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असम में IVF तकनीक से जन्मी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली बछड़ी, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धिविज्ञान
22 अग॰ 2026, 1:42 pm (21 दिन पहले)· 3

असम में IVF तकनीक से जन्मी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली बछड़ी, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि

असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य पालन विश्वविद्यालय में IVF तकनीक के जरिए स्वदेशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली बछड़ी का जन्म हुआ है, जिससे देशी गोवंश संरक्षण और दूध उत्पादन में सुधार की राह खुली है।

पशुधन जैव प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में असम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है, जहां इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक के जरिए स्वदेशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली बछड़ी का जन्म हुआ है। यह ऐतिहासिक जन्म गुवाहाटी में स्थित असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य पालन विश्वविद्यालय में दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की और इसे राज्य के कृषि, डेयरी तथा वैज्ञानिक परिदृश्य के लिए एक नया अध्याय करार दिया।

स्वदेशी गोवंश संरक्षण की दिशा में नई पहल

लखीमी नस्ल असम की सदियों पुरानी पारंपरिक देशी गोवंश नस्ल है, जो स्थानीय वातावरण और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल मानी जाती है। इस देशी नस्ल में IVF तकनीक का सफल प्रयोग इसके आनुवंशिक गुणों को संरक्षित करने और उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों को तैयार करने में मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच X पर इस सफलता को साझा करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि सभ्यता, संस्कृति और सृजन का एक अनूठा संगम है।

डेयरी क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

देशी मवेशियों के नस्ल सुधार में IVF जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग ग्रामीण आजीविका के लिए बहुत लाभकारी माना जा रहा है। इस प्रक्रिया से न केवल पशुओं में रोगों से बचाव की क्षमता बेहतर होगी, बल्कि दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जा सकेगी। असम के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ी आबादी डेयरी और पशुपालन पर निर्भर है, इसलिए मवेशियों की सेहत और उत्पादकता में सुधार से किसानों की आय बढ़ाने में सीधी मदद मिलेगी।

वैज्ञानिकों का सम्मान और भविष्य की संभावनाएं

मुख्यमंत्री सरमा ने इस जटिल प्रयोग को सफलता तक पहुंचाने वाले पशु चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हालांकि यह बछड़ी देखने में अभी छोटी है, लेकिन असम में जैव प्रौद्योगिकी और पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इसका महत्व बहुत बड़ा है। इस अभूतपूर्व सफलता से आने वाले समय में राज्य के डेयरी उद्योग को नई गति मिलेगी और उन्नत प्रजनन तकनीकों का दायरा बढ़ेगा।

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सवाल-जवाब

असम में किस नस्ल की पहली IVF बछड़ी का जन्म हुआ है?
असम में स्वदेशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली IVF बछड़ी का जन्म हुआ है।
यह ऐतिहासिक जन्म किस संस्थान में दर्ज किया गया?
यह जन्म गुवाहाटी स्थित असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य पालन विश्वविद्यालय में हुआ।
इस वैज्ञानिक सफलता की जानकारी किसने दी?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट के जरिए इस उपलब्धि की जानकारी दी।
इस IVF तकनीक से किसानों को क्या फायदा होगा?
इससे देशी लखीमी नस्ल का संरक्षण होगा, पशुओं में बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी और दूध उत्पादन में सुधार होने से पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
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