फ्रेंच रिवेरा में कैटी पेरी और जस्टिन ट्रूडो का वेकेशन, सनस्क्रीन लगाते तस्वीरें वायरल होने से इंटरनेट पर बढ़ी हलचलभारत में लॉन्च हुआ एक्सक्लूसिव मिनी कनवर्टिबल का स्टारडस्ट एडिशन, कीमत 62.90 लाख रुपयेगाज़ा में नई रक्षात्मक दीवारें खड़ी कर रहा इज़राइल, विस्थापित परिवारों की बढ़ी मुसीबतेंमानसून में गमलों को सड़ने से बचाने के घरेलू उपाय और पौधों की देखभाल के आसान तरीकेनवजात बछड़े के जन्म के तुरंत बाद दूध पिलाने के वैज्ञानिक लाभ जानिए डॉ. प्रकाश चंद्र हिमांशु सेसरकारी विभागों में स्थाई और एडहॉक पदों के बीच वेतन अधिकार एवं सुरक्षा का बड़ा अंतर जानिएमानिकपुर के जंगलों में स्थित आनंदी माता मंदिर का 100 साल पुराना कुआं, भीषण सूखे में भी नहीं सूखता इसका पानीबंगाल के सरकारी स्कूलों में इस्कॉन परोसेगा शाकाहारी खाना और प्रशासन देगा अंडा, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलानपाकिस्तानी हैंडलर्स का नया षड्यंत्र बेनकाब, CJP सदस्यता पर 50 हजार प्रति माह देने का झांसामेडिकल दाखिले में एम्स की होड़ के बीच दिल्ली के 5 सरकारी कॉलेज भी डॉक्टर बनने के लिए हैं बेहतरीन विकल्प
अटूट भक्ति की अनूठी मिसाल बनीं 80 वर्षीय राजी अम्मा, हैदराबाद मंदिर में बीते ढाई दशकों से रोज बजाती हैं 250 किलो वजनी घंटीधर्म
30 जुल॰ 2026, 2:23 pm (3 घंटे पहले)· 0

अटूट भक्ति की अनूठी मिसाल बनीं 80 वर्षीय राजी अम्मा, हैदराबाद मंदिर में बीते ढाई दशकों से रोज बजाती हैं 250 किलो वजनी घंटी

हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 80 साल की राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से 250 किलोग्राम वजनी घंटी बजाकर मिसाल पेश कर रही हैं। शारीरिक कमजोरी के बावजूद वे हर दिन तीन बार पहिया घुमाकर 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।

हैदराबाद के श्रीनगर कॉलोनी क्षेत्र में बने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में आस्था और सेवा का एक अत्यंत प्रेरणादायक नजारा प्रतिदिन दिखाई देता है। बढ़ती उम्र की तमाम बंदिशों और शारीरिक समस्याओं को दरकिनार करते हुए करीब 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से मंदिर की विशाल घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं। यह घंटी कोई साधारण घंटी नहीं है, बल्कि इसका वजन लगभग 250 किलोग्राम है। गंभीर शारीरिक तकलीफों के बावजूद राजी अम्मा का यह समर्पण मंदिर आने वाले हर श्रद्धालु का दिल जीत लेता है।

झुकी हुई पीठ और बढ़ती उम्र के बावजूद अटूट नियम

उम्र के इस पड़ाव पर राजी अम्मा की पीठ बुढ़ापे की वजह से काफी झुक चुकी है, जिससे उन्हें सामान्य रूप से सीधे खड़े होने में भी खासी परेशानी होती है। लेकिन जब बात भगवान वेंकटेश्वर की सेवा की आती है, तो उनकी शारीरिक कमजोरी आड़े नहीं आती। मंदिर में प्रतिदिन भगवान के भोग और आरती के समय वे बिना किसी नागा के उपस्थित होती हैं। दिन में तीन अलग-अलग समय पर वे इस भारी घंटी के पास पहुंचती हैं और लगातार लगभग 15 मिनट तक इसे बजाती हैं।

ये भी पढ़ें

विशेष गियर और पहिया प्रणाली से बजती है 250 किलो की घंटी

इतनी भारी 250 किलोग्राम की घंटी को सामान्य रस्सी से खींचकर बजाना किसी बुजुर्ग महिला के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। श्रद्धालुओं को होने वाली इस कठिनाई को समझते हुए मंदिर प्रबंधन ने घंटी के संचालन के लिए एक विशेष मैकेनिकल गियर और व्हील सिस्टम स्थापित किया है। राजी अम्मा एक बड़े पहिए पर लगे मजबूत हैंडल को पकड़ती हैं और अपनी पूरी क्षमता से उसे घुमाती हैं। इस गियर तकनीक के कारण घंटी एक सुंदर और लयबद्ध तरीके से बजती है, और उसकी मधुर गूंज पूरे मंदिर प्रांगण में फैल जाती है।

मंदिर परिसर में ही बीता ढाई दशकों का जीवन

राजी अम्मा पिछले लगभग ढाई दशकों से इसी श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर परिसर को अपना घर मानकर रह रही हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति और सेवा के प्रति समर्पित कर दिया है। मंदिर में मिलने वाला भगवान का प्रसाद ही उनके भोजन का मुख्य जरिया है और मंदिर का प्रांगण ही उनका स्थायी ठिकाना है। वृद्ध अवस्था की तमाम तकलीफों के बाद भी उनकी दिनचर्या और श्रद्धा में जरा भी बदलाव नहीं आया है।

श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि राजी अम्मा का यह निष्काम सेवा भाव सभी के लिए एक बड़ी सीख है। जिस लगन और अटूट आस्था के साथ वे इस उम्र में रोजाना 250 किलो की घंटी बजाती हैं, वह इंसान की इच्छाशक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध विश्वास की एक मिसाल पेश करता है।

सवाल-जवाब

हैदराबाद में राजी अम्मा किस मंदिर में सेवा देती हैं?
वे हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पिछले 25 वर्षों से घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं।
राजी अम्मा जिस घंटी को बजाती हैं उसका वजन कितना है?
मंदिर की उस विशाल घंटी का वजन लगभग 250 किलोग्राम है।
80 साल की उम्र में वे इतनी भारी घंटी कैसे बजा पाती हैं?
मंदिर प्रबंधन ने घंटी में एक विशेष मैकेनिकल गियर और पहिया सिस्टम लगाया है, जिसके हैंडल को घुमाकर वे इसे आसानी से बजा पाती हैं।
राजी अम्मा दिन में कितनी बार और कितने समय तक घंटी बजाती हैं?
वे दिन में तीन बार आरती और भोग के समय बिना किसी नागा के करीब 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।
राजी अम्मा का जीवनयापन किस तरह होता है?
वे पिछले ढाई दशकों से मंदिर परिसर में ही रह रही हैं और मंदिर का प्रसाद ही उनका भोजन है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR