सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के पावन अवसर पर आज १७ अगस्त को देश भर में नाग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष का यह पर्व बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है, और ऐसा दुर्लभ संयोग पूरे २३ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देखने को मिल रहा है। सनातन धर्म में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है, जबकि पंचमी तिथि नाग देवताओं की उपासना के लिए विशेष रूप से निर्धारित है। इन दोनों पावन पर्वों के एक ही दिन आने से धार्मिक अनुष्ठानों और शिव साधना का महत्व कई गुना बढ़ गया है, जिससे श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
वैदिक ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। इसके साथ ही यह दिन कालसर्प दोष, पितृ दोष और अन्य कई प्रकार के ज्योतिषीय दोषों के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अपने गले में नाग को आभूषण के रूप में धारण करते हैं, इसलिए सावन के महीने में इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। भक्तजन इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान शिव तथा नाग देवताओं का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेते हैं।
शुभ मुहूर्त और दुर्लभ योग
इस वर्ष नाग पंचमी के पावन दिन कई शुभ योगों का एक साथ निर्माण हो रहा है, जिनमें शुभ योग, शुक्ल योग और रवि योग शामिल हैं। इसके अलावा देवगुरु बृहस्पति के उच्च राशि में स्थित होने के कारण हंसराज योग का भी सुंदर संयोग बन रहा है। इन सभी शुभ योगों के प्रभाव से इस दिन की गई पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का आरंभ १६ अगस्त की शाम ४ बजकर ५४ मिनट पर हो चुका था और इसका समापन आज यानी १७ अगस्त की शाम ५ बजकर ०२ मिनट पर होगा। उदिया तिथि की मान्यता को आधार बनाते हुए आज ही के दिन नाग पंचमी का व्रत और पूजन संपन्न किया जा रहा है।
नाग देवता की पूजा के लिए आज सुबह ५ बजकर ५० मिनट से लेकर ८ बजकर २८ मिनट तक का समय सबसे उत्तम माना गया है। इस प्रकार भक्तों को पूजन के लिए कुल २ घंटे ३७ मिनट की अवधि प्राप्त हो रही है, जिसमें वे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कर सकते हैं। इसके अलावा दिन के अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह ०४:२५ से ०५:०९ तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर १२:०० से १२:५२ तक, विजय मुहूर्त दोपहर ०२:३७ से ०३:२९ तक और गोधूलि मुहूर्त शाम ०६:५९ से ०७:२१ तक तय किया गया है, जबकि रवि योग सुबह ०५:५२ से ८:०४ तक रहेगा। इन सभी अवधियों में पूजा-पाठ करना बहुत फलदायी माना गया है।
पूजा की सही विधि और परंपराएं
धार्मिक परंपराओं के अनुसार आज के दिन सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, पुष्प और अक्षत अर्पित करने के पश्चात नाग देवता की प्रतिमा या उनके चित्र को विधिवत स्थापित किया जाता है। इसके बाद गंध, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करके उनकी आराधना की जाती है। इस विशेष अवसर पर प्रमुख नागों का स्मरण करने की परंपरा है, जिनमें अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया जैसे नाग देवताओं के नाम शामिल हैं। पूजा के दौरान अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्, शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा जैसे मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, साथ ही भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का भी निरंतर जप किया जाता है।
इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान बनाए रखा जाए। आधुनिक समय में किसी भी जीवित सांप को पकड़कर उसे प्रताड़ित करने या उसके मुंह में दूध डालने जैसी प्रथाओं को शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। इसके स्थान पर केवल प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा करना ही सुरक्षित और उचित तरीका है। ऐसा करने से पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता और धार्मिक आस्थाओं का निर्वाह भी पूरी श्रद्धा के साथ हो जाता है.
कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से नाग पंचमी का दिन कालसर्प दोष की शांति और निवारण के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या पितृ दोष होता है, वे इस दिन विशेष उपाय करके राहत पा सकते हैं। इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत लाभकारी माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् का सविधि जप करने से आरोग्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा कुछ अन्य पारंपरिक उपाय भी इस दिन किए जाते हैं जैसे कि चांदी या तांबे से बने नाग-नागिन के जोड़े को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना। नाग पंचमी के इस पवित्र अवसर पर गरीबों, जरूरतमंदों और साधु-संतों को भोजन, वस्त्र और अन्न का दान करना भी बहुत पुण्य का काम माना जाता है। इन सभी धार्मिक कृत्यों को संपन्न करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी जीव या सांप को प्रत्यक्ष रूप से कोई क्षति न पहुंचाई जाए।



















