भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों के फाइनल मुकाबले में मलेशिया को 5-1 के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ भारत ने पांचवीं बार इन खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि टूर्नामेंट के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुरुष टीम ने लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता हो। खिताबी जीत दर्ज करने के साथ ही भारतीय टीम ने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। मौजूदा खेलों में यह भारत का 21वां स्वर्ण पदक रहा, जो इन खेलों के इतिहास में देश का दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। इस बार एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि पुरुष और महिला दोनों टीमों ने एक साथ स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक के लिए सीधा प्रवेश हासिल किया है।
मैच में गोल करने वाले भारतीय खिलाड़ी
फाइनल मुकाबले में भारत के आक्रमण का नेतृत्व कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने किया, जिन्होंने अकेले दो गोल दागे। टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन खेल दिखाते हुए मलेशियाई डिफेंस को पूरी तरह दबाव में रखा। हरमनप्रीत के दो गोलों के अलावा जुगराज सिंह, हार्दिक सिंह और शिवानांद लाकरा ने एक-एक गोल दागकर भारत की 5-1 से विशाल जीत सुनिश्चित की।
शुरुआती क्वार्टर में दोनों पक्षों के बीच बराबरी की टक्कर
मुकाबले के पहले क्वार्टर में दोनों पक्षों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। खेल के 11वें मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे गोल में तब्दील करने में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कोई चूक नहीं की और टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। हालांकि मलेशिया ने तुरंत पलटवार किया और 14वें मिनट में गोल दागकर स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया।
जुगराज सिंह ने दिलाई महत्वपूर्ण बढ़त
दूसरे क्वार्टर के 22वें मिनट में जब भारत को दूसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला, उस समय कप्तान हरमनप्रीत सिंह मैदान पर मौजूद नहीं थे। इस महत्वपूर्ण मोड़ पर ड्रैग फ्लिकर जुगराज सिंह ने जिम्मेदारी संभाली और बेहतरीन शॉट लगाकर हाफ टाइम से सात मिनट पहले भारत को 2-1 से आगे कर दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और मलेशिया को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।



















