सेनेगल की राजधानी डकार में आयोजित युवा ओलंपिक खेलों में भारत की युवा प्रतिभाओं ने दमदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है। सोमवार का दिन भारतीय दल के लिए बेहद यादगार रहा, जहां एक तरफ तैराकी पूल में धिनिधि देशिंगु ने अपनी गति का लोहा मनवाते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया, वहीं दूसरी तरफ जूडो मैट पर खुशबू राजकभाई ने शानदार जीत दर्ज करते हुए खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली।
स्विमिंग पूल में धिनिधि का शानदार प्रदर्शन
बेंगलुरु की 16 वर्षीय प्रतिभाशाली तैराक धिनिधि देशिंगु ने महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में पोडियम पर जगह बनाई। फाइनल मुकाबले में धिनिधि ने 56.27 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया और कांस्य पदक अपने नाम किया। इस कड़ी स्पर्धा में क्रोएशिया की तैराक एना बोबानोविच ने 55.89 सेकंड के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि न्यूजीलैंड की एलिसा लॉसन ने 56.13 सेकंड का समय दर्ज कर रजत पदक अपने नाम किया।
धिनिधि ने खिताबी रेस से पहले ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। शुरुआती हीट राउंड में उन्होंने 56.80 सेकंड का समय निकालकर अपनी हीट में शीर्ष स्थान हासिल किया था। सभी हीट मुकाबलों के आधार पर वह तीसरी सबसे तेज तैराक बनकर फाइनल में पहुंची थीं। हीट मुकाबलों के दौरान केवल क्रोएशिया की एना बोबानोविच (56.22 सेकंड) और न्यूजीलैंड की एलिसा लॉसन (56.53 सेकंड) ही उनसे आगे रही थीं। फाइनल में भी तीनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला और धिनिधि ने भारत की झोली में पदक डाल दिया।
जूडो में खुशबू राजकभाई ने रचा नया इतिहास
जूडो के मैट पर गुजरात की 15 वर्षीय युवा एथलीट खुशबू राजकभाई ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि अपने नाम की। महिलाओं के 63 किग्रा भार वर्ग में खेलते हुए खुशबू ने फाइनल का टिकट कटा लिया। फाइनल में पहुंचते ही उन्होंने भारत के लिए कम से कम रजत पदक सुनिश्चित कर लिया है। इस प्रदर्शन के साथ ही खुशबू युवा ओलंपिक खेलों के इतिहास में फाइनल तक का सफर तय करने वाली दूसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी बन गई हैं।
स्वर्ण पदक के निर्णायक मुकाबले में अब खुशबू के सामने जर्मनी की कैडेट विश्व चैंपियन जोलिना रेनहोल्ड की कड़ी चुनौती होगी। अगर खुशबू यह फाइनल मुकाबला जीत लेती हैं, तो वह युवा ओलंपिक के इतिहास में जूडो स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
युवा ओलंपिक में भारत का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड
भारतीय खेल इतिहास में युवा ओलंपिक के अंदर जूडो में अब तक केवल एक ही पदक आया है। साल 2018 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित युवा ओलंपिक खेलों में थांगजाम तबाबी देवी ने महिला 44 किग्रा वर्ग में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था। अब आठ साल बाद खुशबू के पास इस पदक के रंग को सोने में बदलने का शानदार मौका है।
यदि युवा ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धाओं के स्वर्ण पदकों की बात करें, तो भारत ने 2018 के ब्यूनस आयर्स खेलों में बेहतरीन सफलता हासिल की थी। उस समय निशानेबाजी में मनु भाकर ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में और सौरभ चौधरी ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते थे। इसके अलावा भारोत्तोलन में जेरेमी लालरिनुंगा ने पुरुषों के 62 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया था।
प्री-क्वार्टर से फाइनल तक खुशबू का दबदबा
खुशबू का फाइनल तक का सफर बेहद प्रभावशाली और एकतरफा रहा। उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में गिनी की खिलाड़ी मामइस्सता कैमारा को 1-0 के स्कोर से हराया। यह जीत उन्होंने 'युको' के आधार पर हासिल की। जूडो के खेल में युको किसी प्रभावी तकनीक के सफल निष्पादन पर मिलने वाला एक छोटा तकनीकी अंक होता है।
इसके बाद क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खुशबू ने मोरक्को की प्रतिद्वंद्वी अबीर बुआज्जाउई को सीधे 'इप्पोन' के जरिए मात दी। जूडो में इप्पोन सबसे बड़ा स्कोर माना जाता है, जिसके मिलते ही मुकाबला तुरंत समाप्त घोषित कर दिया जाता है। यह अंक प्रतिद्वंद्वी को मैट पर पूरी तरह नियंत्रित करके गिराने और मजबूत पकड़ बनाने पर मिलता है।
सेमीफाइनल में खुशबू का सामना अल्जीरिया की दुनिया बेराहुआल से हुआ। इस मुकाबले में भी खुशबू ने अपना दबदबा बनाए रखा और जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया। मैच के दौरान उनकी प्रतिद्वंद्वी को 'हांसोकु-माके' की सजा दी गई। यह जूडो खेल में दिया जाने वाला सबसे कड़ा दंड है, जिसके तहत गंभीर नियमों के उल्लंघन पर खिलाड़ी को तुरंत अयोग्य ठहरा दिया जाता है और विरोधी खिलाड़ी को सीधे इप्पोन के आधार पर विजयी घोषित कर दिया जाता है।



















