सनातन परंपरा में कर्म फल, स्वर्ग और नर्क के सिद्धांतों को मानव जीवन की धुरी माना गया है। बिहार में पूर्णिया के पंडित और ज्योतिषाचार्य मनोत्पल झा का कहना है कि स्वर्ग अथवा नर्क कहीं अन्यत्र नहीं, बल्कि इसी धरती पर मौजूद हैं। प्रत्येक मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार सुख और दुख का अनुभव यहीं करता है। ईश्वर किसी भी व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही उसका प्रारब्ध निर्धारित करते हैं। शरीर नश्वर होने के बावजूद आत्मा अमर रहती है और वह सदैव शुभ तथा जनकल्याणकारी कार्यों की प्रेरणा देती है। हालांकि, यह मानव के विवेक पर निर्भर करता है कि वह आत्मा की पुकार सुनता है या फिर मन के भटकाव में आकर अनैतिक कर्मों में लिप्त हो जाता है। यही कर्म निर्धारित करते हैं कि व्यक्ति को सद्गति मिलेगी या कष्ट भोगना पड़ेगा।
17 जनवरी 2026 को रखा जाएगा नर्क निवारण चतुर्दशी का व्रत
मिथिला पंचांग की गणना का हवाला देते हुए ज्योतिषाचार्य मनोत्पल झा ने स्पष्ट किया है कि इस बार नर्क निवारण चतुर्दशी 17 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह पावन पर्व माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शनिवार के दिन पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्दशी तिथि पूरी तरह से देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्ति और आत्मशुद्धि के लिए यह तिथि अत्यंत फलदायी मानी गई है।
जलाभिषेक और क्षमा प्रार्थना से दूर होंगे पाप
इस विशिष्ट तिथि पर श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन, जलाभिषेक और उपवास करते हैं। इस अनुष्ठान का मूल उद्देश्य अपने जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति पाना और नर्क के कष्टों से रक्षा करना है। भक्त इस दिन भगवान शिव के समक्ष विनम्रतापूर्वक यह भाव प्रकट करते हैं कि वे एक साधारण मनुष्य हैं, जो अपने सत्कर्म और कुकर्म दोनों के लिए स्वयं उत्तरदायी हैं। इसके साथ ही जीवन में हुई भूलों, प्रमाद और त्रुटियों के लिए महादेव से क्षमा याचना की जाती है।
सत्कर्म से प्रशस्त होगा स्वर्ग का मार्ग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपने नकारात्मक कर्मों के दुष्प्रभाव से बचने और नर्क के कष्टों से सुरक्षा पाने के लिए चतुर्दशी तिथि पर महादेव की आराधना सर्वोत्तम उपाय है। मनोत्पल झा बताते हैं कि व्यक्ति के सत्कर्म ही उसे पुण्य फल और मोक्ष की ओर अग्रसर करते हैं। इस व्रत और साधना में कोई भी आयु सीमा का बंधन नहीं है। बच्चे, बुजुर्ग, युवा, भाई-बहन और माताएं सभी पूरी निष्ठा एवं विधि-विधान के साथ इस व्रत को संपन्न कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।



















