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हरतालिका तीज पर शिव और पार्वती पूजन की पूरी सामग्री, भोग और दान की पारंपरिक विधिअध्यात्म
19 सित॰ 2026, 2:11 pm (11 दिन पहले)· 2

हरतालिका तीज पर शिव और पार्वती पूजन की पूरी सामग्री, भोग और दान की पारंपरिक विधि

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाए जाने वाले हरतालिका तीज व्रत के लिए जरूरी पूजा सामग्री, पारंपरिक भोग और अनुष्ठान के बाद दान की परंपरा का पूरा विवरण।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व पूरे विधि विधान के साथ मनाया जाता है। इस बार 14 सितंबर दिन सोमवार को यह व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जाएगा। हिंदू धर्म की मान्यताओं में इस व्रत का दर्जा अत्यंत विशिष्ट है, जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में अटूट सुख शांति की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखती हैं। पौराणिक आख्यानों के मुताबिक माता पार्वती ने देवाधिदेव भगवान शिव को पति रूप में वरण करने के लिए घोर तपस्या और अटूट संकल्प का मार्ग चुना था। माता पार्वती की उसी तपस्या के सम्मान में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना का विशेष विधान है। पूजन के दौरान किसी भी व्यवधान से बचने के लिए आवश्यक सामग्री को पहले से व्यवस्थित कर लेना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजन अनुष्ठान हेतु आवश्यक सामग्रियों की सूची

हरतालिका तीज की विधिवत पूजा के लिए धार्मिक परंपरा के अनुकूल सभी आवश्यक पूजन सामग्रियों का संग्रह पहले ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए। इस पावन अनुष्ठान में निम्नलिखित वस्तुएं मुख्य रूप से सम्मिलित की जाती हैं

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  • प्रतिमा व स्वरूप: भगवान शिव और माता पार्वती की सुंदर तस्वीर अथवा प्रतिमा, या फिर नदी की बालू या शुद्ध मिट्टी से हाथों द्वारा विशेष रूप से निर्मित शिव-पार्वती की युगल प्रतिमा।
  • पुष्प और माला: देवी-देवताओं के श्रृंगार और अर्पण हेतु विविध प्रकार के ताजे फूल और सुगंधित फूलों की मालाएं।
  • सौभाग्य व सुहाग सामग्री: माता पार्वती को अर्पित करने के लिए पारंपरिक सुहाग की वस्तुएं, जिनमें चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी और लाल चुनरी मुख्य रूप से शामिल हैं।
  • आरती और थाली व्यवस्था: अनुष्ठान के लिए विशेष पूजा थाली और विधिवत आरती संपन्न करने से संबंधित समस्त धूप, दीप और गंध की सामग्री।

व्रत का पौराणिक आधार और वैवाहिक महत्व

हरतालिका तीज की कथा का मूल आधार माता पार्वती का भगवान शिव के प्रति अनन्य प्रेम और उनका अप्रतिम तप है। कठिन साधना के पश्चात ही उन्हें महादेव पति रूप में प्राप्त हुए थे। इसी कारण विवाहित स्त्रियां अपने दांपत्य संबंध को प्रगाढ़ बनाने, परिवार में सुख-समृद्धि स्थापित करने और अखंड सौभाग्य के लिए इस कठिन व्रत का पालन करती हैं। इसके अतिरिक्त अविवाहित कन्याएं भी योग्य और मनोनुकूल जीवनसाथी प्राप्त करने की अभिलाषा के साथ इस व्रत को रखती हैं। इस पूरे दिन श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती का ध्यान, हरतालिका तीज की पावन व्रत कथा का श्रवण और आरती का गायन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन और पूर्ण समर्पण से किया गया यह अनुष्ठान जीवन में प्रेम, सद्भाव और समृद्धि का वरदान लाता है।

नैवेद्य और पारंपरिक भोग के नियम

पूजन के पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती को भोग अर्पित करने के लिए घरों में शुद्ध सात्विक पकवान तैयार किए जाते हैं। इस दिन पारंपरिक मिठाइयों और व्यंजनों का विशेष महत्व माना गया है

  • सात्विक पकवान: घर की रसोई में पूर्ण शुद्धता से तैयार खीर, हलवा, पूड़ी और मालपुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन।
  • फल व मिष्ठान्न: ऋतु फल और बाजार अथवा घर पर तैयार किए गए शुद्ध मिष्ठान्न।
  • क्षेत्रीय व्यंजन: विभिन्न अंचलों की स्थानीय परंपराओं के अनुसार बनाए जाने वाले विशेष पारंपरिक पकवान।

सर्वप्रथम यह समस्त सात्विक भोग भगवान शिव और माता पार्वती को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है, जिसके बाद ही इस पावन प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करने की रीति है।

पूजा उपरांत दान का विधान

धार्मिक परंपरा के अनुसार हरतालिका तीज के व्रत और पूजन की पूर्णता दान-पुण्य के माध्यम से ही मानी जाती है। अनुष्ठान संपन्न होने के पश्चात अपनी व्यक्तिगत सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन अन्न, वस्त्र, ऋतु फल, मिष्ठान्न, सुहाग की सामग्री और श्रद्धानुसार दक्षिणा का दान करने का नियम है। कई परिवारों में यह भी परंपरा है कि किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद महिला को आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें वस्त्र व श्रृंगार सामग्री भेंट कर उनका आशीष लिया जाता है।

सवाल-जवाब

हरतालिका तीज का पर्व किस तिथि और दिन मनाया जाएगा?
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो इस बार 14 सितंबर दिन सोमवार को पड़ रही है।
हरतालिका तीज के दिन किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
इस पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त रूप से विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजा के लिए प्रतिमा किस वस्तु से बनाई जा सकती है?
पूजा में सामान्य प्रतिमा या तस्वीर के अलावा नदी की बालू अथवा शुद्ध मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करने का विधान है।
माता पार्वती को कौन-सी सुहाग सामग्री अर्पित करनी चाहिए?
माता पार्वती को चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी और चुनरी जैसी पारंपरिक सौभाग्य सामग्री अर्पित की जाती है।
हरतालिका तीज के भोग में कौन से पकवान शामिल किए जाते हैं?
भोग में खीर, हलवा, पूड़ी, मालपुआ, फल, मिठाई और स्थानीय परंपरा के अनुसार बनाए गए अन्य सात्विक व्यंजन शामिल होते हैं।
व्रत और पूजा संपन्न होने के बाद किस प्रकार का दान करना चाहिए?
पूजा के बाद सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न, फल, मिठाई, सुहाग सामग्री और दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है।
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