हिन्दू धर्म में सावन के महीने का विशेष स्थान है और ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर ही वास करते हैं। यही कारण है कि महादेव को समर्पित यह पूरा महीना उनकी आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। भक्तगण इस दौरान सावन सोमवार के पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग केवल एक लोटा गंगाजल अर्पित करके भी भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। सावन माह का दूसरा सोमवार 21 जुलाई यानी आज के दिन पड़ रहा है, जिसका धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व है।
बन रहे हैं विशेष और दुर्लभ संयोग
इस वर्ष सावन के पवित्र महीने में कुल चार सोमवार आ रहे हैं, जिनमें से दूसरे सोमवार का दिन बेहद खास माना जा रहा है। बैद्यनाथधाम के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार सावन के दूसरे सोमवार पर कई वर्षों के बाद बेहद अद्भुत और शुभ संयोग बन रहे हैं। इस खास अवसर पर विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करने और उन्हें बेलपत्र अर्पित करने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
एकादशी और रोहिणी नक्षत्र का मेल
बैद्यनाथ पंचांग के अनुसार, 21 जुलाई को एकादशी तिथि का भी संयोग बन रहा है, जिसका अर्थ है कि इस दिन भक्तों को जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवों के देव महादेव दोनों का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसके अलावा, इस पावन दिवस पर रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ माना गया है। इन सबके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी, रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के इस त्रिवेणी संगम में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है और सभी अटके कार्य पूरे होते हैं।
पूजन की सही विधि और नियम
सावन के दूसरे सोमवार के दिन व्रत का पालन करना बहुत फलदायी माना जाता है। पूजा की शुरुआत में सबसे पहले भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें और उन्हें राम नाम लिखा हुआ बेलपत्र विशेष रूप से अर्पित करें। इस दिन पंचोपचार विधि यानी जल, दूध, दही, घी और शहद के माध्यम से अभिषेक करना चाहिए और इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाना जरूरी है। चूंकि इस दिन कामना एकादशी भी है, इसलिए भगवान विष्णु की भी विधि-विधान से उपासना करें। हरि और हर दोनों के संयुक्त आशीर्वाद से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।



















