूं के दाने, शुद्ध जल तथा कलावा या मौली की आवश्यकता होती है।
नवरात्रि पूजन और स्थापना की चरणबद्ध विधि
पूजन प्रारंभ करने के लिए सर्वप्रथम घर में एक पवित्र और स्वच्छ स्थान चुनकर वहां लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर स्वच्छ लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। उस चौकी पर थोड़े अक्षत रखकर आदरपूर्वक देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमा भी विराजमान करें।
इसके उपरांत कलश स्थापना की प्रक्रिया पूरी करें। मिट्टी अथवा तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, लौंग, इलायची और हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते सजाएं और उसके ऊपर लाल चुनरी में बंधा नारियल स्थापित करें। इस कलश को देवी प्रतिमा के समीप स्थापित करें।
शुद्धिकरण के लिए पुष्प के माध्यम से भगवान गणेश और देवी दुर्गा पर पवित्र जल का छिड़काव करें। संकल्प के अनुसार अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और नित्य पूजा व आरती के लिए अलग से घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश, माता रानी, स्थापित कलश और प्रज्वलित दीपक पर हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं।
शास्त्रोक्त विधि से पूजन संपन्न करने के बाद देवी को श्रृंगार की संपूर्ण सामग्री अर्पित करें। भोग के रूप में अपनी श्रद्धानुसार ताजे मौसमी फल, बताशे और मिश्री का नैवेद्य चढ़ाएं। अंत में मां दुर्गा के पवित्र मंत्रों का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती संपन्न करें।



















