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साल की पहली सोमवती अमावस्या किस दिन? जानिए सही तारीख और पितरों की कृपा पाने के चार अचूक उपायअध्यात्म
13 जून 2026, 3:05 pm (91 दिन पहले)· 0

साल की पहली सोमवती अमावस्या किस दिन? जानिए सही तारीख और पितरों की कृपा पाने के चार अचूक उपाय

अधिक मास में पड़ रही इस साल की पहली सोमवती अमावस्या की तिथि को लेकर बना असमंजस दूर। जानिए यह सोमवार को क्यों मानी जाएगी और दीपदान, तर्पण व दान के कौन-से उपाय आर्थिक तंगी दूर कर पितरों का आशीर्वाद दिलाते हैं।

हिंदू परंपरा में अमावस्या वैसे तो हर महीने आती है, पर जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहकर विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इस बार खास संयोग यह है कि अधिक मास में साल की पहली सोमवती अमावस्या आ रही है। दिक्कत सिर्फ इतनी है कि अमावस्या तिथि दो दिन तक फैली हुई है, इसी वजह से श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल है कि व्रत और उपाय आखिर किस दिन करें।

तिथि दो दिन, पर पर्व सोमवार को ही

बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य इस उलझन को सीधे शब्दों में सुलझाते हैं। उनके अनुसार जब पर्व का नाम ही सोमवती है, तो इसका मान सोमवार को ही होगा। अमावस्या तिथि भले ही रविवार दोपहर बाद से लग जाएगी, लेकिन उदय तिथि सोमवार को मिलने के कारण इसका पूरा महत्व सोमवार को ही रहेगा—रविवार को इसे नहीं माना जाएगा। चूंकि सोमवार को यह तिथि कई घंटे तक बनी रहेगी, इसलिए पूरे दिन को पुण्यकाल माना जाएगा।

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सबसे पहले पितरों का स्मरण

महंत जी बताते हैं कि इस दिन की शुरुआत पितरों को याद करने से होनी चाहिए। पितरों की शांति और कृपा पाने के लिए सफेद वस्तुओं का दान शुभ माना गया है। इसके साथ ही धन-समृद्धि की कामना रखने वालों के लिए एक खास उपाय बताया गया है—घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाना। मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है, उनकी कृपा बनी रहती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

चार जगह दीपदान का महत्व

दीपक जलाने को लेकर शास्त्रसम्मत चार स्थान बताए गए हैं। पितरों के निमित्त घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसी तरह पीपल के पेड़ के पास भी सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ कहा गया है। वहीं तुलसी माता के पौधे के समीप घी का दीपक जलाने से विशेष फल मिलता है। इन चारों स्थानों पर दीप जलाने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

तर्पण कैसे करें

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के मुताबिक सोमवती अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण भी जरूरी है। इसकी विधि यह है कि दाहिने हाथ में तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलांजलि दी जाती है। पिताजी, दादाजी और परदादाजी के साथ-साथ माताजी, नानाजी और परनानाजी का नाम तथा गोत्र लेकर तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। यदि पूरे मंत्र याद न हों तो घबराने की जरूरत नहीं—समस्त पितृ का स्मरण करके भी तर्पण किया जा सकता है।

चंद्रमा और सफेद वस्तुओं का संबंध

अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, और चंद्रमा को मन का देवता माना गया है। यही कारण है कि इस दिन भगवान शिव को चावल, चीनी और दूसरी सफेद वस्तुएं अर्पित करने की सलाह दी जाती है। सफेद वस्तुओं का दान करने से मन शांत रहता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए दान-पुण्य और उपायों से घर में सुख-समृद्धि आती है, आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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