अंतरराष्ट्रीय पुरुष हॉकी के इतिहास में भारतीय टीम ने एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसे पहले कभी कोई देश नहीं छू सका। वावरे (बेल्जियम) तथा अमस्टेलवीन (नीदरलैंड्स) में आयोजित एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 के अपने शुरुआती मैच में वेल्स के आमने-सामने आते ही भारत विश्व कप के सभी 16 आयोजनों में उतरने वाली दुनिया की प्रथम राष्ट्रीय टीम बन गया। पांच दशकों की इस अटूट भागीदारी ने देश के करोड़ों हॉकी समर्थकों के बीच खुशी और राष्ट्रीय गर्व की नई लहर पैदा कर दी है।
विश्व कप के 16वें संस्करण में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
विश्व कप स्पर्धाओं में निरंतरता की यह उपलब्धि भारत के विशाल हॉकी इतिहास को रेखांकित करती है। यद्यपि नीदरलैंड्स, जर्मनी और स्पेन भी पिछले 15 आयोजनों में खेल चुके हैं और 2026 के इस महाकुंभ का हिस्सा हैं, लेकिन प्रतियोगिता के तय शेड्यूल में भारत का मैच उनसे पहले पड़ा। नतीजतन, जैसे ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर कदम रखा, भारत के नाम 16वें विश्व कप में खेलने वाली पहली टीम होने का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज हो गया।
यह कीर्तिमान केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा मात्र नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पांच दशकों से चली आ रही खेल निष्ठा का साक्षात प्रमाण है। पूल डी के इस पहले मैच में वेल्स के खिलाफ उतरकर भारतीय टीम अब अपनी इस निरंतरता को एक यादगार खिताबी अभियान में बदलने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
1971 से 1975: शुरुआती दौर का सुनहरा सफर और कुआलालंपुर में विश्व विजय
भारत की विश्व कप यात्रा की शुरुआत वर्ष 1971 में स्पेन के शहर बार्सिलोना से हुई थी। उस उद्घाटन विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान पाया और कांस्य पदक अपने नाम किया। दो वर्षों के पश्चात, 1973 में नीदरलैंड्स के अमस्टेलवीन में आयोजित दूसरे संस्करण में टीम फाइनल तक पहुंची और रजत पदक हासिल किया।
वह शुरुआती समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान का गवाह बना, जिसकी परिणति 1975 में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के प्रतिष्ठित मर्डेका स्टेडियम में हुई। 1975 के उस ऐतिहासिक खिताबी भिड़ंत में भारत का मुकाबला प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से था। शुरुआती खेल में एक गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने मध्यंतर के पश्चात जबर्दस्त वापसी की। उत्तरार्द्ध में दो गोल ठोककर भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से पराजित किया और पहली बार विश्व कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। 1975 की वह स्वर्णिम विजय आज भी भारतीय हॉकी के इतिहास का एकमात्र विश्व कप खिताब है।
1978 से 2023 का सफर: चार दशकों के उतार-चढ़ाव और हर टूर्नामेंट के परिणाम
1975 के खिताबी शिखर को छूने के बाद अगले कई दशकों तक भारतीय टीम को प्रदर्शन में विभिन्न दौरों से गुजरना पड़ा। 1978 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में खेले गए विश्व कप में भारत ने छठा स्थान पाया। जब 1982 में मुंबई (उस समय बॉम्बे) ने पहली दफा मेजबानी की, तब स्वदेशी सरजमीं पर भारत को पांचवां स्थान प्राप्त हुआ।
वर्ष 1986 के लंदन संस्करण में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और भारत 12वें स्थान पर चला गया। इसके पश्चात 1990 में पाकिस्तान के लाहौर में हुई प्रतियोगिता में भारत 10वें नंबर पर रहा। सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में आयोजित 1994 के विश्व कप में भारत ने सुधार दिखाते हुए 5वीं रैंक पाई, हालांकि 1998 के उट्रेच (नीदरलैंड्स) टूर्नामेंट में टीम फिसलकर 9वें स्थान पर आ गई।
21वीं सदी की शुरुआत भी संघर्षपूर्ण रही। 2002 के कुआलालंपुर आयोजन में भारत 10वें तथा साल 2006 के मोएनचेनग्लैडबैक (जर्मनी) आयोजन में टीम 11वें नंबर पर रही। नई दिल्ली ने 2010 के विश्व कप का आयोजन किया, जहां भारतीय दल आठवें पायदान पर आया। इसके बाद 2014 के द हेग (नीदरलैंड्स) में 9वां, 2018 में भुवनेश्वर में छठा और 2023 में ओडिशा (भुवनेश्वर तथा राउरकेला) में संपन्न विश्व कप स्पर्धा में भारत नौवें स्थान पर सिमट गया था।
2026 का भारतीय दल: रक्षापंक्ति से लेकर फॉरवर्ड लाइन की पूरी सूची
विगत संस्करणों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए 2026 के इस विश्व कप में भारतीय स्क्वाड नए उत्साह के साथ उतरा है। टीम की कप्तानी स्टार ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह संभाल रहे हैं। इस दल में वरिष्ठ दिग्गजों और युवा ऊर्जा का समुचित समन्वय किया गया है। पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह, अनुभवी रक्षक अमित रोहिदास और मध्यक्रम के संचालक विवेक सागर प्रसाद टीम की रीढ़ हैं।
विभिन्न पोजिशन पर खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों का ब्योरा इस प्रकार है
- गोलकीपर: सूरज करकेरा एवं मोहित एचएस।
- डिफेंडर: कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, जर्मनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, सुमित, संजय और यशदीप सिवाच।
- मिडफील्डर: हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, मनप्रीत सिंह, नीलकंठ शर्मा, राजिंदर सिंह तथा आदित्य अर्जुन लालागे।
- फॉरवर्ड: मदीप सिंह, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक और शिलानंद लाकड़ा।
पूल डी की चुनौतियां और 51 साल पुराने खिताबी सूखे को खत्म करने का लक्ष्य
पूल डी के पहले मैच में वेल्स के खिलाफ अभियान शुरू करने के बाद भारत के समक्ष आगे कठिन मुकाबले हैं। सोमवार, 17 अगस्त को भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से होगा, जो शारीरिक और रणनीतिक रूप से मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। इसके पश्चात बुधवार, 19 अगस्त को अमस्टेलवीन के मैदान पर हॉकी जगत की नजरें जमी होंगी, जब भारत का मुकाबला चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा।
1975 के ऐतिहासिक खिताबी मुकाबले की स्मृतियों को ताजा करने वाले भारत-पाकिस्तान मैच का इंतजार दुनिया भर के खेल प्रेमी कर रहे हैं। 16वें विश्व कप में उतरकर नया इतिहास बनाने के बाद अब समूचा भारत यही आस लगाए है कि हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली यह टीम 51 वर्षों के खिताबी इंतजार को खत्म कर 1975 की विजय गाथा को दोहराएगी।



















